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अबकी त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
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संडीला। विधानसभा सीट संडीला में इस बार त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बनते नजर आ रहे हैं। यहां बसपा-भाजपा एवं सपा-सुभासपा गठबंधन के प्रत्याशियों के बीच चुनाव प्रचार में भी आगे निकलने की होड़ सी लग रही है।
अन्य प्रत्याशियों में फिलहाल में अभी चुनाव प्रचार ने रफ्तार नहीं पकड़ी है।
वैसे भी जातीय समीकरण एवं दलीय वोट बैंक के आंकड़ों पर नजर डालें या फिर पिछले चुनावों के परिणामों पर गौर करें, तो उनका जिक्र करते हुए सियासी पंडित इस बार के चुनाव को त्रिकोणीय एवं बेहद दिलचस्प रहने का अनुमान लगा रहे हैं।
मतदाता अपना फैसला किसके पक्ष में देंगे और कौन सबसे ज्यादा वोट पाकर विजयी होगा, यह तो आने वाला समय बताएगा, लेकिन मतदान होने से पहले निर्धारित अवधि में होने वाली वोटरों की मनुहार एवं चुनाव प्रचार ने रफ्तार पकड़ ली है।
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संडीला में अब तक जितने भी चुनाव हुए, उनमें यहां की जनता ने एक अंतराल के बाद बदलाव की बयार चलाते हुए सभी पार्टियों को जीत का तोहफा दिया है।
इस सीट से सभी प्रमुख दलों के प्रत्याशी विधायक रह चुके हैं।
पिछले दो चुनावों की बात करें तो 2012 के विधानसभा चुनावों मुख्य रूप से सपा और बसपा के बीच मुकाबला हुआ था, जिसमें सपा से कुंवर महावीर सिंह राजा भरावन व बसपा से पूर्व कैबिनेट मंत्री अब्दुल मन्नान के बीच मुख्य चुनावी लड़ाई हुई थी।
सपा के कुंवर महावीर सिंह को 84,644 वोट मिले थे, तो बसपा के अब्दुल मन्नान को 65,510 मत मिले थे। महावीर सिंह ने तीन बार से विधायक रहे अब्दुल मन्नान को 19,134 मतों से हराया था।
सपा को 44 प्रतिशत मत, जबकि बसपा को 34 प्रतिशत मत ही मिले थे। 2017 के चुनाव में अब्दुल मन्नान बसपा छोड़ कर सपा से चुनाव मैदान में थे, तो भाजपा से राजकुमार अग्रवाल थे।
अबकी मुकाबला भाजपा और सपा में था, जिसमें अब्दुल मन्नान को लगभग 35.22 प्रतिशत मत मिले थे। भाजपा के राजकुमार अग्रवाल को 90,362 वोट मिले, जो लगभग 45.49 प्रतिशत रहा।
राजकुमार अग्रवाल ने 20,403 वोटों से अब्दुल मन्नान को हराया था। अबकी चुनाव त्रिकोणीय नजर आ रहा है। सपा-सुभासपा के गठबंधन से सुनील सिंह अर्कवंशी चुनाव लड़ रहे, तो भाजपा से अलका अर्कवंशी, जबकि बसपा से पूर्व मंत्री अब्दुल मन्नान मैदान में है।
यहां जातीय समीकरणों एवं दलगत वोट बैंक के दृष्टिकोण से सियासी गुणाभाग लगाने वाले जानकार पिछले दो चुनावों के बाद इस चुनाव को त्रिकोणीय मुकाबले के रूप में देख रहे हैं।
यहां से कांग्रेस सहित कुल 10 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। सभी प्रत्याशी लोगों के बीच अपने लिए माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
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अन्य प्रत्याशियों में फिलहाल में अभी चुनाव प्रचार ने रफ्तार नहीं पकड़ी है।
वैसे भी जातीय समीकरण एवं दलीय वोट बैंक के आंकड़ों पर नजर डालें या फिर पिछले चुनावों के परिणामों पर गौर करें, तो उनका जिक्र करते हुए सियासी पंडित इस बार के चुनाव को त्रिकोणीय एवं बेहद दिलचस्प रहने का अनुमान लगा रहे हैं।
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मतदाता अपना फैसला किसके पक्ष में देंगे और कौन सबसे ज्यादा वोट पाकर विजयी होगा, यह तो आने वाला समय बताएगा, लेकिन मतदान होने से पहले निर्धारित अवधि में होने वाली वोटरों की मनुहार एवं चुनाव प्रचार ने रफ्तार पकड़ ली है।
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संडीला में अब तक जितने भी चुनाव हुए, उनमें यहां की जनता ने एक अंतराल के बाद बदलाव की बयार चलाते हुए सभी पार्टियों को जीत का तोहफा दिया है।
इस सीट से सभी प्रमुख दलों के प्रत्याशी विधायक रह चुके हैं।
पिछले दो चुनावों की बात करें तो 2012 के विधानसभा चुनावों मुख्य रूप से सपा और बसपा के बीच मुकाबला हुआ था, जिसमें सपा से कुंवर महावीर सिंह राजा भरावन व बसपा से पूर्व कैबिनेट मंत्री अब्दुल मन्नान के बीच मुख्य चुनावी लड़ाई हुई थी।
सपा के कुंवर महावीर सिंह को 84,644 वोट मिले थे, तो बसपा के अब्दुल मन्नान को 65,510 मत मिले थे। महावीर सिंह ने तीन बार से विधायक रहे अब्दुल मन्नान को 19,134 मतों से हराया था।
सपा को 44 प्रतिशत मत, जबकि बसपा को 34 प्रतिशत मत ही मिले थे। 2017 के चुनाव में अब्दुल मन्नान बसपा छोड़ कर सपा से चुनाव मैदान में थे, तो भाजपा से राजकुमार अग्रवाल थे।
अबकी मुकाबला भाजपा और सपा में था, जिसमें अब्दुल मन्नान को लगभग 35.22 प्रतिशत मत मिले थे। भाजपा के राजकुमार अग्रवाल को 90,362 वोट मिले, जो लगभग 45.49 प्रतिशत रहा।
राजकुमार अग्रवाल ने 20,403 वोटों से अब्दुल मन्नान को हराया था। अबकी चुनाव त्रिकोणीय नजर आ रहा है। सपा-सुभासपा के गठबंधन से सुनील सिंह अर्कवंशी चुनाव लड़ रहे, तो भाजपा से अलका अर्कवंशी, जबकि बसपा से पूर्व मंत्री अब्दुल मन्नान मैदान में है।
यहां जातीय समीकरणों एवं दलगत वोट बैंक के दृष्टिकोण से सियासी गुणाभाग लगाने वाले जानकार पिछले दो चुनावों के बाद इस चुनाव को त्रिकोणीय मुकाबले के रूप में देख रहे हैं।
यहां से कांग्रेस सहित कुल 10 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। सभी प्रत्याशी लोगों के बीच अपने लिए माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं।