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प्रत्याशियों के विश्वास पर उठे सवाल तो नोटा फिर करेगा कमाल
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
Updated Tue, 10 Jan 2017 11:32 PM IST
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चुनाव
- फोटो : प्रतीकात्मक
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हरदोई। विधानसभा क्षेत्रों में दावेदारी कर रहे प्रत्याशियों पर मतदाताओं को यदि विश्वास न हो या फिर वह उनकी नजरों में मानक पर खरे न उतर रहे हों तो मतदान के दिन ईवीएम में उन्हे नन ऑफ द एबव यानी नोटा का बटन दबाने का अवसर मिलेगा। तीन साल पहले हुए लोकसभा चुनाव के बाद इस बार विधानसभा चुनाव में उन्हें नोटा का भी बटन दबाने का विकल्प दिया जा रहा है।
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आयोग ने वीडियो कांफ्रेंसिंग आदि में वोट न देने के अधिकार के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को बताया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर आप किसी मनचाहे प्रत्याशी को न देखें और आपका दिल वोट करने को गवाही न दे तो आप ईवीएम में नन ऑफ द एबव यानी नोटा वाला बटन दबा सकते हैं। उप जिला निर्वाचन अधिकारी कुंज बिहारी अग्रवाल ने बताया कि वोट न देने के संबंध में कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रू ल्स 1961 में कानून बना है। लोकसभा चुनाव में पहली बार नोटा का प्रयोग किया गया था। इसके बाद अब विधानसभा चुनाव 2017 में भी ईवीएम पर नोटा का बटन दिखने वाला है। लोकसभा चुनाव 2014 में पहली बार नोटा का विकल्प ईवीएम के माध्यम से किया गया था।
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सहायक निर्वाचन अधिकारी श्याम लाल ने बताया कि अभी तक नोटा को लेकर नियम तो थे लेकिन उनका पालन लोकसभा चुनाव 2014 से पूर्व प्रभावी तौर पर नहीं किया जा सका। पूर्व के निर्देशों में नियम थे कि मतपत्र लेने या फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के सामने जाने के बाद भी मतदाता वोट डालने से इनकार कर सकता है। बशर्ते मत न डालने संबंधी जानकारी उसे पीठासीन अधिकारी को देनी होती थी।
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सूचना दिए जाने पर पीठासीन अधिकारी को रजिस्ट्रर पर उसे दर्ज करने के निर्देश थे। इस पूरे मसले में खास बात यह भी है कि वोट डालने वाले को सिर्फ मतपत्र प्राप्त करने या फिर ईवीएम पर जाने के समक्ष ही हस्ताक्षर करने होते थे। जबकि वोट डालने से मना करने वाले को दो बार हस्ताक्षर करने होते थे। एक बार ईवीएम की ओर जाने पर और दूसरी बार बिना वोट डालकर वापस आने पर पीठासीन अधिकारी से टिप्पणी लिखे जाने के बाद हस्ताक्षर करने होते थे।