{"_id":"2c1fceb3dea4ad575e8bdcca1dc4333b","slug":"not-to-sue-on-the-verification-report-baghauli-so-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सत्यापन रिपोर्ट न देने पर बघौली थानाध्यक्ष पर मुकदमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सत्यापन रिपोर्ट न देने पर बघौली थानाध्यक्ष पर मुकदमा
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
Updated Sat, 23 Jan 2016 12:18 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आरोपी के जमानतदारों के कागजों का सत्यापन कर समय से आख्या न भेजने के मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पंचम जहेंद्र पाल सिंह ने बघौली थानाध्यक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। अदालत ने एसओ को कारण बताओ नोटिस भेजकर 28 जनवरी को न्यायालय में हाजिर होकर स्पष्टीकरण देने का भी आदेश दिया।
अदालत के समक्ष बघौली थाना क्षेत्र के तिलकपुरवा निवासी झबुले उर्फ विवेक ने प्रार्थना पत्र देकर अदालत से गुहार लगाई थी कि उसकी जमानत उच्च न्यायालय से 23 दिसंबर 2015 को मंजूर हुई थी। इसके बाद उसने अपने जमानत नामें अदालत में दाखिल किए। अदालत ने जमानतदारों के नाम व पते के सत्यापन के लिए थानाध्यक्ष बघौली को कागज प्रेषित कर रिपेार्ट मांगी। संबोधित तहसील से भी अदालत ने सत्यापन आख्या मांगी जो कि तहसील से समय से भेज दी गई। अदालत ने मामले की सुनवाई कर पाया कि थानाध्यक्ष ने जमानतनामों का सत्यापन कर आख्या तय अवधि तक नहीं भेजी।
अदालत ने माना कि उच्च न्यायालय के परिपत्र के अनुसार यदि स्थानीय जमानतदारों के मामले में सात दिवस के भीतर सत्यापन आख्या प्राप्त नहीं होती है तो ऐसी दशा में आरोपी को प्राविजनली जमानत पर रिहा कर दिया जाए एवं दोषी के खिलाफ कार्यवाही अमल में लाई जाए। अदालत ने थानाध्यक्ष बघौली को न्यायालय के आदेश की अवहेलना के मामले में नोटिस जारी कर कर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया। अदालत ने थानाध्यक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। वहीं अदालत ने आरोपी विवेक उर्फ झबुले को प्रोविजनली जमानत पर रिहा किए जाने का भी आदेश दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
अदालत के समक्ष बघौली थाना क्षेत्र के तिलकपुरवा निवासी झबुले उर्फ विवेक ने प्रार्थना पत्र देकर अदालत से गुहार लगाई थी कि उसकी जमानत उच्च न्यायालय से 23 दिसंबर 2015 को मंजूर हुई थी। इसके बाद उसने अपने जमानत नामें अदालत में दाखिल किए। अदालत ने जमानतदारों के नाम व पते के सत्यापन के लिए थानाध्यक्ष बघौली को कागज प्रेषित कर रिपेार्ट मांगी। संबोधित तहसील से भी अदालत ने सत्यापन आख्या मांगी जो कि तहसील से समय से भेज दी गई। अदालत ने मामले की सुनवाई कर पाया कि थानाध्यक्ष ने जमानतनामों का सत्यापन कर आख्या तय अवधि तक नहीं भेजी।
विज्ञापन
अदालत ने माना कि उच्च न्यायालय के परिपत्र के अनुसार यदि स्थानीय जमानतदारों के मामले में सात दिवस के भीतर सत्यापन आख्या प्राप्त नहीं होती है तो ऐसी दशा में आरोपी को प्राविजनली जमानत पर रिहा कर दिया जाए एवं दोषी के खिलाफ कार्यवाही अमल में लाई जाए। अदालत ने थानाध्यक्ष बघौली को न्यायालय के आदेश की अवहेलना के मामले में नोटिस जारी कर कर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया। अदालत ने थानाध्यक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। वहीं अदालत ने आरोपी विवेक उर्फ झबुले को प्रोविजनली जमानत पर रिहा किए जाने का भी आदेश दिया।
विज्ञापन