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......नितिन ने किया उपाध्यक्ष पद और सपा दोनों से किनारा
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हरदोई। सदर सीट से विधायक नितिन अग्रवाल ने बुधवार को विधानसभा उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद सपा से भी किनारा कर लिया। उन्होंने सबसे पहले सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी जनता से साझा की। पहले से ही भाजपा के टिकट पर सदर सीट से उनके चुनाव लड़ने की चर्चाओं को इस इस्तीफे से मजबूती मिल गई है। खास बात यह है कि उनका यह कदम भाजपा प्रत्याशियों के नामों की सूची जारी होने से ठीक पहले आया है।
नितिन अग्रवाल के इस्तीफे के बाद जिले में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि भाजपा की सूची में सदर सीट से नितिन अग्रवाल का नाम लगभग तय है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जनसभा में ही इसके संकेत मिल गए थे। उन्होंने खुद मंच से इसका जिक्र किया था। श्री अग्रवाल पिछले काफी समय से भाजपा के संग कदमताल मिलाकर चल रहे हैं।
अग्रवाल परिवार के खाते में रही है सदर सीट
हरदोई सदर विधानसभा सीट पिछले तीन दशकों से अग्रवाल परिवार के खाते में रही है। वर्ष 1989 में यहां से नितिन अग्रवाल के पिता नरेश अग्रवाल ने विधानसभा का चुनाव जीता था। इसके बाद से 2012 तक यह सीट उन्हीं के पास रही। 2012 के चुनाव में उनकी इस विरासत को नितिन अग्रवाल ने संभाला। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में विपरीत लहर में सपा से नितिन अग्रवाल ने इस सीट पर जीत दर्ज कर भाजपा को भी अपनी मजबूती दिखाई। खास बात यह है कि इस चुनाव में जिले की शेष सभी विधानसभा सीटें भगवा लहर में भाजपा प्रत्याशियों के पाले में जा गिरी थीं। केवल सदर सीट पर सपा की जीत नितिन अग्रवाल के रूप में हुई थी। बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था।
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नितिन अग्रवाल के इस्तीफे के बाद जिले में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि भाजपा की सूची में सदर सीट से नितिन अग्रवाल का नाम लगभग तय है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जनसभा में ही इसके संकेत मिल गए थे। उन्होंने खुद मंच से इसका जिक्र किया था। श्री अग्रवाल पिछले काफी समय से भाजपा के संग कदमताल मिलाकर चल रहे हैं।
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अग्रवाल परिवार के खाते में रही है सदर सीट
हरदोई सदर विधानसभा सीट पिछले तीन दशकों से अग्रवाल परिवार के खाते में रही है। वर्ष 1989 में यहां से नितिन अग्रवाल के पिता नरेश अग्रवाल ने विधानसभा का चुनाव जीता था। इसके बाद से 2012 तक यह सीट उन्हीं के पास रही। 2012 के चुनाव में उनकी इस विरासत को नितिन अग्रवाल ने संभाला। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में विपरीत लहर में सपा से नितिन अग्रवाल ने इस सीट पर जीत दर्ज कर भाजपा को भी अपनी मजबूती दिखाई। खास बात यह है कि इस चुनाव में जिले की शेष सभी विधानसभा सीटें भगवा लहर में भाजपा प्रत्याशियों के पाले में जा गिरी थीं। केवल सदर सीट पर सपा की जीत नितिन अग्रवाल के रूप में हुई थी। बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था।
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