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अपनों पर रहम, कोटेदार पर रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो/हरदोई
Updated Thu, 30 Jun 2016 12:00 AM IST
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राशन कार्ड
- फोटो : file photo
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कछौना(हरदोई)। संडीला तहसील के ज्ञानपुर गांव में 293 बोरी अनाज बरामदगी के मामले में प्रशासन ने कोटेदार पर तो रिपोर्ट दर्ज करा दी लेकिन अपने अधिकारियों को बख्श दिया। नियमानुसार राशन ब्लैक होने से वितरण कराने के लिए लगाए गए पर्यवेक्षक, उपभोग प्रमाणपत्र देने वाले अधिकारी भी कोटेदार के बराबर दोषी हैं। पूर्ति निरीक्षक को भी नियमित दुकानों की जांच करनी होती है। इसके बावजूद एक भी अधिकारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई।
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कछौना ब्लाक के ज्ञानपुर गांव के कोटेदार श्याम बाबू से ब्लैक होने जा रहा 117 बोरी अनाज पुलिस ने रविवार रात पकड़ा था। सोमवार को पूर्ति निरीक्षक और एसडीएम ने गांव के तीन घरों से 176 बोरी गेहूं, चावल बरामद किया था। एसडीएम ने ये राशन गोदाम भिजवा दिया था। सबकुछ साफ होने के बावजूद लंबी पड़ताल के बाद मंगलवार को कोटेदार के खिलाफ कार्रवाई हुई। पूर्ति निरीक्षक अमित चतुर्वेदी की तहरीर पर कालाबाजारी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। प्रशासन ने कोटेदार पर तो रिपोर्ट दर्ज कर ली लेकिन अपने अधिकारियों को छोड़ दिया जबकि राशन न बंटने पर वह कोटेदार से ज्यादा दोषी हैं। कछौना थानाध्यक्ष श्याम बाबू शुक्ला ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
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पर्यवेक्षक ने रिपोर्ट में की धोखाधड़ी
राशन वितरण में हर राशन दुकान पर एक पर्यवेक्षक की ड्यूटी लगाई जाती है। मार्च में खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू हुआ है। तब से राशन मार्च, अप्रैल, मई और जून में वितरित किया जा चुका है। ज्ञानपुर के कोटे पर इन चार महीनों में अलग-अलग अधिकारियों को राशन बंटवाने के लिए पर्यवेक्षक बनाया गया। पर्यवेक्षकों ने बिना राशन बंटवाए ही पूरा राशन बांटने की रिपोर्ट पूर्ति कार्यालय में जमा कर दी। पर्यवेक्षक की रिपोर्ट और प्रधान, लेखपाल या पंचायत सचिव की ओर से जारी उपभोग प्रमाण पत्र के आधार पर ही अगले महीने का उठान होता है। ऐसे में पर्यवेक्षक के साथ उपभोग प्रमाणपत्र जारी करने वाले अधिकारी भी राशन ब्लैक होने में बराबर के दोषी हैं, इसके बावजूद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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गांव में राशनकार्ड बनाने में भी खेल
ज्ञानपुर गांव में राशनकार्ड बनाने में भी खेल किया गया है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार ज्ञानपुर की आबादी 2048 है। पूर्ति विभाग की वेबसाइट के अनुसार गांव में पात्र गृहस्थी के 287 राशनकार्डों में 1426 लाभार्थी और अंत्योदय के 99 राशनकार्डों में 283 लाभार्थी हैं। नियमानुसार गांव की कुल आबादी के 73.9 प्रतिशत ही राशनकार्ड बनाए जा सकते हैं। किंतु ज्ञानपुर गांव में 83.5 प्रतिशत लोगों के पात्र गृहस्थी और अंत्योदय राशनकार्ड बना दिए गए हैं।
तो क्या झूठी है पुलिस?
रविवार रात ग्रामीणों की सूचना पर ज्ञानपुर थाने की पुलिस ने ही गांव के बाहर डीसीएम पकड़ी थी। इस डीसीएम में 117 बोरी गेहूं, चावल लदा था। अब वही पुलिस मामले की जांच की बात कह रही है। तो क्या पुलिस ने डीसीएम पकड़ने की गलत सूचना पूर्ति विभाग के अधिकारियों को दी थी, या अब जांच के नाम पर खेल करने की तैयारी है।