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कम होने की जगह बढ़ गया कुपोषण
अमर उजाला ब्यूरो हरदोई।
Updated Mon, 04 Jan 2016 12:16 AM IST
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जनपद में अतिकुपोषित का दंश कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है। राज्य पोषण मिशन की शुरुआत इस उद्देश्य से की गई थी कि कुपोषण को कम किया जाएगा। वजन दिवस के बाद दिसंबर में कराए गए सर्वे में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ है। दिसंबर की सर्वे रिपोर्ट से फिलहाल शासन को अवगत करा दिया गया है।
सूबे में राज्य पोषण मिशन की शुरूआत बच्चों में कुपोषण को कम करने के लिए की गई। मिशन के तहत जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी सहित जिला स्तरीय अधिकारियों ने दो-दो गांवों को गोद ले रखा है। गांवों को गोद देने के पीछे शासन का उद्देश्य सिर्फ यही था कि अधिकारी अपनी निगरानी में बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पोषाहार का वितरण कराएं और टीकाकरण कर कुपोषण को दूर करवाएं। शासन के निर्देश पर गांव गोद तो ले लिए गए लेकिन जनपद में अतिकुपोषित बच्चों के आंकड़ों को लेकर भी भ्रम था। ऐसे में सात और 10 सितंबर 2015 को वजन दिवस आयोेजित कर अतिकुपोषित बच्चों को चिह्नित किया गया।
वजन दिवस के बाद जिले में 39532 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए, जिनके स्वास्थ्य में सुधार के प्रति बाल विकास विभाग सहित जिला पंचायत राज विभाग और स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदारी दी गई पर जनपद में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ गई। दिसंबर में एक बार फिर वजन कर सर्वे कराया गया तो जिले में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या बढ़कर 41001 हो गई। जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रकाश कुमार ने बताया कि शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है। बताया कि गोद लेने वाले कई अधिकारियों में से अपने गांव नहीं गए हैं जिसको लेकर कार्यक्रम में शिथिलता आई है।
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सूबे में राज्य पोषण मिशन की शुरूआत बच्चों में कुपोषण को कम करने के लिए की गई। मिशन के तहत जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी सहित जिला स्तरीय अधिकारियों ने दो-दो गांवों को गोद ले रखा है। गांवों को गोद देने के पीछे शासन का उद्देश्य सिर्फ यही था कि अधिकारी अपनी निगरानी में बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पोषाहार का वितरण कराएं और टीकाकरण कर कुपोषण को दूर करवाएं। शासन के निर्देश पर गांव गोद तो ले लिए गए लेकिन जनपद में अतिकुपोषित बच्चों के आंकड़ों को लेकर भी भ्रम था। ऐसे में सात और 10 सितंबर 2015 को वजन दिवस आयोेजित कर अतिकुपोषित बच्चों को चिह्नित किया गया।
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वजन दिवस के बाद जिले में 39532 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए, जिनके स्वास्थ्य में सुधार के प्रति बाल विकास विभाग सहित जिला पंचायत राज विभाग और स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदारी दी गई पर जनपद में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ गई। दिसंबर में एक बार फिर वजन कर सर्वे कराया गया तो जिले में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या बढ़कर 41001 हो गई। जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रकाश कुमार ने बताया कि शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है। बताया कि गोद लेने वाले कई अधिकारियों में से अपने गांव नहीं गए हैं जिसको लेकर कार्यक्रम में शिथिलता आई है।
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