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ज्ञान युग दिवस के रूप में मना महर्षि योगी का जन्म दिवस
अमर उजाला ब्यूरो हरदोई।
Updated Wed, 13 Jan 2016 12:32 AM IST
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शाहजहांपुर रोड स्थित महर्षि विद्या मंदिर में मंगलवार को महर्षि महेश योगी का जन्म दिन ज्ञान युग दिवस के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक परंपरानुसार गुरु पूजा से किया गया। इसके बाद वक्ताओं ने महर्षि के उत्कृष्ट कार्यों की चर्चा की।
इसके पहले दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए मुख्य अतिथि जिलाधिकारी रमेश मिश्र ने भारतीय दर्शन व परंपरा को महर्षि विद्या मंदिर की शिक्षा प्रणाली से जोड़कर उसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय योग के वैश्विक महत्व का वर्णन कर युवा पीढ़ी को भारतीय दर्शन व परंपरा को अपनाने और उसके महत्व को समझने का आवाहन किया। प्रधानाचार्य अवधेश प्रताप सिंह ने कहा कि महर्षि जी का उद्देश्य सिर्फ शिक्षा देना ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में शांति स्थापित करना था।
शिक्षा संस्थाओं को संचालित करने के पीछे महर्षि का उद्देश्य आधुनिक शिक्षा के साथ साथ वैदिक सभ्यता को भी पुनर्जीवित करना था। इसके लिए महर्षि ने वैदिक विज्ञान को विज्ञान की कसौटी पर परख कर उसे विश्व में स्थान दिलाया। इस दौरान विद्यालय के छात्रों अर्पण, आदर्श, अक्षय, शोभित, आर्या, शिखर, विशाल, वरूण, तुषार, प्रिंस आदि ने शहीदों की मजारों पे नाट्य प्रस्तुत किया। कक्षा छह के छात्रों शिखर, आयुष, जनमेजय आदि ने श्री गणेश देवा पर नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया।
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इसके बाद अंग्रेजी नाट्य इंर्पोटेंश आफ एजुकेशन इन सोसाइटी का प्रस्तुतीकरण कक्षा 11 व 12 के छात्र छात्राओं संध्या, सपना, हेमंत, विक्रांत, करमजीत, ऐश्वर्या व सोनिया के द्वारा किया गया। कक्षा 10 की छात्राओं समीक्षा, रोजल, अंजली व प्रतिष्ठा ने दीवानी मस्तानी हो गई गीत पर नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। इसके अतिरिक्त छोटे बच्चों ने रंग दे बसंती गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया।
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इसके पहले दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए मुख्य अतिथि जिलाधिकारी रमेश मिश्र ने भारतीय दर्शन व परंपरा को महर्षि विद्या मंदिर की शिक्षा प्रणाली से जोड़कर उसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय योग के वैश्विक महत्व का वर्णन कर युवा पीढ़ी को भारतीय दर्शन व परंपरा को अपनाने और उसके महत्व को समझने का आवाहन किया। प्रधानाचार्य अवधेश प्रताप सिंह ने कहा कि महर्षि जी का उद्देश्य सिर्फ शिक्षा देना ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में शांति स्थापित करना था।
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शिक्षा संस्थाओं को संचालित करने के पीछे महर्षि का उद्देश्य आधुनिक शिक्षा के साथ साथ वैदिक सभ्यता को भी पुनर्जीवित करना था। इसके लिए महर्षि ने वैदिक विज्ञान को विज्ञान की कसौटी पर परख कर उसे विश्व में स्थान दिलाया। इस दौरान विद्यालय के छात्रों अर्पण, आदर्श, अक्षय, शोभित, आर्या, शिखर, विशाल, वरूण, तुषार, प्रिंस आदि ने शहीदों की मजारों पे नाट्य प्रस्तुत किया। कक्षा छह के छात्रों शिखर, आयुष, जनमेजय आदि ने श्री गणेश देवा पर नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया।
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इसके बाद अंग्रेजी नाट्य इंर्पोटेंश आफ एजुकेशन इन सोसाइटी का प्रस्तुतीकरण कक्षा 11 व 12 के छात्र छात्राओं संध्या, सपना, हेमंत, विक्रांत, करमजीत, ऐश्वर्या व सोनिया के द्वारा किया गया। कक्षा 10 की छात्राओं समीक्षा, रोजल, अंजली व प्रतिष्ठा ने दीवानी मस्तानी हो गई गीत पर नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। इसके अतिरिक्त छोटे बच्चों ने रंग दे बसंती गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया।