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जुलाई का पोषाहार अक्टूबर में बंटने को हो रहा तैयार
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हरदोई। कुपोषण के खात्मे के लिए दावे तो कई किए जा रहे हैं लेकिन हकीकत में विभागीय स्तर पर ही इसके इंतजाम दम तोड़ रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों, किशोरियों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को कई माह तक पोषाहार ही नसीब नहीं होता। हाल यह है कि चालू वित्तीय वर्ष में अब तक जून तक का ही पोषाहार केंद्रों पर पंजीकृत लोगों को मिला है। जुलाई का पोषाहार अब वितरण के लिए आ रहा है।
बाल विकास पुष्टाहार विभाग के अधीन कुपोषण से निपटने के लिए जंग लड़ी जा रही है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं, किशोरियों को कुपोषण से बचाने के लिए पोषाहार वितरित किया जाता है।
कुछ समय से पोषाहार के रूप में सूखा राशन वितरण किए जाने की व्यवस्था शासन स्तर से की गई है। कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों के लिए भी यह प्रबंध किए जाते हैं। इसके बावजूद आंगनबाड़ी केंद्रों पर सूखा राशन वितरित नहीं हो पा रहा है। जिले में कुल 3930 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों समेत अन्य लोगों को समय से पोषाहार वितरित नहीं हो पा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष की पहली त्रैमासिक यानी अप्रैल, मई, जून तक के पोषाहार का वितरण ही हो पाया है। दूसरे त्रैमासिक के पहले माह यानी जुलाई का पोषाहार वितरित करने की तैयारी विभाग अक्टूबर में कर रहा है।
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शासन से मिलती आपूर्ति तब होता वितरण
जनपद में बीस बाल विकास परियोजनाएं संचालित हैं। इनमें एक शहर की और बाकी सभी 19 विकास खंडों की हैं। पोषाहार की आपूर्ति शासन स्तर से केंद्रीकृत व्यवस्था में की जाती है। मतलब यह कि जब शासन से आपूर्ति मिलती है तब इसका वितरण आंगनबाड़ी कर्मचारियों के जरिये कराया जाता है। शासन से भी अगर कुछ चुनिंदा परियोजना कार्यालयों के लिए ही पोषाहार आता है, तो भी वितरण प्रभावित होता है। जब सभी परियोजना कार्यालयों के आंगनबाड़ी केंद्रों का पोषाहार आता है तब इसे वितरण के लिए भेजा जाता है।
3,39229 लाभार्थियों को होगा वितरण
जिला पूर्ति अधिकारी बुद्धि मिश्रा ने बताया कि जुलाई का पोषाहार (सूखा राशन) शासन स्तर से मिलना शुरू हो गया है। इसका वितरण जल्द ही आंगनबाड़ी कर्मचारियों के जरिये कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि जुलाई का दलिया, तेल और चना दाल का वितरण तीन लाख 39 हजार 229 लाभार्थियों में किया जाएगा। इनमें छह माह से छह वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती और धात्री महिलाएं शामिल हैं।
जितना मांगा उतनी भी नहीं मिली आपूर्ति
बाल विकास पुष्टाहार विभाग से जुड़े सूत्र बताते हैं कि जिला स्तर से शासन को मांग पत्र भेजा गया था। इस पत्र के जरिये तीन लाख 75 हजार 382 लाभार्थियों के लिए सूखा राशन यानी पोषाहार की मांग की गई थी। इसके बावजूद तीन लाख 39 हजार 229 लाभार्थियों को ही वितरण के लिए सूखे राशन की आपूर्ति हो रही है।
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बाल विकास पुष्टाहार विभाग के अधीन कुपोषण से निपटने के लिए जंग लड़ी जा रही है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं, किशोरियों को कुपोषण से बचाने के लिए पोषाहार वितरित किया जाता है।
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कुछ समय से पोषाहार के रूप में सूखा राशन वितरण किए जाने की व्यवस्था शासन स्तर से की गई है। कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों के लिए भी यह प्रबंध किए जाते हैं। इसके बावजूद आंगनबाड़ी केंद्रों पर सूखा राशन वितरित नहीं हो पा रहा है। जिले में कुल 3930 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों समेत अन्य लोगों को समय से पोषाहार वितरित नहीं हो पा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष की पहली त्रैमासिक यानी अप्रैल, मई, जून तक के पोषाहार का वितरण ही हो पाया है। दूसरे त्रैमासिक के पहले माह यानी जुलाई का पोषाहार वितरित करने की तैयारी विभाग अक्टूबर में कर रहा है।
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शासन से मिलती आपूर्ति तब होता वितरण
जनपद में बीस बाल विकास परियोजनाएं संचालित हैं। इनमें एक शहर की और बाकी सभी 19 विकास खंडों की हैं। पोषाहार की आपूर्ति शासन स्तर से केंद्रीकृत व्यवस्था में की जाती है। मतलब यह कि जब शासन से आपूर्ति मिलती है तब इसका वितरण आंगनबाड़ी कर्मचारियों के जरिये कराया जाता है। शासन से भी अगर कुछ चुनिंदा परियोजना कार्यालयों के लिए ही पोषाहार आता है, तो भी वितरण प्रभावित होता है। जब सभी परियोजना कार्यालयों के आंगनबाड़ी केंद्रों का पोषाहार आता है तब इसे वितरण के लिए भेजा जाता है।
3,39229 लाभार्थियों को होगा वितरण
जिला पूर्ति अधिकारी बुद्धि मिश्रा ने बताया कि जुलाई का पोषाहार (सूखा राशन) शासन स्तर से मिलना शुरू हो गया है। इसका वितरण जल्द ही आंगनबाड़ी कर्मचारियों के जरिये कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि जुलाई का दलिया, तेल और चना दाल का वितरण तीन लाख 39 हजार 229 लाभार्थियों में किया जाएगा। इनमें छह माह से छह वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती और धात्री महिलाएं शामिल हैं।
जितना मांगा उतनी भी नहीं मिली आपूर्ति
बाल विकास पुष्टाहार विभाग से जुड़े सूत्र बताते हैं कि जिला स्तर से शासन को मांग पत्र भेजा गया था। इस पत्र के जरिये तीन लाख 75 हजार 382 लाभार्थियों के लिए सूखा राशन यानी पोषाहार की मांग की गई थी। इसके बावजूद तीन लाख 39 हजार 229 लाभार्थियों को ही वितरण के लिए सूखे राशन की आपूर्ति हो रही है।