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ढाई घंटे में भर्ती हुआ मरीज, 12 घंटे बाद उठा शव
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हरदोई। गंभीर हालत में पहुंचने वाले कोरोना संक्रमित को गेट से वार्ड तक भर्ती होने में ढाई घंटे का समय लगा। दूसरे संक्रमित की मौत के 12 घंटे तक शव तक नहीं उठाया जा सका। ये हाल है कोविड-19 के एल-2 अस्पताल का। इस सब अव्यवस्थाओं के बाद भी जिम्मेदार सभी व्यवस्थाओं के दुरुस्त होने की बात कह रहे हैं।
प्रकरण-एक :
शहर के रेलवेगंज निवासी एक प्रतिष्ठित व्यापारी (61) को शुक्रवार को ही सीटी स्कैन होने के बाद कोरोना संक्रमित होने का पता चला। दोपहर में हालत बिगड़ने लगी तो जैसे तैसे सिफारिशों का दौर चला। शाम लगभग पौने छह बजे उन्हें कोविड-19 अस्पताल में भर्ती कर लिया गया। रात लगभग पौने आठ बजे उनकी मौत हो गई। मौत होने के बाद न तो उनका शव परिजनों को देने के लिए कोई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अस्पताल में था और न ही कोई अन्य। थक हारकर परिजनों ने शनिवार को सुबह लगभग नौ बजे आला प्रशासनिक अधिकारियों से अलग-अलग माध्यम से संपर्क किया। एडीएम सक्रिय हुए तब जाकर लगभग 10 बजे व्यापारी का शव उसके परिजनों को मिल सका।
प्रकरण-दो:
कोथावां विकास खंड के ग्राम भैनगांव निवासी एक व्यक्ति (45) कोरोना संक्रमित है। शुक्रवार तड़के हालत बिगड़ी तो शहर में रहने वाले उनके ही गांव के बार एसोसिएशन के साथ-साथ भाजपा के जिम्मेदार पद को संभालने वाले व्यक्ति से संपर्क साधा गया। बार एसोसिएशन और भाजपा के उक्त पदाधिकारी ने अपने गांव के निवासी के संक्रमित होने का हवाला देकर प्रशासनिक अफसरों से सहयोग लिया। शुक्रवार सुबह छह बजे संक्रमित व्यक्ति एल-2 अस्पताल के गेट पर पहुंच गया, लेकिन गेट से वार्ड में बेड तक उसे पहुंचाने में पौने तीन घंटे लग गए। गनीमत रही कि मरीज की हालत बहुत ज्यादा नहीं बिगड़ी थी, वरना इतनी देर में कोई भी अनहोनी हो सकती थी।
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जिम्मेदारों की सुनिए :
सीएमओ डॉ. एसएम त्रिपाठी कहते हैं कि शुक्रवार को एल-2 अस्पताल में कुछ समस्याएं र्हुइं थीं, लेकिन यह समस्याएं अब दूर कर दी गईं हैं। उन्होंने बताया कि एल-2 अस्पताल की व्यवस्थाओं में बीते 24 घंटे के अंदर काफी सुधार हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के पांच लोगों की टीम के कोरोना संक्रमितों का उपचार करने में निरंतर लगे होने की बात भी सीएमओ ने कही।
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प्रकरण-एक :
शहर के रेलवेगंज निवासी एक प्रतिष्ठित व्यापारी (61) को शुक्रवार को ही सीटी स्कैन होने के बाद कोरोना संक्रमित होने का पता चला। दोपहर में हालत बिगड़ने लगी तो जैसे तैसे सिफारिशों का दौर चला। शाम लगभग पौने छह बजे उन्हें कोविड-19 अस्पताल में भर्ती कर लिया गया। रात लगभग पौने आठ बजे उनकी मौत हो गई। मौत होने के बाद न तो उनका शव परिजनों को देने के लिए कोई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अस्पताल में था और न ही कोई अन्य। थक हारकर परिजनों ने शनिवार को सुबह लगभग नौ बजे आला प्रशासनिक अधिकारियों से अलग-अलग माध्यम से संपर्क किया। एडीएम सक्रिय हुए तब जाकर लगभग 10 बजे व्यापारी का शव उसके परिजनों को मिल सका।
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प्रकरण-दो:
कोथावां विकास खंड के ग्राम भैनगांव निवासी एक व्यक्ति (45) कोरोना संक्रमित है। शुक्रवार तड़के हालत बिगड़ी तो शहर में रहने वाले उनके ही गांव के बार एसोसिएशन के साथ-साथ भाजपा के जिम्मेदार पद को संभालने वाले व्यक्ति से संपर्क साधा गया। बार एसोसिएशन और भाजपा के उक्त पदाधिकारी ने अपने गांव के निवासी के संक्रमित होने का हवाला देकर प्रशासनिक अफसरों से सहयोग लिया। शुक्रवार सुबह छह बजे संक्रमित व्यक्ति एल-2 अस्पताल के गेट पर पहुंच गया, लेकिन गेट से वार्ड में बेड तक उसे पहुंचाने में पौने तीन घंटे लग गए। गनीमत रही कि मरीज की हालत बहुत ज्यादा नहीं बिगड़ी थी, वरना इतनी देर में कोई भी अनहोनी हो सकती थी।
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जिम्मेदारों की सुनिए :
सीएमओ डॉ. एसएम त्रिपाठी कहते हैं कि शुक्रवार को एल-2 अस्पताल में कुछ समस्याएं र्हुइं थीं, लेकिन यह समस्याएं अब दूर कर दी गईं हैं। उन्होंने बताया कि एल-2 अस्पताल की व्यवस्थाओं में बीते 24 घंटे के अंदर काफी सुधार हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के पांच लोगों की टीम के कोरोना संक्रमितों का उपचार करने में निरंतर लगे होने की बात भी सीएमओ ने कही।