फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   forget faimily for country welfare

ेश और जनसेवा में भुलाए बैठे घर-परिवार

Wed, 08 Apr 2020 10:45 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 08 Apr 2020 10:45 PM IST
विज्ञापन
forget faimily for country welfare
हरदोई के कोरोना योद्धा । संदिग्ध मरीजों का सैंपल लेने जाने से पहले विजय चिन्ह बनाए अमित शर्मा और ? - फोटो : HARDOI
हरदोई। कोरोना संक्रमण से निपटने में असली योद्धा चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ अहम भूमिका निभा रहे हैं। संक्रमित लोगों के इलाज में धरती के भगवान कोई कसर नहीं छोड़ रहे। जिले में कोरोना पॉजिटिव का एक केस मिलने के बाद उसके संपर्क में आए एक चिकित्सक समेत चार स्वास्थ्य कर्मियों को भी क्वारंटीन किया गया है। ये लोग निर्धारित अवधि तक परिजनों से भी नहीं मिल सकेंगे लेकिन सभी का कहना है कि परिवार से ज्यादा जरूरी समाज और देशहित है। ऐसे में घर से दूर रहने में ही सबकी भलाई है। कोरोना से जंग में ये उनकी छोटी सी भूमिका है।
विज्ञापन

देश के लिए एक माह भी रहेंगे क्वारंटीन
जिला अस्पताल में तैनात डॉ. विकास चंद्रा एक अप्रैल से लगातार ड्यूटी पर हैं। तीन अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आने के बाद उनको 18 अप्रैल तक के लिए क्वारंटीन किया गया है। डॉ. विकास चंद्रा का परिवार लखनऊ में रहता है। उनका कहना है कि ऐसे में घर से दूर रहने में ही उनकी और समाज की भलाई है। उनका कहना है कि दिनचर्या गड़बड़ा गई है। 12 से 18 घंटे तक भी ड्यूटी करनी पड़ रही है, लेकिन देशहित में ये जरूरी है। हर कोई लॉकडाउन का पालन करे। उन्होंने कहा कि हम कोरोना को हरा लेंगे क्योंकि सामूहिक रूप से जीतने के प्रयास हो रहे हैं। ऐसे में अगर उन्हें एक माह भी क्वारंटीन रहना पड़े तो कोई अफसोस नहीं।
विज्ञापन

बेटा कहता है घर आओ तो बहला देते हैं
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में लैब टेक्नीशियन अकील की जिम्मेदारी संदिग्ध मरीजों का नोजल और थ्रोट स्वैब लेने की है। जब से जनपद में एक कोरोना पॉजिटिव मिला है, तब से वह घर नहीं गए और अस्पताल के बाद सीधे क्वारंटीन सेंटर ही जाते हैं। कोरोना को हराने के लिए वह परिवार से दूरी जरूरी बताते हैं। अकील का 11 वर्षीय बेटा जैद पांच दिन से उनसे नहीं मिला है। मोबाइल पर जैद पिता से पूछता है कि घर कब आओगे तो अकील बहलाने के लिए जल्द घर आने का जवाब देते हैं। उनका बेटा कहता है कि कोरोना को जार में बंद कर दो और घर आ जाओ।
विज्ञापन
विज्ञापन

देश सेवा सर्वोपरि, परिवार के लिए तो पूरी जिदंगी पड़ी
जिला अस्पताल में लैब टेक्नीशियन पद पर तैनात अमित शर्मा भी क्वारंटीन हैं। तीन अप्रैल के बाद से वह घर पर नहीं गए हैं। वह कहते हैं कि घर से ज्यादा जरूरी जिम्मेदारी निभाना है। कोरोना को हराने के लिए जो कुछ संभव है, वह सब किया जा रहा है। अमित का साढ़े तीन साल का बेटा ईशान शर्मा वीडियो कॉलिंग से उनसे बात कर लेता है। उन्हें पूरे परिवार का सहयोग मिल रहा है। हर कोई चाहता है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को खत्म करने में उसका भी योगदान रहे। वह कहते हैं कि इस समय देश सेवा सर्वोपरि है। परिवार के लिए तो पूरा जीवन पड़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed