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सौ दिन का भी नहीं मिला रोजगार

Tue, 10 Mar 2015 12:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई Updated Tue, 10 Mar 2015 12:44 AM IST
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Did not get a hundred days of employment

मनरेगा के नियमों पर गौर करें, तो एक जाबकार्ड धारक

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परिवार को कम से कम सौ दिन का रोजगार देना अनिवार्य है, पर जिले में मनरेगा के नियम का सही ढंग से पालन ही नहीं हुआ। तमाम विकास खंडों में सौ दिन का काम पाने वाले परिवारों की संख्या काफी हद तक कम है, जबकि कुछ में तो सौ दिन का रोजगार पाने वाले परिवारों की प्रगति शून्य है।

शासन से भले ही अफसरों को निर्देश दिए जा रहे हों, पर जमीनी स्तर पर प्रगति नहीं हो रही है। काम को शहरों की ओर बढ़ रहे पलायन को रोकने को केंद्र सरकार ने मनरेगा को शुरू किया। सरकार ने मनरेगा के अंतर्गत काम करने वाले व्यक्तियों के जाबकार्ड बनाकर काम करने के इच्छुक व्यक्तियों को कम से कम सौ दिन का काम देने के निर्देश दिए।

मनरेगा की गाइड लाइन के अनुसार सौ दिन का काम देने पर शुरुआती दौर में तो काफी जोर दिया गया, पर अब जाब कार्डधारक को काम देने पर ज्यादा रुचि नहीं ली जा रही है। जिससे मनरेगा के उद्देश्य सफल नहीं हो रहे हैं और मजदूरों को एक बार फिर काम की तलाश में शहरों की ओर भागना पड़ रहा है।

एक तो मनरेगा में काम करने वालों को समय से मजदूरी नहीं मिल रही, वहीं अब एफटीओ लागू होने से काफी लंबी प्रक्रिया के बाद ही मजदूरी का भुगतान हो पा रहा है। यह भी वजह है कि अब जाब कार्डधारक मनरेगा से काम करने के इच्छुक नहीं रह गए और सौ दिन का काम देने की मंशा को ग्रहण लग रहा है।

जिले के आंकड़ों पर गौर करें तो 19 विकास खंडों में सिर्फ 648 परिवारों को ही सौ दिन का रोजगार दिया गया। जिसमें से तीन विकास खंड ऐसे हैं, जहां एक भी परिवार को सौ दिन का रोजगार नहीं मिला है। वहीं कुछ अन्य विकास खंडों में स्थिति अत्यंत खराब है।

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