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Hardoi News: तीन टीम बनाकर शातिर करते थे ठगी

Tue, 02 Jun 2026 12:06 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jun 2026 12:06 AM IST
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Con artists carried out scams by forming three teams.
- बेवसाइट और गेमिंग एप से ठगी का कारोबार चला रहे बीटेक के तीन छात्र समेत दस गिरफ्तार
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- वर्ष 2025 में दर्ज हुए मामले की विवेचना में कड़ी से कड़ी जोड़ शातिरों तक पहुंची पुलिस

संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। बेबसाइट और गेमिंग एप के जरिए पिछले दो साल से ठगी का कारोबार चला रहे बीटेक के तीन छात्रों समेत दस लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। सीओ सिटी अंकित मिश्रा ने बताया कि पूरा गिरोह तीन टीम बनाकर काम करता है।
साइबर थाने की टीम ने मामले की विवेचना के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर काम किया और एक बड़े गिरोह का खुलासा करने में सफलता पाई। पहली टीम खाता खुलवाने के लिए लोगों को तलाशती है।
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यही टीम खाता खुलवाने वालों के नाम पर सिम कार्ड और मोबाइल की व्यवस्था करती है। दूसरी टीम की जिम्मेदारी यूपीआई और क्यूआर कोड जनरेट करती है। यही टीम लोगों से बातचीत कर उन्हें निशाना बनाती है। तीसरी टीम ठगी के रुपयों का बैंक खातों से निकालकर दूसरे खातों में भेजने का काम करती है। पुलिस को फिलहाल दूसरी टीम के सदस्य गिरफ्तार करने में कामयाब मिली है। पहली टीम का एक सदस्य भी पुलिस के हत्थे चढ़ा है। हालांकि सीओ सिटी का कहना है कि अभी इस गिरोह के और सदस्यों की तलाश की जा रही है।
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इनसेट

पांच हजार रुपये के लालच में खुल जाते बैंक में खाते, मिला जाता सिम

पूछताछ के दौरान पुलिस को आरोपियों ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। आरोपी ग्रामीण इलाकों के लोगों को ही बैंक खाता खुलवाने से लेकर सिम निकलवाने तक में इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा नेट पर सरफिंग करने वाले लो प्रोफाइल युवाओं को भी यह लोग अपने कारोबार में हिस्सेदार सा बना लेते हैं। पांच हजार रुपये में लोगों के अभिलेख लेकर उनके नाम पर बैंक खाता खुलवा देते हैं। उनके ही आधार कार्ड का इस्तेमाल कर सिम भी ले लेते हैं। पांच हजार रुपये हर ट्रांजक्शन पर भी दिलाने का भरोसा दिया जाता है। हालांकि अभी इस बात की स्पष्ट पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन आरोपियों ने पुलिस को यही जानकारी दी है।

इनसेट

जीतने पर रुपये देने में काम आ रहा था ठगी का बजट

आरोपियों ने ऑनलाइन बेबसाइट कबूक, स्पोर्ट 99.वीआईपी, रोलेक्स पैनल.बिन और लोटस 365.बुक.कॉम आदि बनना रखी थी। इन्हीं के जरिए गेमिंग एप्प भी संचालित होते थे। अमूमन लोग गेमिंग एप्प में पैसा लगाकर हार जाते हैं, लेकिन कई बार लोग जीतते भी हैं। जीतने पर उन्हें रुपये देने के लिए ठगी के बजट का इस्तेमाल होता था। दरअसल पूरे गिरोह में काम करने वाली तीसरी टीम फ्रॉड के लिए खोले गए खातों में आने वाले बजट को गेमिंग एप्प के ही बैंक खातों में ट्रांसफर कर देते हैं।
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