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बीएलओ ड्यूटी न लेने वालों पर होगी कार्रवाई

Tue, 21 Jun 2016 12:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/हरदोई
अमर उजाला ब्यूरो/हरदोई Updated Tue, 21 Jun 2016 12:12 AM IST
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BLO duty will take action against those
हंगामा करते शिक्षक - फोटो : अमर उजाला

हरदोई। बीएलओ ड्यूटी न लेने वाले शिक्षकों पर संकट बढ़ता ही जा रहा है। रविवार को वेतन रोकने के आदेश के बाद  सोमवार को कुछ शिक्षकों ने ड्यूटी ज्वाइन की है। तहसीलदार सदर आर के चौरसिया ने बताया कि हरदोई सदर नगर पालिका के निर्वाचन नामावलियों के पुनरीक्षण कार्य के लिए 144 शिक्षकों की बतौर बीएलओ ड्यूटी लगाई गई थी । जिसमें ज्वाइन न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए बीएसए से कहा गया था।

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बीएसए की कार्रवाई के बाद कुछ ने सोमवार को ज्वाइन कर लिया है। उन्होंने बताया कि 144 शिक्षकों में देर शाम तक 102 शिक्षकों की ज्वाइनिंग हो चुकी है। 42 शिक्षकों ने अभी भी ज्वाइन नहीं किया है। देर शाम डीएम ने निर्वाचन नामावलियों के पुनरीक्षण कार्य की समीक्षा करते हुए कहा कि जिन लोगों ने बतौर बीएलओ ड्यूटी ज्वाइन नहीं किया है उनको ज्वाइन कराने के लिए बीएसए कार्रवाई करें फिर भी ज्वाइन न करें तो नियमानुसार एफआईआर दर्ज कराएं। इस ओर किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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तहसीलदार ने बताया कि बीएसए से इस ओर जानकारी की जा रही है कि अब वे अपने स्तर से ज्वाइनिंग कराने के लिए क्या कार्रवाई कर रहे हैं और ज्वाइन न करने वालों के खिलाफ एफआईआर कब तक कराएंगे।
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शिक्षक संघ ने दिया ज्ञापन
हरदोई। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी से मुक्त करने एवं की गई कार्रवाई को वापस लिए जाने की मांग की गई। शिक्षक संघ अध्यक्ष शिव शंकर पांडेय ने कहा कि एक जुलाई से स्कूल खुल रहे हैं और कई स्कूलों के सभी शिक्षकों की ड्यूटी लगी है ऐसे में स्कूलों में शिक्षण कार्य चौपट होगा। मंत्री विपिन सिंह सहित अन्य शिक्षक नेता मौजूद रहे।


तो शिक्षक नेताओं की क्यों नहीं लगती ड्यूटी
हरदोई। विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी बनकर बीएसए कार्यालय के आस पास मंडराने वाले कई शिक्षक नेताओं को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। सोमवार को तहसीलदार सदर से मिलने आए कुछ लोगों ने यह सवाल किया कि साहब शिक्षक नेताओं की ड्यूटी लगाने के लिए तो कोई छूट नहीं मिलती है मगर ड्यूटी क्यों नहीं लगती है। चुनावों से लेकर विभिन्न कार्यक्रमों में शिक्षक नेताओं की ड्यूटी न लगना और आम शिक्षकों की हर बार ड्यूटी लगना पूरे सिस्टम पर सवाल उठ रहा है। तमाम शिक्षक नेता शहर में निवास करते हैं मगर न तो स्कूल जाते हैं और न उनकी कभी बीएलओ आदि में ड्यूटी लगती है।

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