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Hardoi News: बायोकेमिस्ट्री मशीन ताले में बंद, जांच के लिए 16 किलोमीटर दौड़ रहे मरीज
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हरदोई/हरियावां। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का दम निकल रहा है। हरियावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बायोकेमिस्ट्री मशीन होने के बाद भी जांच के लिए मरीजों को 16 किलोमीटर दूर मेडिकल कॉलेज जाना पड़ रहा है। यह हाल तब है जब मशीन के साथ ही यहां टेक्नीशियन भी तैनात हैं। सीएचसी में किट से होने वाली जांचोें को छोड़ दें तो बाकी सबके लिए मेडिकल कॉलेज ही दौड़ना पड़ता है।
ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सीएचसी पर ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिटें बनाई गई हैं। 15वें वित्त आयोग की धनराशि से बने एक बीपीएचयू पर करीब 48 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। भवन निर्माण के साथ ही करीब आठ से 10 लाख रुपये की बायोकेमिस्ट्री मशीन भी रक्त नमूनों के परीक्षण के लिए लगाई गई है।
करीब एक साल बीतने को है लेकिन बायोकेमिस्ट्री मशीन बीपीएचयू के कमरे में ताले के अंदर बंद है। मशीन के लिए जरूरी रिजेंट भी मौजूद है और लैब टेक्नीशियन भी तैनात है। इसके बाद भी मरीजों की जांच नहीं हो रही है। किटों से होने वाली मलेरिया, हीमोग्लोबिन, शुगर, टायफाइड, यूरिन प्रेग्नेंसी टेस्ट आदि जांचे होती हैं। महत्वपूर्ण जांचों के लिए मरीजों को हरियावां से 16 किमी. दूर मेडिकल कॉलेज या फिर जिले की निजी लैबों पर ही आना पड़ता है।
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बायोकेमिस्ट्री मशीन से होती हैं यह जांचें
बायोकेमिस्ट्री मशीन से एक साथ कई जांचें की जा सकती हैं। इसके लिए रक्त का नमूना लेना होता है। लिपिड प्रोफाइल, यूरिक एसिड, लिवर फंक्शन टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट, शुगर आदि की जांचें इस मशीन से होती हैं।
स्वास्थ्य कर्मी कर रहा मरीजों की जांंच
हरियावां सीएचसी पर टेक्नीशियन आकाश कुमार तैनात हैं। रोजाना 35 से 40 मरीजों की जांच होती है। बुधवार को भी मरीजों की जांच हो रही थी लेकिन टेक्नीशियन के स्थान पर अन्य कर्मी किटों से जांच करते पाए गए। जानकारी करने पर उनके किसी बैठक में गए होना बताया गया। आकाश कुमार से बात की गई तो उन्होंने भी बताया कि वह मीटिंग में हैं।
बायोकेमिस्ट्री मशीन को चलाने के लिए कार्यदायी संस्था पीओ सिटी से टेक्नीशियन दिया जाना है। इस वजह से मशीन को अभी चालू नहीं किया गया है। अधिकारियों से बात कर जल्द ही टेक्नीशियन की नियुक्ति कराई जाएगी। -डॉ. अंकुर अवस्थी, अधीक्षक, सीएचसी हरियावां
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ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सीएचसी पर ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिटें बनाई गई हैं। 15वें वित्त आयोग की धनराशि से बने एक बीपीएचयू पर करीब 48 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। भवन निर्माण के साथ ही करीब आठ से 10 लाख रुपये की बायोकेमिस्ट्री मशीन भी रक्त नमूनों के परीक्षण के लिए लगाई गई है।
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करीब एक साल बीतने को है लेकिन बायोकेमिस्ट्री मशीन बीपीएचयू के कमरे में ताले के अंदर बंद है। मशीन के लिए जरूरी रिजेंट भी मौजूद है और लैब टेक्नीशियन भी तैनात है। इसके बाद भी मरीजों की जांच नहीं हो रही है। किटों से होने वाली मलेरिया, हीमोग्लोबिन, शुगर, टायफाइड, यूरिन प्रेग्नेंसी टेस्ट आदि जांचे होती हैं। महत्वपूर्ण जांचों के लिए मरीजों को हरियावां से 16 किमी. दूर मेडिकल कॉलेज या फिर जिले की निजी लैबों पर ही आना पड़ता है।
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बायोकेमिस्ट्री मशीन से होती हैं यह जांचें
बायोकेमिस्ट्री मशीन से एक साथ कई जांचें की जा सकती हैं। इसके लिए रक्त का नमूना लेना होता है। लिपिड प्रोफाइल, यूरिक एसिड, लिवर फंक्शन टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट, शुगर आदि की जांचें इस मशीन से होती हैं।
स्वास्थ्य कर्मी कर रहा मरीजों की जांंच
हरियावां सीएचसी पर टेक्नीशियन आकाश कुमार तैनात हैं। रोजाना 35 से 40 मरीजों की जांच होती है। बुधवार को भी मरीजों की जांच हो रही थी लेकिन टेक्नीशियन के स्थान पर अन्य कर्मी किटों से जांच करते पाए गए। जानकारी करने पर उनके किसी बैठक में गए होना बताया गया। आकाश कुमार से बात की गई तो उन्होंने भी बताया कि वह मीटिंग में हैं।
बायोकेमिस्ट्री मशीन को चलाने के लिए कार्यदायी संस्था पीओ सिटी से टेक्नीशियन दिया जाना है। इस वजह से मशीन को अभी चालू नहीं किया गया है। अधिकारियों से बात कर जल्द ही टेक्नीशियन की नियुक्ति कराई जाएगी। -डॉ. अंकुर अवस्थी, अधीक्षक, सीएचसी हरियावां