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कल्याणी को पुल की दरकार
Hardoi
Updated Tue, 29 Apr 2014 05:30 AM IST
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मल्लावां (हरदोई)। क्षेत्र में विकास के दावों को कल्याणी नदी का अब तक न बना पुल ही आईना दिखा रहा है। आलम यह है कि आजादी के बाद अब तक हर चुनाव में क्षेत्र की जनता को नेताओं के खोखले आश्वासन ही मिलते रहे हैं। चुनाव जीतने के बाद किसी ने इस ओर आना भी मुनासिब न समझा। नदी के पार बसे करीब एक सैकड़ा गांवों की आबादी बरसात में नदी उफनाते ही लंबी दूरी तय कर मुख्यालय तक आती है।
कई बार लोगों ने मांग की, पर नतीजा सिफर रहा, इसको लेकर यहां की जनता में भी खासा मलाल है। ब्रिटिश हुकूमत में मल्लावां को जिला मुख्यालय का दर्जा प्राप्त था। इसके बावजूद क्षेत्र में विकास कोसों दूर रहा। जिला मुख्यालय हरदोई बनने के बावजूद इस क्षेत्र से चुने प्रतिनिधियों ने यहां के विकास पर ध्यान नहीं दिया। उसी का नतीजा है कि आज भी मढ़िया, हर्रैया, बेरिया नजीरपुर, शाहपुर गंगा, लोकईया पुरवा, करवां, पूरनमऊ, हीरालाल पुरवा, मंसूरपुर समेत करीब एक सैकड़ा गांव के बाशिंदों को करवां गांव के पास स्थित कल्याणी नदी पर पुल न होने से नदी को जैसे तैसे पार कर आना पड़ता है।
समय-समय पर पुल निर्माण की मांग उठी, पर नक्कारखाने में तूती साबित हुई। स्थानीय ग्रामीणों की माने तो वर्ष 02 में बसपा से चुनाव लड़े सतीश वर्मा को जब विधायक चुना गया था तो लोगों को उम्मीद थी कि अब कुछ काम होगा, लेकिन उस समय प्रदेश में अपनी सरकार न होने से मामला लटक गया। वर्ष 07 में फिर एक बार सतीश वर्मा को मौका मिला। विधायक चुने जाने के साथ ही प्रदेश में बसपा की सरकार बनी, पर पुल फिर भी नहीं बना। इससे नाराज क्षेत्रीय जनता ने वर्ष 12 में सतीश वर्मा की जगह उनके ममेरे भाई बृजेश वर्मा को बसपा से विधायक चुना था और उम्मीद जताई थी कि वह पुल बनवाने में मदद करेंगे।
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इसी तरह वर्ष 04 और 09 में बसपा से अशोक रावत सांसद चुने गए। उन्होंने भी चुनाव के वक्त पुल बनवाने का वादा किया, लेकिन वह वादा आज तक पूरा नहीं हो सका। इससे क्षेत्रीय जनता अपने को ठगा महसूस कर रही है। इस बार चुनाव में फिर कल्याणी नदी पर पुल बनवाने का मुद्दा फिर उठा, तो सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशी जनता को पुल बनवाने का आश्वासन देने में जुट गए। ग्रामीणों की मानें तो अबकी वह किसी प्रत्याशी के पक्ष में नहीं, बल्कि नोटा का बटन दबाने का मन बना रहे हैं। उधर, बाढ़ के दौरान नदी में पानी आने से स्कूली बच्चे नाव पर सवार होकर नदी पारकर मल्लावां स्थित स्कूल जाते हैं। बीते साल करीब छह बार बच्चों से भरी नाव नदी में पलटी, पर बच्चों को जैसे तैसे बाहर निकाल लिया गया था।
इंसेट---
डामरीकरण न होने से चुनाव का बहिष्कार
मल्लावां। क्षेत्र में विकास न होने से आजिज ग्राम पुरवाया के लोगों ने लोगों ने संपर्क मार्ग पर डामरीकरण न होने से चुनाव का बहिष्कार करने का मन बना लिया है। उनका कहना है कि खेरवा, पुरबावां, मांझगांव व बांसा संपर्क मार्ग से पैदल निकलना भी दूभर है। इसके चलते उन्होंने गांव में बैनर टांगकर चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। यदि प्रशासन ने दबाव डाला तो नोटा का प्रयोग करेंगे। बोले, फिलहाल इस बार झूठे वादे करने वालों को सबक जरूर सिखाएंगे।
इंसेट---
बिजली पोल के सहारे पार करते नहर
मल्लावां। ऐंचामऊ गांव के पास शारदा नहर को पार करने को बनाया गया पुल एक दशक पहले टूट गया था। जिसका पुनर्निर्माण न होने से क्षेत्र के लोगों को आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस टूटे पुल पर कई बार निकलने के लिए बिजली के पोल डाले गए। जरा सी चूक हुई तो लोग नीचे गिरकर चुटहिल हो जाते हैं। वहीं बड़े वाहन कई किमी का चक्कर लगाकर माधौगंज पहुंचते हैं। कई बार नहर विभाग को अवगत कराया गया, पर ग्रामीणों की बात को अनसुना कर दिया गया। ग्रामीणों ने डीएम से पुल का निर्माण करवाने की मांग की है।
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पुल न होने से लंबी दूरी तय करनी होती
मल्लावां। करवां के रामचंद्र ने कहा कि कल्याणी नदी पर करवां गांव में पुल न बनने से बाढ़ के दौरान करीब एक सैकड़ा गांव के लोगों को मल्लावां तक आने के लिए राघौपुर होते हुए बीस कि मी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। बेरिया के रामदास ने कहा कि उनके गांव से दूरी दो किमी है। नदी में पानी भरने पर उन्हें 25 किमी का रास्ता तय कर मल्लावां जाना पड़ता है। शाहपुर पवार के सोम नारायण ने कहा कि हर बार ग्रामीणों को पुल के नाम पर छला गया है, पर अबकी नेताओं को सबक सिखाकर रहेंगे। इधर, क्षेत्र की महिलाओं को भी पुल न बनने का दंश झेलना पड़ रहा है। गर्भवती अथवा बीमार महिला को पीएचसी तक ले जाने के लिए नदी का ही एक मात्र रास्ता है। बाढ़ के दौरान यह भी जोखिम भरा रहता।
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कई बार लोगों ने मांग की, पर नतीजा सिफर रहा, इसको लेकर यहां की जनता में भी खासा मलाल है। ब्रिटिश हुकूमत में मल्लावां को जिला मुख्यालय का दर्जा प्राप्त था। इसके बावजूद क्षेत्र में विकास कोसों दूर रहा। जिला मुख्यालय हरदोई बनने के बावजूद इस क्षेत्र से चुने प्रतिनिधियों ने यहां के विकास पर ध्यान नहीं दिया। उसी का नतीजा है कि आज भी मढ़िया, हर्रैया, बेरिया नजीरपुर, शाहपुर गंगा, लोकईया पुरवा, करवां, पूरनमऊ, हीरालाल पुरवा, मंसूरपुर समेत करीब एक सैकड़ा गांव के बाशिंदों को करवां गांव के पास स्थित कल्याणी नदी पर पुल न होने से नदी को जैसे तैसे पार कर आना पड़ता है।
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समय-समय पर पुल निर्माण की मांग उठी, पर नक्कारखाने में तूती साबित हुई। स्थानीय ग्रामीणों की माने तो वर्ष 02 में बसपा से चुनाव लड़े सतीश वर्मा को जब विधायक चुना गया था तो लोगों को उम्मीद थी कि अब कुछ काम होगा, लेकिन उस समय प्रदेश में अपनी सरकार न होने से मामला लटक गया। वर्ष 07 में फिर एक बार सतीश वर्मा को मौका मिला। विधायक चुने जाने के साथ ही प्रदेश में बसपा की सरकार बनी, पर पुल फिर भी नहीं बना। इससे नाराज क्षेत्रीय जनता ने वर्ष 12 में सतीश वर्मा की जगह उनके ममेरे भाई बृजेश वर्मा को बसपा से विधायक चुना था और उम्मीद जताई थी कि वह पुल बनवाने में मदद करेंगे।
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इसी तरह वर्ष 04 और 09 में बसपा से अशोक रावत सांसद चुने गए। उन्होंने भी चुनाव के वक्त पुल बनवाने का वादा किया, लेकिन वह वादा आज तक पूरा नहीं हो सका। इससे क्षेत्रीय जनता अपने को ठगा महसूस कर रही है। इस बार चुनाव में फिर कल्याणी नदी पर पुल बनवाने का मुद्दा फिर उठा, तो सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशी जनता को पुल बनवाने का आश्वासन देने में जुट गए। ग्रामीणों की मानें तो अबकी वह किसी प्रत्याशी के पक्ष में नहीं, बल्कि नोटा का बटन दबाने का मन बना रहे हैं। उधर, बाढ़ के दौरान नदी में पानी आने से स्कूली बच्चे नाव पर सवार होकर नदी पारकर मल्लावां स्थित स्कूल जाते हैं। बीते साल करीब छह बार बच्चों से भरी नाव नदी में पलटी, पर बच्चों को जैसे तैसे बाहर निकाल लिया गया था।
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डामरीकरण न होने से चुनाव का बहिष्कार
मल्लावां। क्षेत्र में विकास न होने से आजिज ग्राम पुरवाया के लोगों ने लोगों ने संपर्क मार्ग पर डामरीकरण न होने से चुनाव का बहिष्कार करने का मन बना लिया है। उनका कहना है कि खेरवा, पुरबावां, मांझगांव व बांसा संपर्क मार्ग से पैदल निकलना भी दूभर है। इसके चलते उन्होंने गांव में बैनर टांगकर चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। यदि प्रशासन ने दबाव डाला तो नोटा का प्रयोग करेंगे। बोले, फिलहाल इस बार झूठे वादे करने वालों को सबक जरूर सिखाएंगे।
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बिजली पोल के सहारे पार करते नहर
मल्लावां। ऐंचामऊ गांव के पास शारदा नहर को पार करने को बनाया गया पुल एक दशक पहले टूट गया था। जिसका पुनर्निर्माण न होने से क्षेत्र के लोगों को आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस टूटे पुल पर कई बार निकलने के लिए बिजली के पोल डाले गए। जरा सी चूक हुई तो लोग नीचे गिरकर चुटहिल हो जाते हैं। वहीं बड़े वाहन कई किमी का चक्कर लगाकर माधौगंज पहुंचते हैं। कई बार नहर विभाग को अवगत कराया गया, पर ग्रामीणों की बात को अनसुना कर दिया गया। ग्रामीणों ने डीएम से पुल का निर्माण करवाने की मांग की है।
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पुल न होने से लंबी दूरी तय करनी होती
मल्लावां। करवां के रामचंद्र ने कहा कि कल्याणी नदी पर करवां गांव में पुल न बनने से बाढ़ के दौरान करीब एक सैकड़ा गांव के लोगों को मल्लावां तक आने के लिए राघौपुर होते हुए बीस कि मी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। बेरिया के रामदास ने कहा कि उनके गांव से दूरी दो किमी है। नदी में पानी भरने पर उन्हें 25 किमी का रास्ता तय कर मल्लावां जाना पड़ता है। शाहपुर पवार के सोम नारायण ने कहा कि हर बार ग्रामीणों को पुल के नाम पर छला गया है, पर अबकी नेताओं को सबक सिखाकर रहेंगे। इधर, क्षेत्र की महिलाओं को भी पुल न बनने का दंश झेलना पड़ रहा है। गर्भवती अथवा बीमार महिला को पीएचसी तक ले जाने के लिए नदी का ही एक मात्र रास्ता है। बाढ़ के दौरान यह भी जोखिम भरा रहता।