{"_id":"37-156154","slug":"Hardoi-156154-37","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब प्लास्टिक पेंट का जमाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब प्लास्टिक पेंट का जमाना
Hardoi
Updated Wed, 23 Oct 2013 05:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरदोई। दीवाली के त्योहार का मौसम पूरी तरह से उल्लास और उत्साह के रंग में रंगने को तैयार है। ऐसे में भला घरों की साफ सफाई से लेकर रंगरोगन को लेकर तैयारियां क्यों न हो। लोगों की इच्छानुसार घरों की रंगाई पुताई के लिए बाजार में तरह तरह के पेंट मुहैया हो गए हैं। यह अलग बात है कि अब चूना एवं सूखे डिस्टेंपर का जमाना चला गया और लिक्वड़ डिस्टेंपर से लेकर प्लास्टिक, गोल्डन पेंट की बाजार में बहार आ गई है। शहर में लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद तथा आगरा से पेंट की आमद होती है।
ब्रांडेड कंपनियों के पेंट बाजार में छाए हुए हैं, पर लोकल पेंट की भी डिमांड कम नहीं है। बाजार से जुडे़ सूत्रों के पेंट का बाजार सबसे ज्यादा उछाल दीवाली के त्योहार पर मारता है। हालांकि, ईद और होली के त्योहार में भी पेंट की बिक्री होती है, पर सबसे ज्यादा बिक्री दीवाली के मौसम में होती है। इस समय दीवाली का मौसम चल रहा है लिहाजा पेंट बाजार पहले के मुकाबले ज्यादा गुलजार हो रहा है। इधर, पेंट व्यवसायी विजय गुप्ता ने बताया कि संडीला में गुलाबी और क्रील कलर के रंगों की डिमांड बढ़ी है। पिछले 20 वर्षों में पेंट का बाजार 50 लाख से 5 करोड़ पर पहुंच गया है।
अब बाजार में टिकाऊ और आकर्षक पेंट पसंद किया जा रहा है, जिससे समोसम, चूना, सूखा डिस्टेंपर आदि न के बराबर हो गए और पेंट का कारोबार बढ़ निकला है। पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष गोल्डन पेंट की डिमांड ज्यादा है। गोल्डन पेंट के साथ बैंगनी कलर भी पसंद किया जा रहा है। यह दोनों रंग के पेंट वाटर और थिनर वेस दोनों ही बाजार में मुहैया है। इसके साथ ही प्लास्टिक पेंट भी पसंद किया जा रहा है। प्लास्टिक पेंट में समोसम की जरूरत नहीं पड़ती और पुट्टी के बाद प्राइमर करके प्लास्टिक पेंट कर दिया जाता है। प्लास्टिक पेंट धूप और बरसात दोनों में ही सुरक्षित रहता है।
विज्ञापन
एक जमाने में चूना और सूखा डिस्टेंपर ही रंगरोगन के मुख्य साधन हुआ करते थे। इसके साथ ही गेरुआ भी रंग रोगन के लिए प्रयोग किया जाता था, पर अब यह सब कुछ गुजरे जमाने की बात हो चली है। अब सूखे डिस्टेंपर की जगह लिक्वड डिस्टेंपर का बाजार में दखल हो गया है। पेंट बाजार में बढ़े कारोबार एवं बदलाव के बारे में पेंट व्यवसायी पवन जैन, अजय टंडन, अमितेश अग्निहोत्री आदि कहते है कि पिछले दस वर्षों से जिस तरह से लोगों का घर बनाने का तरीका चेंज हुआ है, उसी तरह से अब बहुत तेजी के साथ घरों के रंगरोगन में बदलाव के साथ ब्राडेंड एवं नए पेटों का प्रयोग बढ़ा है।
लोग बार बार पुताई कराने की बजाय चार पांच साल में एक बार टिकाऊ एवं आकर्षक रंगरोगन की ओर रुख कर रहे हैं। उधर, पिछले साल की अपेक्षा दीवाली का मौसम अपने रंगत में आने के बाद भी पेंट बाजार अभी तक पूरी तरह से गुलजार नहीं हो सका है। कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि अबकी मौसम के मिजाज चौंकाने वाले है। नवरात्र पर बारिश हो रही। बारिश होने की आशंका में बाजार अभी ज्यादा गर्म नहीं है। पिछले वर्ष की अपेक्षा अबकी अभी तक बिक्री डाउन है।
विज्ञापन
ब्रांडेड कंपनियों के पेंट बाजार में छाए हुए हैं, पर लोकल पेंट की भी डिमांड कम नहीं है। बाजार से जुडे़ सूत्रों के पेंट का बाजार सबसे ज्यादा उछाल दीवाली के त्योहार पर मारता है। हालांकि, ईद और होली के त्योहार में भी पेंट की बिक्री होती है, पर सबसे ज्यादा बिक्री दीवाली के मौसम में होती है। इस समय दीवाली का मौसम चल रहा है लिहाजा पेंट बाजार पहले के मुकाबले ज्यादा गुलजार हो रहा है। इधर, पेंट व्यवसायी विजय गुप्ता ने बताया कि संडीला में गुलाबी और क्रील कलर के रंगों की डिमांड बढ़ी है। पिछले 20 वर्षों में पेंट का बाजार 50 लाख से 5 करोड़ पर पहुंच गया है।
विज्ञापन
अब बाजार में टिकाऊ और आकर्षक पेंट पसंद किया जा रहा है, जिससे समोसम, चूना, सूखा डिस्टेंपर आदि न के बराबर हो गए और पेंट का कारोबार बढ़ निकला है। पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष गोल्डन पेंट की डिमांड ज्यादा है। गोल्डन पेंट के साथ बैंगनी कलर भी पसंद किया जा रहा है। यह दोनों रंग के पेंट वाटर और थिनर वेस दोनों ही बाजार में मुहैया है। इसके साथ ही प्लास्टिक पेंट भी पसंद किया जा रहा है। प्लास्टिक पेंट में समोसम की जरूरत नहीं पड़ती और पुट्टी के बाद प्राइमर करके प्लास्टिक पेंट कर दिया जाता है। प्लास्टिक पेंट धूप और बरसात दोनों में ही सुरक्षित रहता है।
विज्ञापन
एक जमाने में चूना और सूखा डिस्टेंपर ही रंगरोगन के मुख्य साधन हुआ करते थे। इसके साथ ही गेरुआ भी रंग रोगन के लिए प्रयोग किया जाता था, पर अब यह सब कुछ गुजरे जमाने की बात हो चली है। अब सूखे डिस्टेंपर की जगह लिक्वड डिस्टेंपर का बाजार में दखल हो गया है। पेंट बाजार में बढ़े कारोबार एवं बदलाव के बारे में पेंट व्यवसायी पवन जैन, अजय टंडन, अमितेश अग्निहोत्री आदि कहते है कि पिछले दस वर्षों से जिस तरह से लोगों का घर बनाने का तरीका चेंज हुआ है, उसी तरह से अब बहुत तेजी के साथ घरों के रंगरोगन में बदलाव के साथ ब्राडेंड एवं नए पेटों का प्रयोग बढ़ा है।
लोग बार बार पुताई कराने की बजाय चार पांच साल में एक बार टिकाऊ एवं आकर्षक रंगरोगन की ओर रुख कर रहे हैं। उधर, पिछले साल की अपेक्षा दीवाली का मौसम अपने रंगत में आने के बाद भी पेंट बाजार अभी तक पूरी तरह से गुलजार नहीं हो सका है। कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि अबकी मौसम के मिजाज चौंकाने वाले है। नवरात्र पर बारिश हो रही। बारिश होने की आशंका में बाजार अभी ज्यादा गर्म नहीं है। पिछले वर्ष की अपेक्षा अबकी अभी तक बिक्री डाउन है।