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हरियाली के सीने पर ‘लापरवाही का आरा’
Hardoi
Updated Wed, 25 Sep 2013 05:38 AM IST
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‘वन में वृक्षों का वास रहने दो, झील झरनों में सांस रहने दो। वृक्ष होते हैं, वस्त्र जंगल के, छीन मत ये लिबाज रहने दो। वृक्ष पर घोंसला है चिड़िया का, तोड़ मत ये निवास रहने दो...। हरियाली के सीने पर लापरवाहों का आरा चलने के बाद कवि के मुख से निकली यह पंक्तियां हरे पेड़ों की व्यथा को कहती है। कुछ ऐसी ही व्यथा जिलों के उन हजारों हरे पेड़ों की भी है, जो आए दिन लकड़कट्टों के आरों से गिराए जा रहे हैं। जिले में अवैध कटान तेजी से किया जा रहा, जिस पर न तो वन विभाग और न ही पुलिस प्रशासन ही अंकुश लगा पा रहा है। जंगल अब ठूंठ में तब्दील होते जा रहे हैं। आर्थिक लाभ के कारण जिले में पेड़ों का कटना बदस्तूर जारी है। पेड़ों के लगातार कटान से जहां एक ओर पक्षी गान तक शांत हो गया है, वहीं गौरैया के विलुप्त होने के बाद अब आम जीवों की भी बारी आ चुकी है, पर जिम्मेदार खामोश है। जानकारों की माने तो पेड़ों के अंधाधुंध कटान से वातावरण में प्रदूषण घुलता जा रहा है। यदि अब भी न चेते तो वह दिन दूर नहीं सांस लेने के लिए भी लोग आक्सीजन को तरसेंगे।’
हरदोई/हरियावां/सवायजपुर। बताने की बात नहीं जिले के कछौना, बघौली, सुरसा, बिलग्राम आदि क्षेत्र पेड़ कटान के मामले में कहीं आगे पहुंच गए है। बेनीगंज क्षेत्र भी इसमें पीछे नहीं है। कहीं चौड़ीकरण के वक्त तो कहीं खाकी या वन रेंज अफसरों की मिली भगत से पेड़ों का कटान होता ही रहता है। लोनार क्षेत्र के जंगल के जंगल ही साफ हो गए, पर कार्रवाई के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ। अब वहां जंगल के स्थान पर लकड़ी के ठूंठ ही बचे हैं और उस जमीन पर खेती किसानी होने लगी है।
पेड़ों का कटान होने से सुनाई देने वाली चिड़ियों की चहचहाहट भी गायब होने लगी है। एक सरकारी सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक 50 साल से ज्यादा पुराना शीशम का वृक्ष प्रतिवर्ष 1552 किलो व पीपल का पेड़ 2252 किलो कार्बन डाई आक्साइड का अवशोषण कर 1185 किलो व 1713 किलो आक्सीजन देकर वायुमंडल को शुद्ध करता है। हर वृक्ष 10-15 एयर कंडीशनर के बराबर प्राकृतिक शीतलता प्रदान करता है, इसलिए पता चलता है कि एक पेड़ कितनी राहत प्रदान कर रहा है। यदि पेड़ों की संख्या कम होती चली गई तो वह दिन दूर नहीं जब न वातावरण में कार्बन डाई आक्साइड रह जाएगी और न उसका शोधन करने को वृक्ष नहीं रह जाएंगे, इसलिए गंभीर परिणामों से बचने को लोगों को चाहिए कि पेड़ों को न कम होने दें।
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जिले में सरकारी एवं निजी क्षेत्र की बागवानी मिलाने के बाद भी हरियाली का क्षेत्रफल 6 लाख हेक्टेयर का तीन प्रतिशत से भी कम है। पिछले कई दशकाें से हर साल वन विभाग द्वारा करोड़ों रुपये पौधरोपण पर खर्च किए जाते हैं, पर जिले में वन विभाग का हरियाली क्षेत्र महज 11962 हेक्टेयर है। वैसे तो जिले में 142 आरा मशीनें पंजीकृत है, पर इससे कहीं ज्यादा संख्या में अवैध आरा मशीनें चल रही हैं। यही हाल कोयला भट्ठियों का है। 94 कोयला भट्ठियों पंजीकृत है, पर गांव-गांव में भट्ठियां सुलग रही है। संडीला, शाहाबाद, पिहानी, कछौना, बेहंदर, भरावन, मल्लावां, बिलग्राम, अहिरोरी, सवायजपुर क्षेत्र आदि लकड़ी माफियाओं के अवैध कटान के काले कारोबार के ठिकाने बने हुए है।
उधर, हरियावां ग्राम समाज की जमीन पर खड़े पेड़ों का परमिट लेकर कटवा लिया। वहीं थाना क्षेत्र में वनकर्मी भी अवैध कटान कराने में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते नजर आ रहे हैं। मरई ग्राम में कुछ पेड़ों का परमिट बनवाकर दो दर्जन आम, नीम व अन्य पेड़ों को रातों रात काट लिया गया। वहीं लौहकनपुर वन विभाग दफ्तर के पीछे व सामने नीम के पेड़ों का कटान हो गया और इस पर कार्रवाई नहीं की गई। उधर, एसओ हरियावां उत्तम सिंह ने बताया कि मरई में कुछ पेड़ों का परमिट पर कटान हुआ है, पर ग्राम समाज के पेड़ों के कटान की जानकारी हुई, यदि मामला सही मिला, तो लकड़ी के ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
इस बाबत लेखपाल ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत पर मौके पर गए थे। नाप के बाद पता चलेगा कि पेड़ ग्राम समाज के हैं या नहीं। उधर, प्रधानपति डोरी लाल ने बताया कि जांच के बाद मामला साफ होगा। उधर, सवायजपुर क्षेत्र में स्थित कई थाना क्षेत्रों में वन विभाग व पुलिस की मिली भगत से प्रतिबंधित प्रजातियों आम, नीम, शीशम पर बेखौफ हो कुल्हाड़ा चलाया जा रहा है। हरपालपुर क्षेत्र के रामगंगा नदी के किनारे गांवों में कटान होता है। लोनार क्षेत्र के गर्रा नदी के किनारे घने जंगल लकड़कट्टों द्वारा उजाड़े जा चुके हैं, जिससे काफी संख्या में पाए जाने वाले हिरन या तो शिकारियों के हत्थे चढ़ जाते हैं या गांव में अपनी जान बचाने को भागते हैं।
इंसेट---
...क्यों नहीं रुक पा रहा है पेड़ों का कटान
बघौली। बघौली क्षेत्र के जरेरा, ऐनुआ, खजुरमई, बरूआदाह, गदनपुर, काईमऊ गांव तो पेड़ों की कटान के लिए प्रचलित रहे हैं। इसके अलावा सुरसा व बेनीगंज सहित बेहटा गोकुल, शाहाबाद आदि क्षेत्रों में पेड़ों का कटान लगातार जारी है। शिकायतों के बाद भी पुलिस व वन विभाग के अधिकारी कुछ खास नहीं कर पा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि पेड़ों के कटान में पुलिस व वन विभाग के अफसरों की मिली भगत रहती है, जिसके बाद ही कटान पर रोक नहीं लग पा रही है।
इंसेट---
दो पेड़ लगाने की अनिवार्यता पर चली आरी
हरदोई। एक प्रावधान किया गया था कि जब कोई व्यक्ति किसी पेड़ को काटने को परमिट को आवेदन करेगा तो परमिट जारी करते समय उस व्यक्ति से दो पेड़ लगाने की शर्त को पूरा कराने को दो पेड़ों को लगाने को दो सौ रुपये की एनएससी भी वन विभाग जमा कराएगा तथा इन एनएससी को उस व्यक्ति को तब लौटाया जाएगा जब उसके द्वारा लगाए गए पौधे पूरी तरह से पेड़ बन जाएंगे, पर इस प्रावधान पर भी आरी चल गई है।
इंसेट---
पेड़ बनने से पहले मर जाते हैं हजारों पौधेे
हरदोई। पौधे लगाने के बाद उनके रख रखाव में उदासीनता से हर साल हजारों पौधे वृक्ष बनने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। पिछले तीन वर्षों में यहां लगाए गए करीब 22 लाख पौधों में दस फीसदी सूख गए हैं, जबकि वन विभाग के आंकड़ों में तीन से पांच फीसदी ही पौधे सूखे होने का दावा किया जाता है। जिले में करीब तीन वर्षों में 22 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया गया, जिसमें मौसम के मिजाज ने तो पौधों की जान ली ही, साथ ही ठीक देखभाल न होने से दस फीसदी से ज्यादा पौधे वृक्ष बनने से पहले ही दम तोड़ जाते हैं।
इंसेट---
‘परमिट के नाम पर अगर किसानों को कोई परेशान करता हैं, तो शिकायत करें कार्रवाई होगी। लक्ष्यों के मुताबिक न सिर्फ जिले में पौधरोपण का कार्य किया जा रहा, बल्कि देखरेख को ट्री गार्ड आदि भी लगवाए जा रहे हैं। कटान को लेकर भी सख्त निर्देश जारी हैं। कोई भी शिकायत कार्यालय पहुंचाई जा सकती है।’ आरके त्रिपाठी, डीएफओ
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हरदोई/हरियावां/सवायजपुर। बताने की बात नहीं जिले के कछौना, बघौली, सुरसा, बिलग्राम आदि क्षेत्र पेड़ कटान के मामले में कहीं आगे पहुंच गए है। बेनीगंज क्षेत्र भी इसमें पीछे नहीं है। कहीं चौड़ीकरण के वक्त तो कहीं खाकी या वन रेंज अफसरों की मिली भगत से पेड़ों का कटान होता ही रहता है। लोनार क्षेत्र के जंगल के जंगल ही साफ हो गए, पर कार्रवाई के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ। अब वहां जंगल के स्थान पर लकड़ी के ठूंठ ही बचे हैं और उस जमीन पर खेती किसानी होने लगी है।
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जिले में सरकारी एवं निजी क्षेत्र की बागवानी मिलाने के बाद भी हरियाली का क्षेत्रफल 6 लाख हेक्टेयर का तीन प्रतिशत से भी कम है। पिछले कई दशकाें से हर साल वन विभाग द्वारा करोड़ों रुपये पौधरोपण पर खर्च किए जाते हैं, पर जिले में वन विभाग का हरियाली क्षेत्र महज 11962 हेक्टेयर है। वैसे तो जिले में 142 आरा मशीनें पंजीकृत है, पर इससे कहीं ज्यादा संख्या में अवैध आरा मशीनें चल रही हैं। यही हाल कोयला भट्ठियों का है। 94 कोयला भट्ठियों पंजीकृत है, पर गांव-गांव में भट्ठियां सुलग रही है। संडीला, शाहाबाद, पिहानी, कछौना, बेहंदर, भरावन, मल्लावां, बिलग्राम, अहिरोरी, सवायजपुर क्षेत्र आदि लकड़ी माफियाओं के अवैध कटान के काले कारोबार के ठिकाने बने हुए है।
उधर, हरियावां ग्राम समाज की जमीन पर खड़े पेड़ों का परमिट लेकर कटवा लिया। वहीं थाना क्षेत्र में वनकर्मी भी अवैध कटान कराने में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते नजर आ रहे हैं। मरई ग्राम में कुछ पेड़ों का परमिट बनवाकर दो दर्जन आम, नीम व अन्य पेड़ों को रातों रात काट लिया गया। वहीं लौहकनपुर वन विभाग दफ्तर के पीछे व सामने नीम के पेड़ों का कटान हो गया और इस पर कार्रवाई नहीं की गई। उधर, एसओ हरियावां उत्तम सिंह ने बताया कि मरई में कुछ पेड़ों का परमिट पर कटान हुआ है, पर ग्राम समाज के पेड़ों के कटान की जानकारी हुई, यदि मामला सही मिला, तो लकड़ी के ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
इस बाबत लेखपाल ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत पर मौके पर गए थे। नाप के बाद पता चलेगा कि पेड़ ग्राम समाज के हैं या नहीं। उधर, प्रधानपति डोरी लाल ने बताया कि जांच के बाद मामला साफ होगा। उधर, सवायजपुर क्षेत्र में स्थित कई थाना क्षेत्रों में वन विभाग व पुलिस की मिली भगत से प्रतिबंधित प्रजातियों आम, नीम, शीशम पर बेखौफ हो कुल्हाड़ा चलाया जा रहा है। हरपालपुर क्षेत्र के रामगंगा नदी के किनारे गांवों में कटान होता है। लोनार क्षेत्र के गर्रा नदी के किनारे घने जंगल लकड़कट्टों द्वारा उजाड़े जा चुके हैं, जिससे काफी संख्या में पाए जाने वाले हिरन या तो शिकारियों के हत्थे चढ़ जाते हैं या गांव में अपनी जान बचाने को भागते हैं।
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...क्यों नहीं रुक पा रहा है पेड़ों का कटान
बघौली। बघौली क्षेत्र के जरेरा, ऐनुआ, खजुरमई, बरूआदाह, गदनपुर, काईमऊ गांव तो पेड़ों की कटान के लिए प्रचलित रहे हैं। इसके अलावा सुरसा व बेनीगंज सहित बेहटा गोकुल, शाहाबाद आदि क्षेत्रों में पेड़ों का कटान लगातार जारी है। शिकायतों के बाद भी पुलिस व वन विभाग के अधिकारी कुछ खास नहीं कर पा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि पेड़ों के कटान में पुलिस व वन विभाग के अफसरों की मिली भगत रहती है, जिसके बाद ही कटान पर रोक नहीं लग पा रही है।
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दो पेड़ लगाने की अनिवार्यता पर चली आरी
हरदोई। एक प्रावधान किया गया था कि जब कोई व्यक्ति किसी पेड़ को काटने को परमिट को आवेदन करेगा तो परमिट जारी करते समय उस व्यक्ति से दो पेड़ लगाने की शर्त को पूरा कराने को दो पेड़ों को लगाने को दो सौ रुपये की एनएससी भी वन विभाग जमा कराएगा तथा इन एनएससी को उस व्यक्ति को तब लौटाया जाएगा जब उसके द्वारा लगाए गए पौधे पूरी तरह से पेड़ बन जाएंगे, पर इस प्रावधान पर भी आरी चल गई है।
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पेड़ बनने से पहले मर जाते हैं हजारों पौधेे
हरदोई। पौधे लगाने के बाद उनके रख रखाव में उदासीनता से हर साल हजारों पौधे वृक्ष बनने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। पिछले तीन वर्षों में यहां लगाए गए करीब 22 लाख पौधों में दस फीसदी सूख गए हैं, जबकि वन विभाग के आंकड़ों में तीन से पांच फीसदी ही पौधे सूखे होने का दावा किया जाता है। जिले में करीब तीन वर्षों में 22 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया गया, जिसमें मौसम के मिजाज ने तो पौधों की जान ली ही, साथ ही ठीक देखभाल न होने से दस फीसदी से ज्यादा पौधे वृक्ष बनने से पहले ही दम तोड़ जाते हैं।
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‘परमिट के नाम पर अगर किसानों को कोई परेशान करता हैं, तो शिकायत करें कार्रवाई होगी। लक्ष्यों के मुताबिक न सिर्फ जिले में पौधरोपण का कार्य किया जा रहा, बल्कि देखरेख को ट्री गार्ड आदि भी लगवाए जा रहे हैं। कटान को लेकर भी सख्त निर्देश जारी हैं। कोई भी शिकायत कार्यालय पहुंचाई जा सकती है।’ आरके त्रिपाठी, डीएफओ