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लखनऊ मेल में सीट बेच रहे दो छात्र दबोचे
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
Updated Wed, 24 Aug 2016 08:49 PM IST
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गाजियाबाद-हापुड़ के बीच चलती ट्रेन में दबोचे गए आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
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लखनऊ मेल के जनरल कोच में 200-200 रुपये लेकर सीट बेच रहे दो छात्रों को आरपीएफ के स्क्वायड टीम ने दबोचा है। पकड़े गए आरोपी छात्र बुलंदशहर जिला के रहने वाले हैं। आरपीएफ ने बुधवार को आरोपियों का चालान कर दिया।
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आरपीएफ को काफी दिनों से नई दिल्ली से लखनऊ के बीच चलने वाली लखनऊ मेल में सीटों पर कब्जा कर बिक्री करने की शिकायत मिल रही थी। मंगलवार रात ट्रेन में बरेली आरपीएफ की स्क्वॉयड टीम ड्यूटी पर थी, जिसकी कमान एएसआई सुरेंद्र के हाथ में थी।
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जब ट्रेन गाजियाबाद से चली तो जनरल कोच में दो छात्र कब्जाए सीट को 200-200 रुपये में बेचने लगे। सूचना पर एएसआई सुरेंद्र ने दोनों छात्रों को रंगेहाथ दबोच लिया। उन्होंने हापुड़ आरपीएफ को इसकी सूचना दी। रात करीब 12 बजे जब ट्रेन हापुड़ पहुंची तो आरपीएफ ने दोनों आरोपी छात्रों को अपने कब्जे में ले लिया।
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आरपीएफ इंस्पेक्टर एसएम असलम ने बताया कि दोनों आरोपी छात्र गौरव शर्मा और सुधीर चौधरी गाजियाबाद के डिग्री कॉलेज से बीएससी प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहे हैं और बुलंदशहर जिला के रहने वाले है। दोनों छात्र शराब के नशे में भी धुत पाए गए हैं। दोनों को जेल भेज दिया गया है।
गाजियाबाद में रहकर पढ़ाई के दौरान मौज-मस्ती के लिए पैसे की जुगाड़ में दो छात्र अब हवालात की हवा खाएंगे। पकड़े गए दोनों छात्रों में से एक का ताऊ रेलवे में ही टीटीई के पद पर तैनात है तो दूसरे का पिता बीएसएफ में है। अब हवालात में बंद दोनों छात्र कभी ऐसी हरकत करने की बात कह रहे हैं।
जिला बुलंदशहर से निकलकर दो जिगरी दोस्तों गौरव शर्मा और सुधीर चौधरी ने गाजियाबाद के डिग्री कॉलेज में बीएससी प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया था। घर से जरूरत भर के पैसे मिलने के बाद दोनों के दिमाग में जल्द से जल्द रुपया कमाने का सपना घर कर गया।
जिसके बाद दोनों नई दिल्ली की ओर ट्रेन में सफर भी करने लगे। सोमवार को दोनों ने जरनल सीट में बैठकर यात्रियों को सीट बिक्री करने का लालच दिया। सीट मिलने के नाम पर 200-200 रुपये अधिकांश यात्रियों ने उन्हें दे भी दिए थे।
लेकिन संदेह होने पर यात्रियों ने स्क्वायड टी को सूचना दे दी। जिस पर दोनों आरपीएफ के हत्थे चढ़ गए। आरपीएफ इंस्पेक्टर एसएम असलम ने बताया कि पूछताछ में दोनों ने पहली बार इस काम को करने की बात बताई है।
साथ ही कहा है कि वह अब कभी भी ट्रेनों में इस प्रकार का काम नहीं करेंगे। परिजनों को भी छात्रों के करतूत के बारे में जानकारी दी जा चुकी है।