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फीस जमा न होने पर बच्चों को परीक्षा देने से रोका
अमर उजाला, हापुड़
Updated Wed, 02 Mar 2016 09:53 PM IST
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मोदीनगर रोड स्थित एक एकेडमी में पढ़ रहे दो भाइयों की फीस जमा होने पर स्कूल प्रबंधन ने उन्हें परीक्षा में नही बैठने दिया। सिर्फ फीस के कारण स्कूल प्रबंधन ने बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ दिया।
इससे दुखी पिता ने प्रधानाचार्य ने गुहार लगाई, लेकिन उन्होंने एक नहीं सूनी। इसक बाद पीड़ित पिता ने जिलाधिकारी से भी शिकायत की है।
शांतिनगर निवासी रतनलाल त्यागी ने बताया कि उसके दो बच्चे आर्यन और यश पिछले छह साल से मोदीनगर रोड पर एक एकेडमी में पढ़ रहे हैं। वर्तमान में आर्यन त्यागी कक्षा चार और यश त्यागी कक्षा द्वितीय का छात्र है।
उन्होंने बताया कि किसी कारण से वह अपने बच्चों की फरवरी माह की फीस एकेडमी में जमा नहीं कर सके थे। इस संबंध में कई बार एकेडमी से उन्हें फीस जमा कराने के संबंध में नोटिस भी मिला।
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तब उसने प्रधानाचार्य को समस्या से अवगत कराया और जल्द ही फीस जमा करने की बात कही थी। आरोप है कि फीस जमा न होने के कारण प्रधानाचार्य ने उसके दोनों बच्चों को परीक्षा में बैठने से रोक दिया।
इस संबंध में वह प्रधानाचार्य से मिले तो उन्हें हड़का दिया गया। रतनलाल त्यागी ने प्रधानाचार्य की तानाशाही पर डीएम से शिकायत की बात कही है।
स्कूल में बच्चों को पढ़ाना है तो फीस जमा करनी ही होगी। इस संबंध में मैं कुछ नहीं कर सकता हूं। - प्रिंसिपल
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इससे दुखी पिता ने प्रधानाचार्य ने गुहार लगाई, लेकिन उन्होंने एक नहीं सूनी। इसक बाद पीड़ित पिता ने जिलाधिकारी से भी शिकायत की है।
शांतिनगर निवासी रतनलाल त्यागी ने बताया कि उसके दो बच्चे आर्यन और यश पिछले छह साल से मोदीनगर रोड पर एक एकेडमी में पढ़ रहे हैं। वर्तमान में आर्यन त्यागी कक्षा चार और यश त्यागी कक्षा द्वितीय का छात्र है।
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उन्होंने बताया कि किसी कारण से वह अपने बच्चों की फरवरी माह की फीस एकेडमी में जमा नहीं कर सके थे। इस संबंध में कई बार एकेडमी से उन्हें फीस जमा कराने के संबंध में नोटिस भी मिला।
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तब उसने प्रधानाचार्य को समस्या से अवगत कराया और जल्द ही फीस जमा करने की बात कही थी। आरोप है कि फीस जमा न होने के कारण प्रधानाचार्य ने उसके दोनों बच्चों को परीक्षा में बैठने से रोक दिया।
इस संबंध में वह प्रधानाचार्य से मिले तो उन्हें हड़का दिया गया। रतनलाल त्यागी ने प्रधानाचार्य की तानाशाही पर डीएम से शिकायत की बात कही है।
स्कूल में बच्चों को पढ़ाना है तो फीस जमा करनी ही होगी। इस संबंध में मैं कुछ नहीं कर सकता हूं। - प्रिंसिपल