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रमजान माह में इस बार पांच जुमा, 13:26 घंटे का होगा सबसे लंबा रोजा
Mon, 16 Feb 2026 10:17 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Mon, 16 Feb 2026 10:17 PM IST
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हापुड़। खुदा की इबादत के तलबगार मोमिनों का इंतजार खत्म होने वाला है। चांद का दीदार होने के बाद 19 या 20 फरवरी से रमजान माह की शुरुआत हो जाएगी। मुस्लिम समुदाय के लोग तीस दिन तक रोजा रखकर खुदा की इबादत करेंगे। इस बार सबसे लंबा रोजा 13 घंटे 26 मिनट का होगा। रमजान को लेकर घरों और मस्जिदों के साथ बाजारों में भी तैयारियां हो रही हैं।
चांद का दीदार होने के बाद 19 या 20 फरवरी को पहला रोजा होगा। इस माह में 20, 27 फरवरी, छह, 13 और 20 मार्च को जुमा पड़ेंगे। इस हिसाब से इस बार आखिरी रोजा अलविदा होगा। रमजान माह में मुस्लिम समुदाय के लोग तीस दिन तक रोजा रखते हैं और खुदा की इबादत करते हैं। मुकद्दस रमजान में पाबंदियों के साथ पांच वक्त की नमाज अदा करते हैं और कुरान ए करीम की तिलावत भी होती है।
रमजान का पहले अशरे में इबादत से अल्लाह की खास रहमत और मेहरबानी मिलती है, दिन में सुकून और नूर पैदा होता है। दूसरा अशरा गुनाहों की माफी का बेहतरीन अवसर, अल्लाह की रहमत से गुनाह धुल जाते हैं। तीसरा अशरा जहन्नम से आजादी मिलती है, लैलतुल कद्र जैसी अजीम रात मिलती है। इसमें अल्लाह की रहमत बरसती है। इसके साथ ही रमजान माह के चांद का दीदार होने पर शाम के समय मस्जिदों में तरावीह की नमाज शुरू हो जाएगी।
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मुफ्ती खालिद कासमी ने बताया कि मुकद्दस रमजान माह को लेकर घरों से लेकर मस्जिदों तक तैयारी चल रही है। मस्जिदों में साफ सफाई और सजाने का कार्य किया जा रहा है। रमजान माह में रोजा रखकर खुदा की इबादत करें और फिजूल बातों से बचते हुए कुरान ए पाक की तिलावत में वक्त बिताए।
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चांद का दीदार होने के बाद 19 या 20 फरवरी को पहला रोजा होगा। इस माह में 20, 27 फरवरी, छह, 13 और 20 मार्च को जुमा पड़ेंगे। इस हिसाब से इस बार आखिरी रोजा अलविदा होगा। रमजान माह में मुस्लिम समुदाय के लोग तीस दिन तक रोजा रखते हैं और खुदा की इबादत करते हैं। मुकद्दस रमजान में पाबंदियों के साथ पांच वक्त की नमाज अदा करते हैं और कुरान ए करीम की तिलावत भी होती है।
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रमजान का पहले अशरे में इबादत से अल्लाह की खास रहमत और मेहरबानी मिलती है, दिन में सुकून और नूर पैदा होता है। दूसरा अशरा गुनाहों की माफी का बेहतरीन अवसर, अल्लाह की रहमत से गुनाह धुल जाते हैं। तीसरा अशरा जहन्नम से आजादी मिलती है, लैलतुल कद्र जैसी अजीम रात मिलती है। इसमें अल्लाह की रहमत बरसती है। इसके साथ ही रमजान माह के चांद का दीदार होने पर शाम के समय मस्जिदों में तरावीह की नमाज शुरू हो जाएगी।
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मुफ्ती खालिद कासमी ने बताया कि मुकद्दस रमजान माह को लेकर घरों से लेकर मस्जिदों तक तैयारी चल रही है। मस्जिदों में साफ सफाई और सजाने का कार्य किया जा रहा है। रमजान माह में रोजा रखकर खुदा की इबादत करें और फिजूल बातों से बचते हुए कुरान ए पाक की तिलावत में वक्त बिताए।