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हापुड़ की जनता दूषित पानी पीने को मजबूर
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
Updated Wed, 10 May 2017 09:50 PM IST
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दूषित पानी
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा जनहित के तमाम कदम उठाए जाने के दावों के बावजूद हापुड़ शहर और आसपास के गांवों की जनता दूषित पानी पीने को मजबूर है। इससे लोग जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं, लेकिन पानी को पीने योग्य बनाने की दिशा में कोई ठोस योजना नजर नहीं आ रही है।
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गंगा-यमुना नदियों के बीच बसे हापुड़ जिले का पानी किसी समय काफी शुद्ध था। इसका मुख्य कारण यह भी था कि इन नदियों के अलावा पहले से ही सिंभावली और मसूरी के पास से होकर दो गंग नहर भी निकलती हैं।
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इनसे आसपास के क्षेत्रों में रजवाहों का जाल फैला होने के कारण भूजल की शुद्धता कायम रहती थी, लेकिन घर-घर में समर्सिबल लगने और ग्रामीण क्षेत्र में भी बड़ी तादात में नलकूप लगने से भूजल स्तर काफी नीचे चला गया।
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उधर हापुड़ के पास दिल्ली की ओर एचपीडीए के पास एक छोइया और रामलीला मैदान के पास एक नाला गुजरता है। जबकि हापुड़ से गढ़ की तरफ चलते ही काली नदी बहती और इधर भी एक छोइया है। छोइया, नाले और काली नदी के पानी का रंग ही काला है।
इनमें मेरठ जिले की अनेक फैक्ट्रियों का प्रदूषित पानी आता है। इस प्रदूषित पानी को आने से रुकवाने या प्रदूषण मुक्त कराने के लिए जिला पंचायत सदस्य श्रीकृष्ण कांत हूण अनेक बार एनजीटी में इस मामले को उठा चुके हैं।
कई बार आवश्यक निर्देश भी जारी हो चुके हैं, लेकिन हालात जस के तस हैं। इन नालों और नदी में बहने वाले प्रदूषित पानी का असर भूगर्भ जल पर भी पड़ रहा है। इसका परिणाम यह है कि नलों का पानी पीने योग्य ही नहीं रह गया है,
क्योंकि अधिकांश स्थानों पर पानी की टीडीएस 700 से ऊपर ही है। उल्लेखनीय है कि ग्रामीण क्षेत्र में प्रदूषित पानी पीने के कारण आसपास के अनेक गांवों में बड़ी संख्या में लोगों की कैंसर से मृत्यु होने के मामले प्रकाश में आ चुके हैं।
शहर के प्रमुख फिजीशियन डॉ. गौरव मित्तल का कहना है कि इतने अधिक टीडीएस वाला पानी पीने से मनुष्य की किडनी, लीवर सहित शरीर के अनेक अंगों पर बुरा असर पड़ता है। इससे हेपेटाइटस और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी होने का खतरा बना रहता है।
इस संबंध में जल निगम की एक योजना चल रही है, जिसके तहत काली नदी के किनारे बसे गांवों में ओवर हैड टैंक बनाकर नलकूपों का पानी पेयजल के रूप में सप्लाई किया जाएगा। योजना की प्रगति की जानकारी की जाएगी और मेरठ से आने वाले प्रदूषित पानी को प्रदूषण मुक्त कराने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।
- रजनीश राय, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व)