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अब दूरबीन से होगी मच्छरों के लार्वा की तलाश
अमर उजाला ब्यूरो /हापुड़
Updated Sun, 21 May 2017 11:52 PM IST
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मच्छरों के लार्वा
- फोटो : अमर उजाला
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अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें मलेरिया और डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के लार्वा की तलाश मैग्नीफाइंग ग्लास से बनी दूरबीन से करेगी। ताकि एक भी लार्वा बचने की गुंजाइश न रह जाए। दरअसल, विभाग का मानना है कि सामान्य आंखों से कई बार लार्वा नजर नहीं आते हैं। हैंड लेंस से इन्हें स्पष्ट देखा जा सकता है और आसानी से नष्ट किया जा सकता है। जल्द ही विभाग को उक्त लेंस मिलने के आसार हैं।
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जानकारी के अनुसार मच्छर का जीवन चक्र 21 दिन का होता है। 24 घंटे में अंडा विकसित होकर लार्वा बनता है। चार से पांच दिन बाद लार्वा प्यूपा में बदल जाता है। दो दिन में प्यूपा वयस्क मच्छर बन जाता है। मच्छर की सामान्य उम्र सात से 10 दिन होती है। एक ही बार में मादा एनाफिलीज मच्छर 150, क्यूलेक्स 400 एवं एडीज 150 अंडे देती है।
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स्वास्थ्य विभाग हर साल टीम गठित कर लार्वा ढूंढकर उन्हें नष्ट करने का काम करती है, लेकिन इसके बाद भी लार्वा छूट जाते हैं। यही कारण है कि जिले में मच्छरों का प्रकोप दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। आए साल डेंगू, चिकनगुनिया के मरीजों में इजाफा हो रहा है।
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लार्वा को जड़ से खत्म करने के लिए अब स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने मैग्नीफाइंग ग्लास के इस्तेमाल का निर्णय लिया है। इस लेंस में छोटे से छोटा लार्वा भी आसानी से दिख सकेगा, जिसे नष्ट किया जा सकेगा।
डिप्टी सीएमओ डा. राकेश अनुरागी का कहना है कि बेहतर क्वालिटी के मैग्नीफाइंग ग्लास खरीदने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस लेंस के माध्यम से लार्वा को आसानी से नष्ट किया जा सकेगा।