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त्योहारी सीजन में क्षेत्र में मिलावटखोर सक्रिय
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
Updated Fri, 28 Oct 2016 09:12 PM IST
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खाद्य सामग्री में मिलावटखोरी जी का जंजाल बन रहा है। इससे सेहत पर खतरा मंडरा रहा है। त्योहार आते ही मिलावटखोरों के सक्रिय होने के कारण क्षेत्रवासियों की सेहत पर संकट मंडराने लगा है।
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तहसील क्षेत्र के गांवों में मिलावट इस कदर हावी है कि महंगी मिठाई भी औने पौने दामों में उपलब्ध हैं। सपनावत, बझैड़ा कला, सालेपुर कोटला, पारपा, समाना, डहाना, लालपुर सौलाना, धौलाना, देहरा,
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बड़ौदा सिहानी के अलावा क्षेत्र में मिलावटी मावे और पनीर का धंधा बढ़ रहा है। यहां से जिले के साथ साथ आसपास के शहर में भी माल भेजा जा रहा है। आलम यह है कि मिल्क पाउडर से बन रहे सिंथेटिक मावे का धंधा क्षेत्र में धड़ल्ले से हो रहा है।
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इन दिनों बाजार में नकली दूध, पनीर, खोया और देशी घी धड़ल्ले से बिक रहा है। मिठाईयों में सिंथेटिक रंगों का इस्तेमाल हो रहा है। ये रंग कैंसर, अल्सर आदि रोग पैदा करते हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ नवीन रूहेल ने बताया कि मिलावटी सामग्री का सेवन करने से सेहत पर खराब असर पड़ता है। बच्चे और डायबिटीज के रोगियों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। इससे पेट संबंधी अनेक रोग हो जाते हैं।
उधर, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी विनय अग्रवाल ने बताया कि मिलावट करने वालों पर 10 लाख रुपये जुर्माना और उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। एक्ट में अब मिलावट खोरी करने वालों पर शिकंजा कसा गया है।