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पतंग के मांझे से जा रही परिंदों की जान
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
Updated Tue, 14 Feb 2017 10:11 PM IST
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मांझे से जा रही परिंदों की जान
- फोटो : अमर उजाला
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युवाओं का पतंगबाजी का शौक निरीह परिंदों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। पेड़ों पर अटके पतंग के मांझे में फंसकर परिंदों की जान जा रही है। परिंदों को तड़प तड़पकर दम तोड़ते देखकर लोग पतंगबाजी न करने की अपील कर रहे हैं।
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हापुड़ के युवाओं में पतंगबाजी का शौक पुराना है। कुछ दिन पहले गई बसंत पंचमी पर शहर में जमकर पतंगबाजी हुई। अब परीक्षाएं नजदीक आने के चलते पतंगबाजी का सिलसिला कुछ कम जरूर हुआ है। अभी कुछ युवा पतंगबाजी कर रहे हैं।
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इसके लिए खतरनाक मांझे का भी प्रयोग किया जाता है। चाईनीज मांझे की बिक्री नहीं हो रही है, फिर भी कुछ परिंदे उड़ते समय ही आसमान में पतंग के माझे से टकराकर घायल हो जाते हैं। इसके अलावा सबसे बड़ी समस्या पेड़ों पर उलझे मांझे बने हुए हैं।
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पतंगों का मांझा पेड़ों पर एक जाल की तरह उलझ जाता है। इन मांझों में आए दिन पक्षी फंसते हैं और तड़पकर फड़फड़ाते रहते हैं। ऐसे ही उनकी जान निकल जाती है। इस स्थिति को देखकर कुछ पर्यावरण प्रेमी परेशान हैं। वह युवाओं से पतंगबाजी न करने की अपील कर रहे हैं।
पर्यावरणविद् प्रो अब्बास अली कहते हैं कि पक्षी पर्यावरण के रक्षक हैं। पहले ही खेतों मे केमिकल छिड़काव और मोबाइल टावर से निकलने वाली रेज के कारण इनकी संख्या में कमी आयी है।
ऐसे में पेड़ों पर जगह जगह अटका पतंग का मांझा पक्षियों के लिए खतरा बना हुआ है। हमें पक्षियों और पर्यावरण की रक्षा के लिए पतंगबाजी को रोकना होगा।