{"_id":"648b3f3cde790103e706d336","slug":"herbal-paint-with-cow-donge-hapur-news-c-135-1-hpr1001-240-2023-06-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहल : गाय के गोबर से बनेगा हर्बल पेंट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहल : गाय के गोबर से बनेगा हर्बल पेंट
Thu, 15 Jun 2023 10:11 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Thu, 15 Jun 2023 10:11 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हापुड़। निराश्रित पशुओं का संरक्षण कर जिले में चलाई जा रही गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल शुरू हुई है। इन गोशालाओं से पांच रुपये किलो की दर से गोबर खरीदकर, यहां स्थापित मशीन से हर्बल पेंट तैयार होगा। मुनाफे का 10 फीसदी लाभांश भी गोशालाओं को दिया जाएगा। डीएसएस, लोक भारती और खादी ग्रामोद्योग के इस प्रोजेक्ट को पशुपालन विभाग से साझा किया गया है, सीडीओ कार्यालय से सहमति होनी है। जिले में स्थायी गोशालाओं के साथ ही अस्थाई गोशालाएं बनाई गई हैं। गोवंशों के संरक्षण और भरण पोषण के लिए शासन से करीब 30 रुपये प्रति पशु मिलते हैं। इतने पैसे में भूसा भी उपलब्ध करा पाना आसान नहीं है। इन गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल होती रही हैं, लेकिन अभी तक रिजल्ट खास नहीं मिल सका है। अब खादी ग्रामोद्योग और लोक भारती ने प्लान तैयार किया है, यह प्लान हर घर में प्रयोग होने वाले पेंट से जुड़ा है। डीएसएस कंपनी जो पेंट बनाती है, उसे इसमें शामिल किया गया है।
सीवीओ कार्यालय में डीएसएस और लोक भारती के पश्चिमी उत्तर प्रदेश हेड अजय राठी ने बैठक की। इसमें पूरे प्लान को साझा किया। उन्होंने बताया कि चिन्हित गोशालाओं में स्वयं सहायता समूहों को अनुदान पर पेंट बनाने की मशीन स्थापित कर दी जाएगी। गोशाला में जितना गोबर होगा, उसे पांच रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जाएगा। इससे गोवंशों के भरण पोषण में सहायता मिलेगी, साथ ही मुनाफा का दस फीसदी भी गोशालाओं का होगा।
400 ग्राम गोबर में बनेगा एक लीटर पेंट
गोशालाओं में एक लीटर पेंट सिर्फ 400 ग्राम गोबर में बन सकेगा। गोशाला में प्रतिदिन होने वाले गोबर का 40 फीसदी पेंट बनाने में प्रयोग हो सकेगा। इस पहल से गोवंशों में गंदगी के कारण लगने वाले रोग भी दूर होंगे।
विज्ञापन
-- -
बदायूं में चल रहा प्लांट
सबसे पहले यह पहल बदायूं में शुरू हुई है, यहां एक गोशाला में पेंट बनाने की मशीन स्थापित कराई गई है। जहां 8500 लीटर पेंट का उत्पादन हो रहा है। सरकारी कार्यालयों में भी इसी पेंट का प्रयोग हो रहा है, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग (आईआईपी) गोबर से बनने वाले पेंट को लेकर पूरा सहयोग दे रही है।
गाय के गोबर से बने पेंट की विशेषता-
* पेंट के बाद घर में छिपकली, मच्छर, मक्खी का प्रकोप बेहद कम हो जाएगा।
* कमरे का तापमान गर्मियों में भी सामान्य तापमान से करीब पांच डिग्री कम रहेगा।
* रेडियोएक्टिव किरणों से सुरक्षा करेगा।
* केमिकल से स्वास्थ्य पर होने वाले नुकसान को रोकेगा।
जिले में गोशालाओं की स्थिति-
कुल गोशाला-- -- 38
संरक्षित गोवंश-- -- 3040
सीडीओ के समक्ष रखेंगे सुझाव
गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गोबर पेंट बनाने के संबंध में एक प्रस्ताव मिला है। लोक भारती और डीएसएस से आए प्रतिनिधि ने पूरी योजना बताई है। इसका सुझाव सीडीओ के समक्ष रखेंगे। यह पहल गोशालाओं की दशा बदल सकती है। - डॉ.प्रमोद कुमार, सीवीओ।
विज्ञापन
सीवीओ कार्यालय में डीएसएस और लोक भारती के पश्चिमी उत्तर प्रदेश हेड अजय राठी ने बैठक की। इसमें पूरे प्लान को साझा किया। उन्होंने बताया कि चिन्हित गोशालाओं में स्वयं सहायता समूहों को अनुदान पर पेंट बनाने की मशीन स्थापित कर दी जाएगी। गोशाला में जितना गोबर होगा, उसे पांच रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जाएगा। इससे गोवंशों के भरण पोषण में सहायता मिलेगी, साथ ही मुनाफा का दस फीसदी भी गोशालाओं का होगा।
विज्ञापन
400 ग्राम गोबर में बनेगा एक लीटर पेंट
गोशालाओं में एक लीटर पेंट सिर्फ 400 ग्राम गोबर में बन सकेगा। गोशाला में प्रतिदिन होने वाले गोबर का 40 फीसदी पेंट बनाने में प्रयोग हो सकेगा। इस पहल से गोवंशों में गंदगी के कारण लगने वाले रोग भी दूर होंगे।
विज्ञापन
बदायूं में चल रहा प्लांट
सबसे पहले यह पहल बदायूं में शुरू हुई है, यहां एक गोशाला में पेंट बनाने की मशीन स्थापित कराई गई है। जहां 8500 लीटर पेंट का उत्पादन हो रहा है। सरकारी कार्यालयों में भी इसी पेंट का प्रयोग हो रहा है, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग (आईआईपी) गोबर से बनने वाले पेंट को लेकर पूरा सहयोग दे रही है।
गाय के गोबर से बने पेंट की विशेषता-
* पेंट के बाद घर में छिपकली, मच्छर, मक्खी का प्रकोप बेहद कम हो जाएगा।
* कमरे का तापमान गर्मियों में भी सामान्य तापमान से करीब पांच डिग्री कम रहेगा।
* रेडियोएक्टिव किरणों से सुरक्षा करेगा।
* केमिकल से स्वास्थ्य पर होने वाले नुकसान को रोकेगा।
जिले में गोशालाओं की स्थिति-
कुल गोशाला
संरक्षित गोवंश
सीडीओ के समक्ष रखेंगे सुझाव
गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गोबर पेंट बनाने के संबंध में एक प्रस्ताव मिला है। लोक भारती और डीएसएस से आए प्रतिनिधि ने पूरी योजना बताई है। इसका सुझाव सीडीओ के समक्ष रखेंगे। यह पहल गोशालाओं की दशा बदल सकती है। - डॉ.प्रमोद कुमार, सीवीओ।