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गंगा की सेहत सुधरी तो बढ़ी डॉल्फिन
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गंगा की सेहत सुधरी तो बढ़ी डॉल्फिन
गढ़मुक्तेश्वर। कोरोना संक्रमण के चलते औद्योगिक इकाइयां बंद रहीं वहीं तटों पर भीड़ कम होने से गंगा में प्रदूषण घट गया जिससे गंगा की सेहत में भी सुधार हुआ है। प्रदूषण कम होने से गंगा में जलीय जीवों जैसे डॉल्फिनों की संख्या भी बढ़ी है। वहीं अन्य जलीय जीवों को भी संजीवनी मिल गई। गत तीन सालों में रामसर साइट में डॉल्फिन की संख्या बढ़कर 41 हो गई है।
बी श्रेणी में है गंगा जल
गंगा में डीओ की मात्रा 9.10 मिलीग्राम प्रति लीटर, बीओडी की मात्रा 1.00मिलीग्राम प्रति लीटर, टोटल कालिफार्म 430 व फीकल कालिफार्म 150 एमपीएन प्रति 100 एमएल के आसपास है। इस प्रकार गंगा का जल वर्तमान में बी श्रेणी में है। पिछले कुछ सालों से गंगा में प्रदूषण कम हुआ है। जिसका असर रामसर साइट पर भी दिख रहा है।
28 से बढ़कर 41 हुई डॉल्फिनों की संख्या
पर्यावरणविद व डॉल्फिन गार्जियन भारतभूषण गर्ग ने बताया कि वर्ष 2018 में बिजनौर से लेकर नरौरा तक रामसर साइट में 28 डॉल्फिन मौजूद थीं। वर्ष 2019 मे बढ़कर 32 और 2020 में हुई गणना में 41 तक गिनती पहुंच गई। जिसमें छोटे बच्चे भी शामिल हैं।
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शुद्ध जल में निवास करती हैं डाल्फिन
भारतभूषण गर्ग ने बताया कि डॉल्फिन का एक नाम गांगेय है, जिसकी उत्पत्ति गंगा अवतरण के समय से ही मानी गई है। यह साफ और शुद्ध जल मे निवास और प्रजनन करती हैं। यह भी कहा जा सकता है कि जहां डॉल्फिन होती है, वहां का पानी बिनी किसी टेस्टिंग के पीने योग्य होता है।
घड़ियाल की भी संख्या बढ़ी
घडियाल को गंगा की सफाई का चौकीदार कहा जाता है। भारत भूषण ने बताया घड़ियाल की विधिवत गणना नहीं की जाती है, लेकिन गढ़ क्षेत्र में पिछले दिनों 10 से 15 घड़ियाल देखने को मिले हैं।
नौ से 12 फीट पानी में रहते हैं जलीय जीव
डॉल्फिन गार्जियन ने बताया कि घड़ियाल और डॉल्फिन के लिए नौ से 12 फीट पानी नदी में होना चाहिए। जल कम होने पर यह जीव गहरे जल की तरफ को प्रस्थान कर जाते हैं। इसके अलावा दूषित पानी के कारण भी जीव जंतु पानी से बाहर निकल आते हैं। वहीं घड़ियाल जैसे जीव कभी-कभी धूप सेंकने के लिए भी पानी से बाहर निकल आते हैं। (संवाद)
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गढ़मुक्तेश्वर। कोरोना संक्रमण के चलते औद्योगिक इकाइयां बंद रहीं वहीं तटों पर भीड़ कम होने से गंगा में प्रदूषण घट गया जिससे गंगा की सेहत में भी सुधार हुआ है। प्रदूषण कम होने से गंगा में जलीय जीवों जैसे डॉल्फिनों की संख्या भी बढ़ी है। वहीं अन्य जलीय जीवों को भी संजीवनी मिल गई। गत तीन सालों में रामसर साइट में डॉल्फिन की संख्या बढ़कर 41 हो गई है।
बी श्रेणी में है गंगा जल
गंगा में डीओ की मात्रा 9.10 मिलीग्राम प्रति लीटर, बीओडी की मात्रा 1.00मिलीग्राम प्रति लीटर, टोटल कालिफार्म 430 व फीकल कालिफार्म 150 एमपीएन प्रति 100 एमएल के आसपास है। इस प्रकार गंगा का जल वर्तमान में बी श्रेणी में है। पिछले कुछ सालों से गंगा में प्रदूषण कम हुआ है। जिसका असर रामसर साइट पर भी दिख रहा है।
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28 से बढ़कर 41 हुई डॉल्फिनों की संख्या
पर्यावरणविद व डॉल्फिन गार्जियन भारतभूषण गर्ग ने बताया कि वर्ष 2018 में बिजनौर से लेकर नरौरा तक रामसर साइट में 28 डॉल्फिन मौजूद थीं। वर्ष 2019 मे बढ़कर 32 और 2020 में हुई गणना में 41 तक गिनती पहुंच गई। जिसमें छोटे बच्चे भी शामिल हैं।
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शुद्ध जल में निवास करती हैं डाल्फिन
भारतभूषण गर्ग ने बताया कि डॉल्फिन का एक नाम गांगेय है, जिसकी उत्पत्ति गंगा अवतरण के समय से ही मानी गई है। यह साफ और शुद्ध जल मे निवास और प्रजनन करती हैं। यह भी कहा जा सकता है कि जहां डॉल्फिन होती है, वहां का पानी बिनी किसी टेस्टिंग के पीने योग्य होता है।
घड़ियाल की भी संख्या बढ़ी
घडियाल को गंगा की सफाई का चौकीदार कहा जाता है। भारत भूषण ने बताया घड़ियाल की विधिवत गणना नहीं की जाती है, लेकिन गढ़ क्षेत्र में पिछले दिनों 10 से 15 घड़ियाल देखने को मिले हैं।
नौ से 12 फीट पानी में रहते हैं जलीय जीव
डॉल्फिन गार्जियन ने बताया कि घड़ियाल और डॉल्फिन के लिए नौ से 12 फीट पानी नदी में होना चाहिए। जल कम होने पर यह जीव गहरे जल की तरफ को प्रस्थान कर जाते हैं। इसके अलावा दूषित पानी के कारण भी जीव जंतु पानी से बाहर निकल आते हैं। वहीं घड़ियाल जैसे जीव कभी-कभी धूप सेंकने के लिए भी पानी से बाहर निकल आते हैं। (संवाद)