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शर्मनाक : मरीजों को लगाए नहीं, ब्लैक कर दिए रेमडेसिविर

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 26 Apr 2021 11:46 PM IST
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पिलखुवा थाने के पुलिसकर्मियों द्वारा पकड़े गये रेमडे सिविर के इंजेक्शन बेचने वाले युवक। - फोटो : HAPUR
शर्मनाक : मरीजों को लगाए नहीं, ब्लैक कर दिए रेमडेसिविर
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हापुड़। कोरोना मरीजों के लिए संजीवनी बने रेमडेसिविर की जिले में भी जमकर कालाबाजारी हो रही है। सोमवार को रामा मेडिकल कॉलेज के तीन कर्मचारियों को पिलखुवा पुलिस ने इंजेक्शन की कालाबाजारी के आरोप में गिरफ्तार किया। अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए ये इंजेक्शन आए थे लेकिन उन्हें न लगाकर ये ब्लैक कर दिए गए। पकड़ों गए आरोपी नर्सिंग स्टाफ के रूप में यहां पिछले करीब एक साल से काम कर रहे थे। पुलिस ने इनके पास से एक इंजेक्शन और 82000 रुपये की नकदी बरामद की है।
एएसपी सर्वेश कुमार मिश्रा ने बताया कि एक व्यक्ति ने शिकायत की थी रामा मेडिकल कॉलेज और ट्रामा सेंटर के कुछ कर्मचारी रेमडेसिवर इंजेक्शन की कालाबाजारी कर रहे हैं। उसने इनसे 27-27 हजार रुपये में खरीदे थे, लेकिन अब ये लोग उससे 40 हजार रुपये की मांग कर रहे हैं। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों को दबोच लिया। पुलिस ने आरोपियों के पास से एक इंजेक्शन बरामद करने के साथ 82000 रुपये की नकदी बरामद की। यह नकदी इन लोगों ने इंजेक्शन को ब्लैक करके अर्जित की थी। पकड़े गए आरोपी शिवम उर्फ बादशाह पुत्र कुंवरपाल निवासी गांव ककराना थाना धौलाना, पुनीत उर्फ दुष्यंत पुत्र सुभाष सिंह निवासी छत्ता कस्बा धौलाना और गौरव पुत्र सोहनपाल निवासी चितसौना अल्लीपुर थाना बीबीनगर जनपद बुलंदशहर हैं। तीनों आरोपी पिछले करीब एक साल से नर्सिंग स्टाफ के रूप में यहां कार्य करते थे।
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40 हजार रुपये तक किए ब्लैक
एएसपी के मुताबिक पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ की गई तो पता चला कि करीब चार हजार की कीमत का इंजेक्शन 40,000 रुपये तक के दाम पर बेचा जा रहा था। अभी तक पांच इंजेक्शन ब्लैक किए थे। जिनमें से 24 अप्रैल को तीन इंजेक्शन 27-27 हजार रुपये में और दो इंजेक्शन 40-40 हजार रुपये में बेचे थे। मरीज को इंजेक्शन न लगाकर सा कम लगाकर से इंजेक्शन की चोरी कर रहे थे।
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अस्पताल के ही दूसरे जरूरतमंदों से होती थी सेटिंग
आरोपी अस्पताल में दूसरे गंभीर रोगियों के तीमारदारों से इंजेक्शन बेचने की सेटिंग करते थे। वहीं जिन मरीजों को इंजेक्शन की जरूरत होती, उन्हें अस्पताल से बाहर ब्लैक में खरीदने की बात कहकर उन्हें मनमाने दामों पर बेच देते।
लालच ने बना दिया आरोपी
पुलिस के अनुसार जिस व्यक्ति ने आरोपियों की शिकायत की वह इनसे रेडमेसिविर के दो इंजेक्शन 27-27 हजार रुपये में खरीद चुका था। लेकिन तीसरे इंजेक्शन के लिए उससे 40 हजार रुपये मांगे गए। बार-बार आग्रह करने के बाद भी आरोपियों ने रुपये कम नहीं किए। जिसके बाद पीड़ित ने मामले की शिकायत पुलिस से की।
गंभीर मरीजों को इंजेक्शन की नहीं दी पूरी डोज
आरोपियों ने गंभीर मरीजों के प्रति जरा भी दया नहीं बरती। आईसीयू में भर्ती मरीजों को मात्र दो से तीन डोज ही दी गई। बाकी के इंजेक्शनों को ब्लैक कर दिया गया ।जिन मरीजों के कोटे के इंजेक्शन चुराए गए वे सभी आईसीयू में भर्ती थे। जहां मेडिकल स्टाफ के अलावा किसी ओर को जाने की अनुमति नहीं होती। पुलिस के अनुसार आरोपियों द्वारा मरीजों को शुरूआती डोज दी जाती थी। जबकि इसके बाद उन्हें कोई भी दूसरा सामान्य इंजेक्शन लगा दिया जाता था और रेडमेसिविर की डोज को चोरी कर लिया जाता था। जबकि इंजेक्शन रिकार्ड में दर्ज रहते थे। हालांकि इस बात की जांच की जा रही है कि इन आरोपियों ने किस मरीज की डोज चुराई और इससे संबंधित मरीज को क्या नुकसान हुआ।

कोरोना संक्रमितों के लिए संजीवनी है इंजेक्शन
रेमडेसिविर को गंभीर मरीजों को उस समय लगाया जाता है, जिस समय उनकी कोरोना से सांसे उखड़ने लगती हैं। मरीज को छह इंजक्शनों की डोज लगाई जाती है। इनमें दो पहले दिन और इसके बाद चार दिन एक एक इंजेक्शन लगाया जाता है।
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