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यूपी में ब्रजघाट से नमामि गंगे योजना का शुभारंभ
अमर उजाला, गढ़
Updated Tue, 05 Jan 2016 01:18 AM IST
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केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने सोमवार को यूपी में नमामि गंगे योजना की शुरुआत हापुड़ के ब्रजघाट से की।
उन्होंने कहा कि इसके तहत गंगा किनारे के 200 गांवों को समग्र गंगा ग्राम के रूप विकसित किया जाना है। इनमें हापुड़ के पूठ गांव को मॉडल के रूप चुना गया है।
उमा ने गंगा की सफाई के अभियान में सभी वर्गों से जुड़ने की भी अपील की। केंद्रीय मंत्री उमा भारती सोमवार दोपहर करीब दो बजे ब्रजघाट पहुंची।
उन्होंने जनसभा में कहा कि गंगा पूर्व में रहीं सरकारों की अनदेखी और इंसानी करतूतों के चलते विश्व की 10 सबसे प्रदूषित नदियों में शामिल हो चुकी है, जो चिंता और चिंतन का विषय है।
कानपुर समेत कई स्थानों पर गंगा का जल पीने योग्य भी नहीं है। नमामि गंगे योजना के तहत गंगा को साफ किया जाना है। इसके लिए एसटीपी प्लांट लगेंगे, फैक्ट्रियों और नालों का पानी गंगा में जाने से रोका जाएगा और निगरानी के लिए सेना भी तैनात रहेगी।
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नमामि गंगे योजना के तहत गंगा किनारे के 200 गांवों को समग्र गंगा ग्राम के रूप विकसित किया जाना है। इनमें हापुड़ के पूठ गांव को मॉडल के रूप चुना गया है। पूठ के प्रत्येक घर में पक्का शौचालय, नाली, सड़क बनवाने के साथ ही आबादी का गंदा पानी गंगा में जाने से रोका जाएगा।
साथ ही गंगा किनारे के गांवों के लोगों को प्रदूषण रोकने के प्रति जागरूक किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने पूठ गांव के गुरुकुल महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि गढ़मुक्तेश्वर में भगवान शंकर के गणों जय-विजय को दुर्वासा ऋषि के श्राप से मुक्ति मिली थी।
इसलिए यूपी में नमामि गंगे अभियान के लिए इसे चुना गया। उन्होंने कहा कि पूठ का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। उस दौर का पुष्पावती आज पूठ के नाम से जाना जाता है। द्रौपदी सैर करने यहां आती थीं और पांडवों ने यहीं धनुर्विद्या की शिक्षा-दीक्षा ली थी।
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उन्होंने कहा कि इसके तहत गंगा किनारे के 200 गांवों को समग्र गंगा ग्राम के रूप विकसित किया जाना है। इनमें हापुड़ के पूठ गांव को मॉडल के रूप चुना गया है।
उमा ने गंगा की सफाई के अभियान में सभी वर्गों से जुड़ने की भी अपील की। केंद्रीय मंत्री उमा भारती सोमवार दोपहर करीब दो बजे ब्रजघाट पहुंची।
उन्होंने जनसभा में कहा कि गंगा पूर्व में रहीं सरकारों की अनदेखी और इंसानी करतूतों के चलते विश्व की 10 सबसे प्रदूषित नदियों में शामिल हो चुकी है, जो चिंता और चिंतन का विषय है।
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कानपुर समेत कई स्थानों पर गंगा का जल पीने योग्य भी नहीं है। नमामि गंगे योजना के तहत गंगा को साफ किया जाना है। इसके लिए एसटीपी प्लांट लगेंगे, फैक्ट्रियों और नालों का पानी गंगा में जाने से रोका जाएगा और निगरानी के लिए सेना भी तैनात रहेगी।
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नमामि गंगे योजना के तहत गंगा किनारे के 200 गांवों को समग्र गंगा ग्राम के रूप विकसित किया जाना है। इनमें हापुड़ के पूठ गांव को मॉडल के रूप चुना गया है। पूठ के प्रत्येक घर में पक्का शौचालय, नाली, सड़क बनवाने के साथ ही आबादी का गंदा पानी गंगा में जाने से रोका जाएगा।
साथ ही गंगा किनारे के गांवों के लोगों को प्रदूषण रोकने के प्रति जागरूक किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने पूठ गांव के गुरुकुल महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि गढ़मुक्तेश्वर में भगवान शंकर के गणों जय-विजय को दुर्वासा ऋषि के श्राप से मुक्ति मिली थी।
इसलिए यूपी में नमामि गंगे अभियान के लिए इसे चुना गया। उन्होंने कहा कि पूठ का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। उस दौर का पुष्पावती आज पूठ के नाम से जाना जाता है। द्रौपदी सैर करने यहां आती थीं और पांडवों ने यहीं धनुर्विद्या की शिक्षा-दीक्षा ली थी।