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किसानों-उद्यमियों ने एचपीडीए पर डाला डेरा
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
Updated Thu, 08 Sep 2016 08:03 PM IST
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प्राधिकरण की भूमि अधिग्रहण नीति का कर रहे हैं विरोध
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली रोड के सैकड़ों फैक्ट्री व भवन मालिकों तथा किसानों की जमीन को मनमाने तरीके से अधिग्रहण करने की तैयारी प्राधिकरण कर रहा था। इसको लेकर लोगों के तेवर उग्र होने से अब प्राधिकरण बैकफुट पर है।
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उद्यमियों और किसानों के साथ हुई बैठक में एचपीडीए के सचिव व तहसीलदार ने अधिग्रहण नीति गलत होना स्वीकार किया है। हालांकि बैठक बेनतीजा रही, लोगों ने प्रधिकरण पर डेरा डाल दिया। शुक्रवार को क्षेत्रीय विधायक के साथ पीड़ित लोग मुख्य सचिव से मिलेंगे।
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वहीं प्राधिकरण की तानाशाही पर एक पीड़ित आमरण अनशन पर बैठ गया है। एचपीडीए ने दिल्ली रोड पर स्थापित सैकड़ों भवनों, फैक्ट्रियों, छोटे कारखानों व किसानों की उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण कर आवासीय योजना में शामिल करने का निर्णय लिया है।
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प्राधिकरण की इस योजना से पांच हजार परिवारों का रोजगार खतरे में पड़ गया है। इसके विरोध में बृहस्पतिवार को सैकड़ों किसानों, उद्यमियों, भवन स्वामियों ने एचपीडीए पर डेरा डाल दिया। जोरदार नारेबाजी से प्राधिकरण गूंज उठा, इससे वहां तैनात अफसरों में अफरा तफरी मच गई।
लोगों को शांत करने के उद्देश्य से प्राधिकरण ने प्रदर्शनकारियों को वार्ता के लिए बुलाया। बैठक में भवन बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष ललित कुमार ने कहा कि प्राधिकरण ने 30 अगस्त को कमेटी का गठन कर उन्हें राहत दिलाने का आश्वासन दिया।
लेकिन आज तक कमेटी किसी निर्णय पर नहीं पहुंच सकी है। प्राधिकरण के अफसर नहीं चाहते हैं कि पांच हजार परिवारों को राहत मिल सके। इस दौरान प्राधिकरण के सचिव विश्वजीत राय व तहसीलदार अनिल कुमार ने स्वीकारा कि प्राधिकरण की गलती
से पांच हजार लोगों का रोजगार खतरे में पड़ गया है। बैठक में अफसरों ने निर्णय लिया कि उनकी कमेटी ग्रामीण, उद्यमी, भवन स्वामियों की सात सदस्य कमेटी से वार्ता कर, इस समस्या का हल निकाल लेगी। संघर्ष समिति के लोग समय सीमा निर्धारित करने की मांग पर अड़ गए।
कुछ देर बाद सात सदस्य कमेटी ने एचपीडीए द्वारा गठित कमेटी से वार्ता की तो कोई हल नहीं निकल सका। इसके विरोध में प्रदर्शनकारियों का गुस्सा बढ़ गया। उन्होंने एचपीडीए के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी, जो देर शाम तक जारी रही।
इससे नाराज किसानों ने प्राधिकरण परिसर में डेरा डाल दिया है। एक किसान लहरी सिंह आमरण अनशन पर भी बैठ गया है। आईआईए के चैप्टर चेयरमैन अमन गुप्ता ने बताया कि बैठक में कोई नतीजा नहीं निकल सका है। मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश सरकार से वार्ता के लिए समय मिल गया है।
विधायक गजराज सिंह के नेतृत्व में उनसे मिलने के लिए निकल जायेंगे। एचॎपीडीए के बाहर धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। अफसरों की तानाशाही के विरोध में पश्चिमी उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल भी भवन बचाओ संघर्ष समिति के समर्थन में आ गया है।
व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष संजय अग्रवाल, जिला महामंत्री टुक्कीराम गर्ग, अजुन गर्ग आदि ने धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को पूर्ण समर्थन की घोषणा की। संजय अग्रवाल ने कहा कि प्राधिकरण लोगों का विकास से ज्यादा विनाश कर रहा है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।
संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष नरेश अग्रवाल ने प्राधिकरण को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस समस्या का जल्द से जल्द निस्तारण नहीं हुआ तो वह हापुड़ बंद के लिए विवश हो जायेंगे। इसकी जिम्मेदारी प्राधिकरण के अफसरों की होगी।
इस मौके पर सुनील गोयल, कुणाल जैन, मुकेश जैन, अनिल गर्ग, हरि प्रसाद त्यागी, रमण गोयल, सोनू त्यागी, अंकित, प्रदीप समेत अनेक उद्यमी, किसान मौजूद रहे।