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Hapur News: ज्येष्ठ गंगा दशहरा आज, लाखों श्रद्धालु करेंगे स्नान

Wed, 04 Jun 2025 10:26 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़ Updated Wed, 04 Jun 2025 10:26 PM IST
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dussehra mela ganga snan
ब्रजघाट। ज्येष्ठ दशहरा पर आज बृहस्पतिवार को प्रातकाल शुभ मुहूर्त में गंगा स्नान शुरू होगा। इसमें 12 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के स्नान करने की संभावना है। वहीं, बुधवार शाम तक पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगानगरी में पड़ाव डाल दिया। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं।
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गंगा में स्नान करने के लिए श्रद्धालु हर-हर गंगे के जयकारों के साथ ब्रजघाट में पहुंच रहे हैं। बुधवार शाम को धर्मशालाओं, आश्रमों और मंदिरों के परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण गंगानगरी में चहल पहल बढ़ गई। मेले में व्यवस्थाओं की निगरानी के उद्देश्य से पुलिस और प्रशासन के अलावा नगर पालिका के अधिकारियों ने ब्रजघाट में पड़ाव डाला हुआ है। वहीं, बुधवार को भी श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान किया। इसके उपरांत श्रद्धालुओं ने बच्चों के मुंडन, गंगा पूजन भी किया। इस दौरान तट पर हवन और पूजन भी कराया गया। वहीं महिलाओं और बच्चों ने जमकर खरीदारी की।
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यह है गंगा अवतरण की पौराणिक कथा

पंडित मुनेंद्र शास्त्री ने बताया कि कपिल मुनि के श्राप से महाराजा सगर के साठ हजार पुत्र तथा अंशुमान के भाई भस्म हो गए थे। इन्हीं की मुक्ति के लिए महाराजा सगर के पुत्र अंशुमन ने गंगा को पृथ्वी पर लाने का प्रयास किया था। लेकिन वह असफल रहे। इसके बाद उनके पुत्र दिलीप ने भी तपस्या की लेकिन वह भी असफल रहे। दिलीप के पुत्र भागीरथ ने कई वर्षो तक तपस्या की। तब जाकर ब्रह्माजी प्रसन्न हुए और उन्होंने भागीरथ को वरदान दिया कि गंगाजी को वह पृथ्वी पर भेजेंगे। लेकिन गंगा का वेग संभालने के लिए पृथ्वी पर कोई नहीं था तब भागीरथ ने भगवान शिव को प्रसन्न कर गंगा का वेग संभालने का अनुरोध किया। तब प्रसन्न होकर भगवान शिव ने अपनी जटाओं में गंगा माता का समा लिया। इसके बाद इन्हीं जटाओं से गंगा का अवतरण हुआ। इसके बाद गंगा बहती हुई कपिल मुनि के आश्रम में पहुंची और महाराजा सगर के पुत्रों को श्राप से मुक्ति मिली। इसके बाद से गंगा का नाम भागीरथी भी पड़ा।
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गंगा स्नान के दौरान बरतें सावधानी

1-जिन स्थानों पर पालिका की बैरिकेडिंग नहीं है, वहां गंगा में स्नान न करें।

2- बैरिकेडिंग को पार कर स्नान न करें।

3-गहरे पानी की चपेट में आने पर तुरंत शोर मचा दें।

4-हो सके तो परिजन के साथ गंगा स्नान करने जाएं, ताकि डूबने की घटना होने पर बचाने की संभावना अधिक हों।

6-बच्चों को अपनी निगरानी में गंगा तट पर ही स्नान कराएं
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