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आज तक कलेक्ट्रेट का अपना भवन नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
Updated Mon, 06 Jun 2016 09:20 PM IST
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भवन
- फोटो : demo pic
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जिला बनने के साढ़े चार साल बाद भी कलेक्ट्रेट का अपना भवन नहीं है। जिला बनने के बाद डायट परिसर में खाली पड़े कमरों में अस्थाई कलेक्ट्रेट शुरू हुई थी, तब से वहीं है। हालांकि दिल्ली रोड पर भवन का निर्माण चल रहा है और साल भर पहले चार करोड़ की पहली किस्त भी आ चुकी है।
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पर निर्माण कार्य की गति धीमी होने से अभी तक लगभग आधा काम ही हो सका है, जबकि इसे दिसंबर 2016 में पूरा होना है। जानकारों की माने तो निर्माण कार्य की गति को देखते हुए समय पर काम पूरा होता नहीं दिख रहा है।
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धीमी गति से निर्माण कार्य चलने के कारण जिला प्रशासन के अफसर और कर्मचारियों को अभी अपने भवन का और इंतजार करना पड़ सकता है। तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने 28 सितंबर वर्ष 2011 को हापुड़ को जिला घोषित किया था।
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डीएम, एडीएम समेत कई अफसरों की तैनाती हो गई थी। आनन फानन में डायट परिसर में खाली पड़े कमरों में अस्थाई कलेक्ट्रेट का बंदोबस्त कराया गया। यहां जगह कम होने के कारण अफसरों, कर्मचारियों के साथ-साथ यहां आने वाले लोगों को भी काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
बरसात में तो कलक्ट्रेट परिसर जलमग्न हो जाता है। कर्मचारी किसी तरह फाइलों, कंप्यूटर व अन्य सामानों को बचाने में जुट जाते हैं। दिल्ली रोड पर बालाजी मंदिर के पीछे यूपी एग्रो के जमीन पर कलेक्ट्रेट भवन बनाने का निर्णय लेते हुए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था।
प्रस्ताव शासन ने स्वीकृत कर दिया था और 28 जुलाई 2015 को चार करोड़ रुपये की धनराशि शासन ने निर्माण के लिए जिला प्रशासन को भेज दी थी और राजकीय निर्माण निगम को नोडल एजेंसी बनाया गया था।
करीब एक साल बीत जाने के बाद भी कलक्ट्रेट का निर्माण कार्य गति नहीं पकड़ रहा है, जबकि दिसंबर 2016 तक यह पूरा होना है।
नवसृजित जिला हापुड़ के बनने के साढ़े चार साल बीतने के बाद भी अभी तक एडीएम(एलए) की तैनाती नहीं हो सकी है। जबकि मुआवजे के मामले गाजियाबाद में लंबित पड़े हैं। यहां के किसानों को गाजियाबाद जाना पड़ता है और काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कलेक्ट्रेट के निर्माण की गति धीमी न हो इस पर पूरा ध्यान रखा जा रहा है। निर्माण निगम के अफसरों को निर्देशित किया गया है कि हर हाल में दिसंबर तक कार्य पूरा किया जाए। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एसडीएम से समय-समय पर निर्माणाधीन भवन का निरीक्षण कराया जाता है। एडीएम (एलए) की नियुक्त जल्द हो इसका प्रयास किया जा रहा है। अनिल ढींगरा, जिलाधिकारी