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सीएचसी में नवजातों के सेहत से हो रहा खिलवाड़

Tue, 23 Aug 2016 08:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़ Updated Tue, 23 Aug 2016 08:23 PM IST
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CHC health of newborns are messing.
वाह रे! स्वास्थ्य विभाग - फोटो : अमर उजाला

वाह रे! स्वास्थ्य विभाग, अस्पताल में बुखार के मरीजों को तो ठीक से इलाज नहीं मिल रहा ऊपर से चिकित्सक जच्चा-बच्चा की भी जान जोखिम में डाल रहें हैं। सीएचसी में लापरवाह चिकित्सकों ने वायरल से पीड़ित मरीजों के वार्ड में ही जच्चा-बच्चा को भर्ती करा दिया है।

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आलम यह है कि दोपहर 1.30 बजते ही सीएचसी में चिकित्सकों के तमाम कार्यालयों पर ताले लटके मिले। एक्से-रे रूम पर भी ताला लटका रहा। अल्ट्रासाउंड सेंटर में कोई कर्मचारी मौके पर नहीं मिल सका।
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बरसात के मौसम में वायरल बुखार का प्रकोप जोरों पर है। निजी, सरकारी अस्पताल मरीजों से भरे पड़े हैं। गढ़ रोड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (जिला अस्पताल) पर चिकित्सकों की घोर लापरवाही सामने आ रही हैं।
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बुखार के मरीजों को राहत दिलाने का ढोल पीट रहे स्वास्थ्य विभाग के अफसर नवजात बच्चों को भी बीमारी बांटने से पीछे नहीं हट रहे हैं। आलम यह है कि सीएचसी में बुखार पीड़ितों के लिए वार्ड में ही करीब छह जच्चाओं को उनके नवजात बच्चों के साथ भर्ती करा दिया गया।

आसपास के बेड पर वायरल पीड़ितों के रहने से नवजात बच्चों के जान को खतरा बन रहा है लेकिन सीएचसी प्रशासन को इसकी तनिक भी चिंता नहीं है।

बुखार के मरीजों को समय से इलाज मिल सके। इसलिए चिकित्सकों को अस्पताल में मौजूद रहना चाहिए लेकिन हापुड़ सीएचसी में मंगलवार दोपहर 1.30 बजे रात जैसा माहौल दिखा।

कोई भी चिकित्सक अपने कार्यालय में तैनात नहीं था। सभी कार्यालयों पर ताले लटके मिले। सीएचसी से आला अधिकारी भी नदारद थे।

सीएचसी के एक्स-रे रूम में तैनात कर्मचारी अक्सर मरीजों से अभद्र व्यवहार करते हैं। मंगलवार को भी मरीज एक्स-रे कराने के लिए भटकते रहे लेकिन यहां तैनात कर्मचारी नेे ताला खोलने की भी जरूरत नहीं समझी।

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एके सिंह का कहना है कि बुखार वाले मरीजों के वार्ड में जच्चा-बच्चा को रखना गंभीर मामला है। इस मामले की वह जांच करा आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

गढ़ रोड स्थित सीएचसी में अव्यवस्थाएं इस कदर हावी हैं कि मरीजों को यहां इलाज कराना मुश्किल हो गया है। मंगलवार को आपातकालीन कक्ष में कोई चिकित्सक के नहीं मौजूद होने से डेढ़ घंटे तक महिला प्रसव पीड़ा से तड़पती रही।

बताया जा रहा है कि पीड़िता संविदा सफाई कर्मी है और उसके पेट मेें गढ़मुक्तेश्वर तहसील में एक कर्मी ने ही घूंसा मार दिया था, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई थी। हालांकि, बाद में चिकित्सकों ने गर्भवती संविदा कर्मी को मेरठ के लिए रेफर कर दिया।

मूलरूप से भोजपुर पट्टी निवासी सुबोध अपनी पत्नी सुदेश के साथ गढ़मुक्तेश्वर तहसील में सफाई का काम करते हैं। सुबोध ने बताया कि मंगलवार दोपहर अन्य सफाई कर्मी ने उसकी पत्नी से छेड़छाड़ कर दी। विरोध करने पर आरोपी ने महिला के पेट में घूंसा मार दिया।

महिला तीन महीने की गर्भवती है, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे गढ़मुक्तेश्वर सीएचसी में भर्ती कराया गया। लेकिन वहां के चिकित्सकों ने महिला को हापुड़ सीएचसी के लिए रेफर कर दिया, जहां चिकित्सक के मौजूद नहंी रहने पर महिला दर्द से तड़पती रही।

डेढ़ घंटे बाद एक महिला चिकित्सक आपातकालीन कक्ष में पहुंची और गर्भवती को बिना चेकअप किए मेरठ के लिए रेफर कर दिया। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार के लाख प्रयास के बाद भी स्वास्थ्य कर्मी मरीजों की किस हद तक अनदेखी कर रहे हैं।


मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एके सिंह का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में है। अधिकांश चिकित्सक मंगलवार को आशा सम्मेलन में मौजूद थे। महिला की हालत को देखते हुए उसे मेरठ रेफर कर दिया गया है।

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