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भाजपा के साठा-चौरासी किले को भेद पाना आसान नहीं
Hapur
Updated Fri, 28 Mar 2014 05:33 AM IST
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पिलखुवा। भाजपा के साठा-चौरासी किले को भेद पाना आसान नहीं है। लोकसभा के चुनाव में साठा-चौरासी की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। यही वजह है कि इस सीट से भाजपा के टिकट पर पूर्व सांसद रमेश चंद तोमर लगातार तीन बार जीते। वर्तमान सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह की नैया भी इसी के भरोसे पार हुई। इन्हीं जातीय आंकड़ों को आधार मानते हुए भाजपा ने ठाकुर बिरादरी के जनरल वी के सिंह को गाजियाबाद लोकसभा सीट से मैदान में उतारा है।
साठा चौरासी पर नजर डाला जाय तो इस क्षेत्र में 60 गांव सिसौदिया वंश के हैं और 84 गांव तोमर वंश के बताये जाते हैं, इसलिए संयुक्त रुप से इस क्षेत्र को साठा चौरासी के नाम से पुकारा जाता है । वर्ष 1991 में भाजपा ने प्रोफेसर रमेश चंद तोमर को अनमने मन से गाजियाबाद लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा था। रमेश चंद तोमर का यह पहला चुनाव था। साठा चौरासी से बाहर का होने के कारण उनके लिए यह क्षेत्र नया था, लेकिन साठा चौरासी के एकमुश्त वोटों की खातिर तोमर अपना पहला ही चुनाव भारी मतों से जीते थे। इसके बाद तोमर ने लगातार तीसरी बार इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। वर्ष 2009 में तोमर को यह सीट पार्टी के वरिष्ठ भाजपा नेता राजनाथ सिंह के लिए छोड़नी पड़ी । राजनाथ सिंह ने यह चुनाव करीब एक लाख मतों से जीता था। बाद में टिकट न मिलने से क्षुब्ध रमेश चंद तोमर ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था । हालांकि इस बार राजनाथ सिंह लखनऊ से चुनाव मैदान में हैं। भाजपा का गढ़ माने जाने वाले साठा चौरासी क्षेत्र से वर्ष 1993 व 1996 तथा वर्ष 2002 में भाजपा के टिकट पर नरेंद्र सिंह सिसौदिया ने ठाकुर बहुल धौलाना सीट से हैट्रिक लगाई थी । हालांकि वर्ष 2007 में भाजपा से टिकट न मिलने पर नरेंद्र सिंह सिसौदिया ने भी भाजपा छोड़ दी थी । इसी जातीय आंकड़ों के आधार पर भाजपा ने काफी जद्दोजहद के बाद ठाकुर जातीय के ही जनरल वीके सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है। चुनावी पंडितों का मानना है कि भाजपा के इस गढ़ साठा चौरासी पर दूसरे दलों के लिए सेंध लगाना आसान नहीं होगा।
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साठा चौरासी पर नजर डाला जाय तो इस क्षेत्र में 60 गांव सिसौदिया वंश के हैं और 84 गांव तोमर वंश के बताये जाते हैं, इसलिए संयुक्त रुप से इस क्षेत्र को साठा चौरासी के नाम से पुकारा जाता है । वर्ष 1991 में भाजपा ने प्रोफेसर रमेश चंद तोमर को अनमने मन से गाजियाबाद लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा था। रमेश चंद तोमर का यह पहला चुनाव था। साठा चौरासी से बाहर का होने के कारण उनके लिए यह क्षेत्र नया था, लेकिन साठा चौरासी के एकमुश्त वोटों की खातिर तोमर अपना पहला ही चुनाव भारी मतों से जीते थे। इसके बाद तोमर ने लगातार तीसरी बार इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। वर्ष 2009 में तोमर को यह सीट पार्टी के वरिष्ठ भाजपा नेता राजनाथ सिंह के लिए छोड़नी पड़ी । राजनाथ सिंह ने यह चुनाव करीब एक लाख मतों से जीता था। बाद में टिकट न मिलने से क्षुब्ध रमेश चंद तोमर ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था । हालांकि इस बार राजनाथ सिंह लखनऊ से चुनाव मैदान में हैं। भाजपा का गढ़ माने जाने वाले साठा चौरासी क्षेत्र से वर्ष 1993 व 1996 तथा वर्ष 2002 में भाजपा के टिकट पर नरेंद्र सिंह सिसौदिया ने ठाकुर बहुल धौलाना सीट से हैट्रिक लगाई थी । हालांकि वर्ष 2007 में भाजपा से टिकट न मिलने पर नरेंद्र सिंह सिसौदिया ने भी भाजपा छोड़ दी थी । इसी जातीय आंकड़ों के आधार पर भाजपा ने काफी जद्दोजहद के बाद ठाकुर जातीय के ही जनरल वीके सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है। चुनावी पंडितों का मानना है कि भाजपा के इस गढ़ साठा चौरासी पर दूसरे दलों के लिए सेंध लगाना आसान नहीं होगा।
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