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Hamirpur News: सामूहिक दुष्कर्म में दो भाइयों समेत तीन को 20 साल की सजा
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= दो बेटों को 20 साल, मां को तीन साल की सुनाई गई सजा, लगा जुर्माना
= 19 अगस्त 2016 में मौदहा क्षेत्र से गायब हुई थी किशोरी
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। मौदहा क्षेत्र में करीब दस साल पहले नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने, बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म करने के मामले में शुक्रवार को पॉक्सो एक्ट कोर्ट के न्यायाधीश अनिल कुमार खरवार ने फैसला सुनाया। साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर चार आरोपियों को दोषी करार दिया। इसमें दो किशोर भाइयों समेत तीन को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। किशोरों की मां को तीन साल की सजा दी है। चारों को अर्थदंड से भी दंडित किया है।
अभियोजन के मुताबिक मौदहा थाना क्षेत्र में किराये के मकान में रहने वाली महिला ने अपनी नाबालिग बेटी को 19 अगस्त 2016 को दोपहर के वक्त सामान लेने के लिए दुकान भेजा था। काफी देर तक वापस न लौटने पर परिजनों ने तलाश शुरू की। जब वह नहीं मिली तो इसकी सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने 24 अगस्त को प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू की। इसमें दो किशोरों व उनकी मां समेत कुल पांच को आरोपी बनाया गया। पुलिस ने किशोरी को बांदा से बरामद किया। इसके बाद उसका चिकित्सीय परीक्षण कराया और 161 व 164 के बयान दर्ज कराए गए। आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किए। कोर्ट में चली सुनवाई के दौरान पीड़िता के बयान से लेकर अन्य साक्ष्य व गवाह पेश किए गए। इसके आधार पर न्यायाधीश ने सजा सुनाई।
दोषी गोलू उर्फ अमित कुमार व दो किशोर अपचारियों को धारा 376डी में 20-20 वर्ष के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। धारा 363 में दोनों को तीन-तीन वर्ष का कठोर कारावास और तीन-तीन हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 120बी में भी तीन-तीन वर्ष का कठोर कारावास और तीन-तीन हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अर्थदंड न देने पर धारा 376डी में चार-चार वर्ष, जबकि धारा 363 और 120बी में एक-एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। इसी प्रकरण से जुड़े विशेष वाद संख्या 43/2017 में अदालत ने महिला शानू को धारा 363 में तीन वर्ष के कठोर कारावास और तीन हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। जुर्माना न जमा करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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एक कमरे में तीन माह तक बनाए रखा बंधक
पीड़िता के दर्ज बयान के मुताबिक उसे एक कमरे में बंद रखा गया था। करीब तीन महीने तक बंधक बनाकर उसके साथ आरोपियों ने बारी-बारी से दुष्कर्म किया। बाद में उसे बांदा में रेलवे ट्रैक के पास छोड़ दिया गया। वहां से जीआरपी के माध्यम से परिजनों तक सूचना पहुंची और पुलिस ने उसे मौदहा लाकर कार्रवाई की।
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जांच में बढ़ाई गई थी दुष्कर्म की धारा
प्राथमिकी धारा 363 और पॉक्सो एक्ट की धारा आठ के तहत दर्ज हुई थी। विवेचना के दौरान पीड़िता की बरामदगी, उसके बयान, चिकित्सीय परीक्षण और अन्य साक्ष्यों के आधार पर धारा 376डी और पॉक्सो एक्ट की धारा छह बढ़ाई गई। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर आरोपियों को दोषी माना।
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एक की हो चुकी मौत
मामले में दो आरोपियों को किशोर घोषित किए जाने के कारण उनकी पत्रावली अलग कर दी गई थी। वहीं एक अन्य किशोर अपचारी की मृत्यु हो जाने के कारण उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी। इसके बाद चार के खिलाफ मुकदमा आगे बढ़ा।
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= 19 अगस्त 2016 में मौदहा क्षेत्र से गायब हुई थी किशोरी
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। मौदहा क्षेत्र में करीब दस साल पहले नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने, बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म करने के मामले में शुक्रवार को पॉक्सो एक्ट कोर्ट के न्यायाधीश अनिल कुमार खरवार ने फैसला सुनाया। साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर चार आरोपियों को दोषी करार दिया। इसमें दो किशोर भाइयों समेत तीन को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। किशोरों की मां को तीन साल की सजा दी है। चारों को अर्थदंड से भी दंडित किया है।
अभियोजन के मुताबिक मौदहा थाना क्षेत्र में किराये के मकान में रहने वाली महिला ने अपनी नाबालिग बेटी को 19 अगस्त 2016 को दोपहर के वक्त सामान लेने के लिए दुकान भेजा था। काफी देर तक वापस न लौटने पर परिजनों ने तलाश शुरू की। जब वह नहीं मिली तो इसकी सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने 24 अगस्त को प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू की। इसमें दो किशोरों व उनकी मां समेत कुल पांच को आरोपी बनाया गया। पुलिस ने किशोरी को बांदा से बरामद किया। इसके बाद उसका चिकित्सीय परीक्षण कराया और 161 व 164 के बयान दर्ज कराए गए। आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किए। कोर्ट में चली सुनवाई के दौरान पीड़िता के बयान से लेकर अन्य साक्ष्य व गवाह पेश किए गए। इसके आधार पर न्यायाधीश ने सजा सुनाई।
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दोषी गोलू उर्फ अमित कुमार व दो किशोर अपचारियों को धारा 376डी में 20-20 वर्ष के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। धारा 363 में दोनों को तीन-तीन वर्ष का कठोर कारावास और तीन-तीन हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 120बी में भी तीन-तीन वर्ष का कठोर कारावास और तीन-तीन हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अर्थदंड न देने पर धारा 376डी में चार-चार वर्ष, जबकि धारा 363 और 120बी में एक-एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। इसी प्रकरण से जुड़े विशेष वाद संख्या 43/2017 में अदालत ने महिला शानू को धारा 363 में तीन वर्ष के कठोर कारावास और तीन हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। जुर्माना न जमा करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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एक कमरे में तीन माह तक बनाए रखा बंधक
पीड़िता के दर्ज बयान के मुताबिक उसे एक कमरे में बंद रखा गया था। करीब तीन महीने तक बंधक बनाकर उसके साथ आरोपियों ने बारी-बारी से दुष्कर्म किया। बाद में उसे बांदा में रेलवे ट्रैक के पास छोड़ दिया गया। वहां से जीआरपी के माध्यम से परिजनों तक सूचना पहुंची और पुलिस ने उसे मौदहा लाकर कार्रवाई की।
जांच में बढ़ाई गई थी दुष्कर्म की धारा
प्राथमिकी धारा 363 और पॉक्सो एक्ट की धारा आठ के तहत दर्ज हुई थी। विवेचना के दौरान पीड़िता की बरामदगी, उसके बयान, चिकित्सीय परीक्षण और अन्य साक्ष्यों के आधार पर धारा 376डी और पॉक्सो एक्ट की धारा छह बढ़ाई गई। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर आरोपियों को दोषी माना।
एक की हो चुकी मौत
मामले में दो आरोपियों को किशोर घोषित किए जाने के कारण उनकी पत्रावली अलग कर दी गई थी। वहीं एक अन्य किशोर अपचारी की मृत्यु हो जाने के कारण उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी। इसके बाद चार के खिलाफ मुकदमा आगे बढ़ा।