{"_id":"5ec956008ebc3e90591e5211","slug":"cultural-hamirpur-news-knp5616851124","type":"story","status":"publish","title_hn":"घरों में मनाएं ईद, गरीबों की मदद करें : मुफ्ती, सामाजिक दूरी का पालन करें और मॉस्क अवश्य लगाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घरों में मनाएं ईद, गरीबों की मदद करें : मुफ्ती, सामाजिक दूरी का पालन करें और मॉस्क अवश्य लगाएं
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मौदहा। मुबारक महीना रमजान विदा हो रहा है और खुशियों का पर्व ईद ऐसे वक्त में है, जब पूरी दुनिया दहशत में है। बचाव का पहला और कारगर तरीका लॉकडाउन व सामाजिक दूरी है। ऐसे में मदरसा यादगार मोहम्मदी हुसैनी के मुफ्ती मोहम्मद सलमान रजवी मिस्बाही ने लोगों से अपील की है कि वह ईद की नमाज से पहले सदकाए फित्र अदा करें।
यह इसलिए जरूरी है कि रोजे में अनजाने में कमी आ जाती है। मौदहा में यह प्रत्येक पर 40 रुपये देना तय है। उन्होंने ईद के मसले पर कहा सरकार ने लॉकडाउन में ईदगाह या मस्जिद में नमाज न होने की बात कही है। जितने लोगों को नमाज की इजाजत है। उससे अधिक न जाएं। बाकी लोग अपने घरों में नमाज अदा करें। नमाज के बाद 34 मरतबा अल्लहो अकबर पढ़े। उन्होंने कहा शरियत का हुक्म मानें। ईद बहुत सादगी से मनाएं। गरीबों की मदद करें।
कहीं भीड़ एकत्र न करें। कोरोना से निजात की दुआएं भी करें। उधर, हाफिज मतिऊ रहमान ने कहा हजार प्रयासों के बावजूद भी कोरोना की बीमारी हमारे देश में बढ़ती जा रही है। मुसलमानों ने विशेषकर रमजान के मुबारक महीने में स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों का पालन किया है, वह बेमिसाल है। अब ईदुल फित्र भी नजदीक है।
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दारुल उलूम देवबंद का फतवा आ चुका है कि ईद की नमाज भी जुमा की नमाज की तरह अदा की जा सकती है। कहा दारुल उलूम देवबंद का फतवा है कि ईद की नमाज वाजिब है और इसके लिए वही शर्त है, जो जुमे की नमाज के लिए है। मजबूरी की वजह से उन पर नमाजे ईद माफ होगी, अलबता ऐसे लोग जो नमाजे ईद न पढ़ पाएं, वे अपने घरों में दो या चार रकात चाश्त की नमाज पढ़ लें।
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यह इसलिए जरूरी है कि रोजे में अनजाने में कमी आ जाती है। मौदहा में यह प्रत्येक पर 40 रुपये देना तय है। उन्होंने ईद के मसले पर कहा सरकार ने लॉकडाउन में ईदगाह या मस्जिद में नमाज न होने की बात कही है। जितने लोगों को नमाज की इजाजत है। उससे अधिक न जाएं। बाकी लोग अपने घरों में नमाज अदा करें। नमाज के बाद 34 मरतबा अल्लहो अकबर पढ़े। उन्होंने कहा शरियत का हुक्म मानें। ईद बहुत सादगी से मनाएं। गरीबों की मदद करें।
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कहीं भीड़ एकत्र न करें। कोरोना से निजात की दुआएं भी करें। उधर, हाफिज मतिऊ रहमान ने कहा हजार प्रयासों के बावजूद भी कोरोना की बीमारी हमारे देश में बढ़ती जा रही है। मुसलमानों ने विशेषकर रमजान के मुबारक महीने में स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों का पालन किया है, वह बेमिसाल है। अब ईदुल फित्र भी नजदीक है।
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दारुल उलूम देवबंद का फतवा आ चुका है कि ईद की नमाज भी जुमा की नमाज की तरह अदा की जा सकती है। कहा दारुल उलूम देवबंद का फतवा है कि ईद की नमाज वाजिब है और इसके लिए वही शर्त है, जो जुमे की नमाज के लिए है। मजबूरी की वजह से उन पर नमाजे ईद माफ होगी, अलबता ऐसे लोग जो नमाजे ईद न पढ़ पाएं, वे अपने घरों में दो या चार रकात चाश्त की नमाज पढ़ लें।