{"_id":"6276b48bf6394f457d187c8c","slug":"crime-hamirpur-news-knp695487376","type":"story","status":"publish","title_hn":"नालों की सफाई में घोटाले की फिर जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नालों की सफाई में घोटाले की फिर जांच
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मौदहा। नगर में नालों की सफाई के नाम पर लाखों के घोटाले की जांच तीन सदस्यीय टीम ने की। सांसद के पत्र पर अपर आयुक्त ने जांच कराई है। हालांकि जिन जिन बिंदुओं पर शिकायत की गई थी उनका स्थलीय निरीक्षण करना टीम ने उचित नहीं समझा।
लगातार शिकायतों के बाद 55 लाख गबन की एफआईआर एसडीएम राजेश कुमार चौरसिया ने पालिकाध्यक्ष रामकिशोर सहित दो अधिशासी अधिकारी एक एई तथा जेई और तीन ठेकेदारों पर दर्ज कराई थी। नगर पालिका सभासद छोटेलाल, शिवकुमार, लवलेश शिवहरे सहित अन्य ने पिछले साल हुए घोटाले के मामले में आरोपी पालिकाध्यक्ष के भाजपा में जाने की सुगबुगाहट का विरोध किया था। तब सांसद के पत्र का हवाला देकर इस घोटाले का रफादफा करने की बात सामने आई। इस पर सांसद के पत्र को फर्जी बता दूसरा पत्र जारी किया। इसमें कहा गया नए सिरे से जांच करें। भ्रष्टाचार मामले में अध्यक्ष रामकिशोर श्रीवास, तत्कालीन ईओ महेंद्र सिंह चौधरी, एई एलपी निरंजन, जेई हर्षित पटेरिया व तीन ठेकेदारों फरीदउद्दीन, प्रवीण दीक्षित, कमलेश वर्मा के खिलाफ एसडीएम ने कोतवाली में मुकदमा पंजीकृत कराया था।
कई लोगों ने न्यायालय से अग्रिम जमानत ले ली थी। अध्यक्ष व अन्य ने सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल का जारी पत्र आयुक्त को सौंप दोबारा जांच कराने के लिए लिखा था, तब शिकायत कर्ताओं ने सांसद से संपर्क कर जानकारी दी। इस पर सांसद से दोबारा पत्र जारी करा पहले जारी पत्र को कूट रचित व भ्रामक बताया। पूर्व की जांच को सही ठहराते दोषियों पर कार्यवाही को कहा है। गुरुवार को जांच टीम में अपर आयुक्त, अपर जिलाधिकारी व कोषाधिकारी सहित शिकायतकर्ता और आरोपी उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
लगातार शिकायतों के बाद 55 लाख गबन की एफआईआर एसडीएम राजेश कुमार चौरसिया ने पालिकाध्यक्ष रामकिशोर सहित दो अधिशासी अधिकारी एक एई तथा जेई और तीन ठेकेदारों पर दर्ज कराई थी। नगर पालिका सभासद छोटेलाल, शिवकुमार, लवलेश शिवहरे सहित अन्य ने पिछले साल हुए घोटाले के मामले में आरोपी पालिकाध्यक्ष के भाजपा में जाने की सुगबुगाहट का विरोध किया था। तब सांसद के पत्र का हवाला देकर इस घोटाले का रफादफा करने की बात सामने आई। इस पर सांसद के पत्र को फर्जी बता दूसरा पत्र जारी किया। इसमें कहा गया नए सिरे से जांच करें। भ्रष्टाचार मामले में अध्यक्ष रामकिशोर श्रीवास, तत्कालीन ईओ महेंद्र सिंह चौधरी, एई एलपी निरंजन, जेई हर्षित पटेरिया व तीन ठेकेदारों फरीदउद्दीन, प्रवीण दीक्षित, कमलेश वर्मा के खिलाफ एसडीएम ने कोतवाली में मुकदमा पंजीकृत कराया था।
विज्ञापन
कई लोगों ने न्यायालय से अग्रिम जमानत ले ली थी। अध्यक्ष व अन्य ने सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल का जारी पत्र आयुक्त को सौंप दोबारा जांच कराने के लिए लिखा था, तब शिकायत कर्ताओं ने सांसद से संपर्क कर जानकारी दी। इस पर सांसद से दोबारा पत्र जारी करा पहले जारी पत्र को कूट रचित व भ्रामक बताया। पूर्व की जांच को सही ठहराते दोषियों पर कार्यवाही को कहा है। गुरुवार को जांच टीम में अपर आयुक्त, अपर जिलाधिकारी व कोषाधिकारी सहित शिकायतकर्ता और आरोपी उपस्थित रहे।
विज्ञापन