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निजी कंपनियों को दिए गए टेंडर कर ए जाएं रद्द : खरवाड़ा
Updated Tue, 20 Jun 2017 10:39 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नादौन (हमीरपुर)। हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन के प्रधान कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने कहा कि बिजली बोर्ड में कर्मचारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन बखूबी कर रहे हैं। लेकिन, बोर्ड के अधिकारी कर्मचारियों को नजरअंदाज कर रहे हैं। अधिकारी कमीशन बटोरने के चक्र में बिजली बोर्ड के कार्यों को निजी कंपनियों को ठेके पर दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के विरोध के बावजूद भी एमएंडटी में ट्रांसफार्मरों की रिपेयरिंग का कार्य निजी कंपनी को 1.62 करोड़ रुपये में ठेके पर दे दिया गया।
वहीं, सीटीपीटी की टेस्टिंग, 66 केवी व 220 केवी तक के बड़े उपकेंद्रों की मीटर टेस्टिंग, बड़े उद्योगों के कनेक्शनों की टेस्टिंग का कार्य निजी कंपनी को 1.76 करोड़ रुपये में दिया गया। उन्होंने कहा कि एमएंडटी में 160 कर्मचारी कार्य करते हैं। कर्मचारी हर वर्ष निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन टेस्टिंग जैसे कार्यों को निजी हाथों में सौंपना बिजली बोर्ड के हितों के खिलाफ है। उन्होंने निजी कंपनियों को दिए गए टेंडर को जल्द रद्द करने की मांग बिजली बोर्ड से की है। उन्होंने कहा कि यदि टेंडर रद्द नहीं होते हैं तो यूनियन संघर्ष करने के लिए बाध्य होगी।
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नादौन (हमीरपुर)। हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन के प्रधान कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने कहा कि बिजली बोर्ड में कर्मचारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन बखूबी कर रहे हैं। लेकिन, बोर्ड के अधिकारी कर्मचारियों को नजरअंदाज कर रहे हैं। अधिकारी कमीशन बटोरने के चक्र में बिजली बोर्ड के कार्यों को निजी कंपनियों को ठेके पर दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के विरोध के बावजूद भी एमएंडटी में ट्रांसफार्मरों की रिपेयरिंग का कार्य निजी कंपनी को 1.62 करोड़ रुपये में ठेके पर दे दिया गया।
वहीं, सीटीपीटी की टेस्टिंग, 66 केवी व 220 केवी तक के बड़े उपकेंद्रों की मीटर टेस्टिंग, बड़े उद्योगों के कनेक्शनों की टेस्टिंग का कार्य निजी कंपनी को 1.76 करोड़ रुपये में दिया गया। उन्होंने कहा कि एमएंडटी में 160 कर्मचारी कार्य करते हैं। कर्मचारी हर वर्ष निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन टेस्टिंग जैसे कार्यों को निजी हाथों में सौंपना बिजली बोर्ड के हितों के खिलाफ है। उन्होंने निजी कंपनियों को दिए गए टेंडर को जल्द रद्द करने की मांग बिजली बोर्ड से की है। उन्होंने कहा कि यदि टेंडर रद्द नहीं होते हैं तो यूनियन संघर्ष करने के लिए बाध्य होगी।
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