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10 मुल्कों में थे किडनी रैकेट के 500 एजेंट
पुनीत शर्मा/मुरादाबाद
Updated Sat, 23 Mar 2013 08:00 PM IST
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गुड़गांव के चर्चित किडनी कांड में सीबीआई की विशेष अदालत ने दस में से पांच दोषियों को सजा सुनाई है, जबकि पांच को बरी कर दिया है। किडनी कांड के सरगना डॉक्टर अमित और डॉक्टर उपेंद्र का रैकेट दिल्ली, एनसीआर के साथ दस मुल्कों तक फैला था।
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अमेरिका, ग्रीस, कनाडा, दुबई, नेपाल, इंग्लैंड, जापान, फ्रांस, सऊदी अरब और ईरान के बीमार लोगों को अमित किडनी लगा चुका था। जिस वक्त मुरादाबाद पुलिस ने इस गैंग का खुलासा किया उस समय भी 130 गुर्दों की एडवांस बुकिंग हो चुकी थी। इनमें ज्यादातर विदेशी थे। डा. उपेंद्र ने पुलिस के समक्ष कुबूल किया था कि 500 एजेंट काम कर रहे हैं।
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बीस हजार की किडनी 20 लाख में
मुरादाबाद पुलिस ने डा. उपेंद्र को 24 जनवरी वर्ष 2008 में गिरफ्तार किया था। उपेंद्र ने पुलिस पूछताछ में बताया था इस गैंग के एजेंट गरीब बस्तियों में जरूरतमंदों की तलाश करते थे। बीस से पच्चीस हजार तक में एक किडनी खरीदी जाती थी। जिसे बीस लाख तक में बेचा गया। कई लोगों को तो बेहोश करके किडनी निकाल ली गई थी।
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राजनेताओं से भी रिश्ते
डा. उपेंद्र के पास से मिली डायरी में दर्ज नंबरों को जब तत्कालीन एसएसपी प्रेमप्रकाश ने डायल कराया तो यह नंबर कई नामचीन अस्पताल के डाक्टरों के निकले। सियासत में बड़ा स्थान रखने वालों से भी इस गैंग के करीबी रिश्ते थे। पुलिस ने जब गुड़गांव में स्थित एक कोठी पर छापा मारा तो वहां कई मरीज भर्ती थे, जिनकी किडनी निकाली जानी थी।
जब इन लोगों से पूछा गया तो सभी ने कहा कि बीस हजार दिलवाने की बात कहकर कुछ लोग लाए थे। कह रहे थे कि एक छोटा सा चीरा लगेगा और पैसे मिल जाएंगे। पुलिस तफ्तीश में जो सामने आया था उसके मुताबिक जितने भी विदेशी मरीज यहां लाए गए थे वह सभी टूरिस्ट वीजा पर थे। किसी का वीजा एक महीने का था तो किसी को दो महीने का।
झोलाछाप डाक्टर भी कर रहे थे काम
पुलिस पूछताछ में पता चला था कि मुरादाबाद के भी छह लोगों की किडनी ली जानी थी। सौदेबाजी हो चुकी थी। लेकिन एक व्यक्ति पुलिस के पास पहुंच गया। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, बिहार और बंगाल के कई झोलाछाप डाक्टर भी इस गैंग के लिए काम कर रहे थे।