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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   will not outperform the large amount of malkhane

नहीं चेते तो बड़ी मात देगी मालखाने की रकम

Fri, 11 Nov 2016 01:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Fri, 11 Nov 2016 01:57 AM IST
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पांच सौ और एक हजार के नोट पर पाबंदी से कालाधन ही नहीं मालखाने के नोट भी अवैध हो सकते हैं। यदि समय रहते वादी या विवेचक नहीं चेते तो यह रकम बेकार हो जाएगी। यदि वादी न्यायालय चला गया तो पुलिस का सिरदर्द भी बढ़ जाएगा। फिलहाल पुलिस अफसर इस रकम को लेकर गफलत में हैं। वह शासन की गाइडलाइन का इंतजार कर रहे हैं।
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जिले के थानों में तमाम मामलों में बरामद एक करोड़ से ज्यादा की रकम रखी हुई है। इससे जुड़े मामले न्यायालयों में विचाराधीन हैं। इस वजह से इस रकम पर पुलिस महकमा भी अभी ध्यान नहीं दे रहा है। तमाम ऐसे मामले हैं जिनके निपटारे में अभी समय लग सकता है और यदि मुकदमों के निपटारे में मार्च का समय बीत गया तो फिर ये रुपये अवैध हो जाएंगे। न्यायालय के आदेश पर पुलिस इन रुपयों को सौंप तो जरूर देगी मगर लेने वाले के हिस्से में सिर्फ कागज के टुकड़े ही आएंगे। कानूनी जानकारों की मानें तो यदि ऐसी दशा में रकम वापसी के समय संबंधित पक्षकार रुपये की वैधानिकता का सवाल उठाकर पुलिस को कोर्ट में चुनौती दे सकता है। ऐसे में पुलिस की मुसीबत बढ़ना तय है।
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कोर्ट में दे सकते हैं अर्जी

यदि किसी मामले में पुलिस ने रकम को बरामद किया है तो अर्जी जेकर कोर्ट से रकम रिलीज कराने, सुपुर्दगी में लेकर नोट बदलवाने की अनुमति ली जा सकती है। यह काम विवेचक कर सकते हैं, वादी या अभियुक्त भी। विवेचक यदि कोर्ट में यह अर्जी दे कि नोट अनुपयोगी हो जाएंगे तो कोर्ट नोट के फोटो खींचकर केस डायरी में लगाने के साथ ही रकम को बैंक में जमा करने की अनुमति दे सकती है। यही प्रक्रिया वादी या अभियुक्त भी अपना सकते हैं। यदि उन्हें यह भरोसा हो कि मालखाने की रकम उनके ही हक की है तो वे कोर्ट में अर्जी दे सकते हैं। मालखाने में रखे नोट अवैध होने की दशा में फैसला आने पर नोट की वैधानिकता के कारण नुकसान में पहुंचने वाला पक्ष कोर्ट जाकर अपने हक में फैसला हासिल कर सकता है। 
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- शंकर शरण त्रिपाठी, वरिष्ठ अधिवक्ता

मालखानों में जमा रकम माल मुकदमा (केस प्रॉपर्टी) है। बिना कोर्ट के आदेश के कुछ भी नहीं हो सकता। नोट बदलने की प्रक्रिया के तहत अभी समय है। यदि इस बीच शासन से गाइड लाइन आ गई तो ठीक, वरना शासन के संज्ञान में मामला लाया जाएगा। अंत में कोर्ट में पुलिस की ओर से पहल की जाएगी ताकि नोट बदले जा सकें। कोर्ट के आदेश अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- मोहित अग्रवाल, आईजी
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