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यूनिवर्सिटी ने 11 कॉलेजों से मांगा रिकार्ड
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Mon, 04 Jul 2016 08:49 PM IST
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी
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फर्जी एनओसी से मान्यता हासिल करने वाले 29 बीएड कॉलेजों पर गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इनमें से जिन 11 कॉलेजों ने कोर्ट का आदेश यूनिवर्सिटी को रिसीव कराया है, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने निर्णय के लिए उन सभी की संबद्धता का रिकार्ड तलब किया है।
यूनिवर्सिटी ने कॉलेजों की ओर से कोर्ट में रखे गए उस दलील के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की है, जिसमें उन्होंने कहा था कि एनसीटीई के 2014 रेग्यूलेशन एक्ट में एनओसी की बाध्यता रखी गई थी, जबकि उन्होंने 2009 एक्ट के तहत मान्यता के लिए आवेदन किया था। हाईकोर्ट ने इसी दलील पर यूनिवर्सिटी को तीन सप्ताह के भीतर कॉलेजों के पक्ष में निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसी क्रम में यूनिवर्सिटी ने कॉलेजों से रिकार्ड तलब कर सत्यापन की कार्रवाई शुरू की है।
हालांकि इन सब कवायदों के बीच कॉलेजों का बीएड सत्र 2016-18 में प्रवेश लेना मुश्किल है। क्योंकि पूल काउंसिलिंग की प्रक्रिया भी संपन्न होने के कगार पर है। हालांकि कॉलेज प्रबंधन को उम्मीद है कि यदि फैसला पक्ष में आया है तो कोई न कोई रास्ता जरूर निकलेगा।
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यह था मामला
फर्जी एनओसी से मान्यता हासिल करने के आरोप में घिरे 40 कॉलेजों में से एनसीटीई ने 11 को ही दोषी माना था और 29 को दोषमुक्त करार दिया था। मगर यूनिवर्सिटी ने सभी 40 कॉलेजों को दोषी मानते हुए संबद्धता देने से इन्कार कर दिया था। इस फैसले के विरोध में कॉलेजों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी, जिस पर हाईकोर्ट ने 24 जून को कॉलेजों के पक्ष में निर्णय सुनाया।
9 जुलाई तक मांगे दस्तावेज
गोरखपुर विश्वविद्यालय ने 29 कालेजों से संबद्धता संबंधी विभिन्न दस्तावेज मांगे हैं। पिछले दिनों हाईकोर्ट से आए निर्देश के क्रम में विश्वविद्यालय प्रशासन ने नए सिरे से संबद्धता देने की कवायद शुरू की है। इसके तहत कालेजों को पत्र भेजकर 9 जुलाई तक दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है।
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यूनिवर्सिटी ने कॉलेजों की ओर से कोर्ट में रखे गए उस दलील के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की है, जिसमें उन्होंने कहा था कि एनसीटीई के 2014 रेग्यूलेशन एक्ट में एनओसी की बाध्यता रखी गई थी, जबकि उन्होंने 2009 एक्ट के तहत मान्यता के लिए आवेदन किया था। हाईकोर्ट ने इसी दलील पर यूनिवर्सिटी को तीन सप्ताह के भीतर कॉलेजों के पक्ष में निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसी क्रम में यूनिवर्सिटी ने कॉलेजों से रिकार्ड तलब कर सत्यापन की कार्रवाई शुरू की है।
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हालांकि इन सब कवायदों के बीच कॉलेजों का बीएड सत्र 2016-18 में प्रवेश लेना मुश्किल है। क्योंकि पूल काउंसिलिंग की प्रक्रिया भी संपन्न होने के कगार पर है। हालांकि कॉलेज प्रबंधन को उम्मीद है कि यदि फैसला पक्ष में आया है तो कोई न कोई रास्ता जरूर निकलेगा।
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यह था मामला
फर्जी एनओसी से मान्यता हासिल करने के आरोप में घिरे 40 कॉलेजों में से एनसीटीई ने 11 को ही दोषी माना था और 29 को दोषमुक्त करार दिया था। मगर यूनिवर्सिटी ने सभी 40 कॉलेजों को दोषी मानते हुए संबद्धता देने से इन्कार कर दिया था। इस फैसले के विरोध में कॉलेजों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी, जिस पर हाईकोर्ट ने 24 जून को कॉलेजों के पक्ष में निर्णय सुनाया।
9 जुलाई तक मांगे दस्तावेज
गोरखपुर विश्वविद्यालय ने 29 कालेजों से संबद्धता संबंधी विभिन्न दस्तावेज मांगे हैं। पिछले दिनों हाईकोर्ट से आए निर्देश के क्रम में विश्वविद्यालय प्रशासन ने नए सिरे से संबद्धता देने की कवायद शुरू की है। इसके तहत कालेजों को पत्र भेजकर 9 जुलाई तक दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है।