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डिजिटल उड़ान से दे रहे छोटे व्यापारियों को नया आसमान

Thu, 22 Feb 2018 01:27 AM IST
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर।
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Thu, 22 Feb 2018 01:27 AM IST
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Two brothers are promoting the Digital India mission
पकौड़े वाले की बनाई वेबसाइट। - फोटो : Amar Ujala
पीएम मोदी के डिजिटल इंडिया ख्वाब को गोरखपुर के दो भाइयों ने अपनी आंखों में बसा लिया है। ये दोनों युवा पीएम के सपने को अपना बनाकर जीते हुए औरों की जिंदगी संवारने में जुटे हैं। ‘डिजिटल उड़ान’ अभियान के जरिये दोनों भाई शहर के छोटे व्यापारियों को कामयाबी का नया आसमान दे रहे हैं।
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पीएम मोदी के डिजिटल इंडिया नारे ने हो सकता है कि देश में कइयों की जिंदगी बदली हो, लेकिन इन दो शब्दों में 27 वर्षीय राहुल मिश्र और 23 साल के विशाल मिश्र को जिंदगी का मकसद मिल गया। वेबसाइट डिजाइनिंग कंपनी बनाकर स्टार्टअप शुरू करने वाले राहुल और विशाल पर पीएम के नारे का ऐसा असर हुआ कि इन दोनों ने शहर के छोटे व्यापारियों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने की मुहिम छेड़ दी। छह माह के प्रयास में दोनों ने छह रहेड़ी-ठेलेवालों को डिजिटल कर दिया।
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बाबू बनारसी दास कॉलेज, लखनऊ से 2013 में बीटेक (इलेक्ट्रॉनिक्स) और फिर सीडैक नोएडा से 2015 में एमटेक (मोबाइल अप्लीकेशन) करने वाले राहुल मिश्र ने नौकरी की जगह स्टार्टअप को तरजीह दी। एनीमेशन में डिप्लोमाधारी छोटे भाई को साथ लिया और तीन साल पहले कोड्स गेस्चर कंपनी की नींव रखी। शुरुआती दिनों में नोएडा में काम किया। फिर अपने शहर की खातिर कुछ करने का अरमान लिए कंपनी का दफ्तर 2016 में गोरखपुर शिफ्ट कर लिया।
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सब इंस्पेक्टर पिता को बेटों पर नाज
राहुल और विशाल पिता राजेंद्र मिश्र आजमगढ़ में सब इंस्पेक्टर हैं। माता आरती गृहणी हैं। राहुल और विशाल अपने मिशन के पीछे पिता से मिली समाज के लिए कुछ करने की सीख को भी अहम वजह बताते हैं। कहते हैं कि पिता को जब उन्होंने अपने प्रोजेक्ट के बारे में बताया और इसके जरिए एक छोटे व्यापारी के व्यवसाय में आए सकारात्मक बदलाव की जानकारी दी तो उन्होंने दोनों की पीठ थपथपाई। ये हमारे लिए ऐसा इनाम था, जो अनमोल है। 


गुप्ता जी की बनाई वेबसाइट
दोनों भाइयों ने पांच महीने पहले बक्शीपुर में ठेले पर पकौड़ा बेचने वाले दीपक गुप्ता की वेबसाइट बनाई। टीम ने उन्हें मुफ्त बन रही वेबसाइट के फायदे समझाए तो वह इसके लिए किसी तरह राजी हुए थे। पांच माह बाद जब कोड्स गेस्चर की टीम ने दीपक से मुलाकात की तो दीपक ने पूरी टीम की प्रशंसा के साथ में अपने काम में हुई प्रगति के बारे में बताया। वेबसाइट बनने से उनके पास बुकिंग के लिए अक्सर कॉल आ जाती है। इससे काम और मुनाफा दोनों बढ़ा है।

अब तक के काम
- फोटोग्रॉफरों की संस्था क्लिकर्स की वेबसाइट तैयार की
- चित्रकारों को मंच देने के लिए पेंटेकल की वेबसाइट बनाई
- आधा दर्जन रेहड़ीवालों की भी बना चुके हैं वेबसाइट
- डिजिटल उड़ान के तहत दिया ‘बिजनेस नहीं तरीका बदलें’ का नारा
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