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चुनाव तक यात्रियों को झेलनी होगी सांसत
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 08 Feb 2017 01:32 AM IST
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बसों के चुनाव में चले जाने के बाद कचहरी बस स्टैंड पर परेशान यात्री, बसों मे खड़ी सवारियां।
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
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विधानसभा चुनाव तक यात्रियों की दुश्वारियां झेलनी होंगी। 80 से 90 फीसदी रोडवेज बसों को पुलिस ने ले लिया है। मंगलवार को गोरखपुर और बस्ती मंडल से पुलिस महकमे को रोडवेज ने अपनी 291 बसें दीं। इससे दोनों मंडलों में यात्री अपने गंतव्य तक पहुंचने बसों के इंतजार में परेशान होते दिखे।
गोरखपुर और बस्ती मंडल में रोडवेज की 465 बसें हैं। इनमें से 291 मंगलवार को पुलिस महकमे को दे दी गईं। इस तरह से दोनों मंडलों में रोडवेज के पास 174 बसें शेष रह गई हैं। गोरखपुर डिपो की 99 में से 77 और राप्तीनगर डिपो की 67 में से 43 बसें चुनाव में चली गईं। गोरखपुर डिपो के पास 22 और राप्तीनगर डिपो के पास अपनी 24 बसें शेष रह गई हैं। बसों के चुनाव में चले जाने का असर मंगलवार को साफ दिखा। यात्री गोरखपुर, राप्तीनगर सहित अन्य बस स्टेशनों पर बसों के अभाव में इधर-उधर भटकते हुए नजर आए। राप्तीनगर और गोरखपुर डिपो पर स्थिति यह थी कि यात्रियों के सवालों से परेशान जिम्मेदार पूछताछ काउंटर से उठ कर चले गए। कर्मचारियों का कहना है कि जब बसे ही नहीं हैं तो यात्रियों को जवाब देते नहीं बन रहा था।
कंडक्टरों की मौज
ड्राइवर बसों को लेकर चुनाव में चले गए। मगर कंडक्टर चुनाव तक खाली हो गए है। अधिकारियों का कहना है कि कई कंडक्टरों ने छुट्टी की मांग की है, जिसे मंजूर कर दिया जाएगा।
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मंगलवार का पूरा दिन पुलिस महकमे को बस की व्यवस्था कराने में बीत गया। इससे यात्रियों को दिक्कत जरूर हुई। बस्ती और गोरखपुर मंडल 291 बसों को पुलिस को दिया है। हमारी कोशिश है अनुबंधित बसों से यात्रियों की दुश्वारियों को कम किया जाए।
एसके राय, क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज
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गोरखपुर और बस्ती मंडल में रोडवेज की 465 बसें हैं। इनमें से 291 मंगलवार को पुलिस महकमे को दे दी गईं। इस तरह से दोनों मंडलों में रोडवेज के पास 174 बसें शेष रह गई हैं। गोरखपुर डिपो की 99 में से 77 और राप्तीनगर डिपो की 67 में से 43 बसें चुनाव में चली गईं। गोरखपुर डिपो के पास 22 और राप्तीनगर डिपो के पास अपनी 24 बसें शेष रह गई हैं। बसों के चुनाव में चले जाने का असर मंगलवार को साफ दिखा। यात्री गोरखपुर, राप्तीनगर सहित अन्य बस स्टेशनों पर बसों के अभाव में इधर-उधर भटकते हुए नजर आए। राप्तीनगर और गोरखपुर डिपो पर स्थिति यह थी कि यात्रियों के सवालों से परेशान जिम्मेदार पूछताछ काउंटर से उठ कर चले गए। कर्मचारियों का कहना है कि जब बसे ही नहीं हैं तो यात्रियों को जवाब देते नहीं बन रहा था।
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कंडक्टरों की मौज
ड्राइवर बसों को लेकर चुनाव में चले गए। मगर कंडक्टर चुनाव तक खाली हो गए है। अधिकारियों का कहना है कि कई कंडक्टरों ने छुट्टी की मांग की है, जिसे मंजूर कर दिया जाएगा।
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मंगलवार का पूरा दिन पुलिस महकमे को बस की व्यवस्था कराने में बीत गया। इससे यात्रियों को दिक्कत जरूर हुई। बस्ती और गोरखपुर मंडल 291 बसों को पुलिस को दिया है। हमारी कोशिश है अनुबंधित बसों से यात्रियों की दुश्वारियों को कम किया जाए।
एसके राय, क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज