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इस बार देशी परिधान में गोल्ड मेडल लेंगे टॉपर्स
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 15 Dec 2015 01:22 AM IST
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राज्यपाल राम नाइक की मंशा के मुताबिक इस बार के गोरखपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में अंग्रेजियत नहीं दिखेगी। न तो किसी के शरीर पर गाउन होगा और न ही कैप। गाउन की जगह लेगा कुर्ता पायजामा और कैप की जगह लेगा कंधे पर टंगा उत्तरीय। छात्राएं साड़ी या सलवार-कुर्ते में नजर आयेंगी। यहां तक कि विद्वत परिषद भी सूट के साथ कंधे पर उत्तरीय टांगे विद्वत यात्रा में भाग लेगी और मंचासीन होगी। कहने का मतलब यूनिवर्सिटी की ओर से दीक्षांत के माहौल को पूरी तरह देशी करने की तैयारी है।
हालांकि देशी ड्रेस कोड को लेकर मंथन अभी भी चल रहा है। छात्रों के लिए एक दूसरे विकल्प काले पैंट और सफेद शर्ट के साथ कंधे पर उत्तरीय का विचार भी सामने आ रहा है लेकिन कुर्ता-पायजामा पर मुहर लगने की ज्यादा उम्मीद है। जहां तक उत्तरीय के रंग की बात है तो वह अभी तक तय नहीं हो सका है लेकिन इतना तय है कि या तो उसका रंग लाल होगा या फिर पीला। परिधान पर संगठित मंथन के लिए यूनिवर्सिटी बहुत जल्द एक कमेटी गठित करने जा रही है। कमेटी की ओर से लिये गये निर्णय को पहले विद्या परिषद और फिर कार्य परिषद की बैठक में लाकर उसे विधिक मान्यता दी जाएगी।
दरअसल दीक्षांत की वेषभूषा में अंग्रेजियत की बू आने की बात जब सबसे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने उठाई तो लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन समेत तमाम राजनेताओं ने इसे बदले जाने के लिए आवाज उठाई। राज्यपाल राम नाइक को तो यह बात इतनी भायी कि उन्होंने बाकायदा प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में इस बदलाव के लिए निर्देश जारी कर दिया। इसी क्रम में गोरखपुर यूनिवर्सिटी में भी बदलाव की यह बयार बही है।
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‘लोगो’ प्रतियोगिता में प्रतिभाग का आमंत्रण
गोरखपुर। दीक्षांत समारोह का ‘लोगो’ विद्यार्थियों से तय कराने की पिछले साल हुई पहल को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस बार जारी रखा है। दीक्षांत समारोह के अनुश्रवण समिति के संयोजक प्रो. एचएस शुक्ल ने बताया कि बीते वर्ष की तरह इस बार भी विद्यार्थियों से ‘लोगो’ का डिजाइन मांगा गया है। इच्छुक अभ्यर्थी 16 जनवरी तक अपनी डिजाइन डीएसडब्ल्यू कार्यालय में जमा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस बार की प्रतियोगिता में यूनिवर्सिटी के साथ-साथ महाविद्यालयों के विद्यार्थी भी हिस्सा ले सकते हैं।
इस दायरे में बनाना होगा ‘लोगो’
डिजाइन 10x10 इंच के आकार में 10 इंच व्यास वाले गोले में बनाना होगा।
डिजाइन में यूनिवर्सिटी का सूत्र वाक्य ‘आ नो भद्रा: क्रतवो यंतु विश्वत:’ और कुल चिन्ह जरूर हो।
‘लोगो’ में 34वां दीक्षांत समारोह या 34th convocation जरूर लिखा हो
डिजाइन में अधिकतम तीन रंगों का ही इस्तेमाल किया जाय
डिजाइन वाले कागज के पीछे नाम, कक्षा, महाविद्यालय या यूनिवर्सिटी का नाम जरूर लिखा हो
डिजाइन के साथ संस्था के परिचय पत्र की फोटो प्रति भी लगाना होगा।
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हालांकि देशी ड्रेस कोड को लेकर मंथन अभी भी चल रहा है। छात्रों के लिए एक दूसरे विकल्प काले पैंट और सफेद शर्ट के साथ कंधे पर उत्तरीय का विचार भी सामने आ रहा है लेकिन कुर्ता-पायजामा पर मुहर लगने की ज्यादा उम्मीद है। जहां तक उत्तरीय के रंग की बात है तो वह अभी तक तय नहीं हो सका है लेकिन इतना तय है कि या तो उसका रंग लाल होगा या फिर पीला। परिधान पर संगठित मंथन के लिए यूनिवर्सिटी बहुत जल्द एक कमेटी गठित करने जा रही है। कमेटी की ओर से लिये गये निर्णय को पहले विद्या परिषद और फिर कार्य परिषद की बैठक में लाकर उसे विधिक मान्यता दी जाएगी।
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दरअसल दीक्षांत की वेषभूषा में अंग्रेजियत की बू आने की बात जब सबसे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने उठाई तो लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन समेत तमाम राजनेताओं ने इसे बदले जाने के लिए आवाज उठाई। राज्यपाल राम नाइक को तो यह बात इतनी भायी कि उन्होंने बाकायदा प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में इस बदलाव के लिए निर्देश जारी कर दिया। इसी क्रम में गोरखपुर यूनिवर्सिटी में भी बदलाव की यह बयार बही है।
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‘लोगो’ प्रतियोगिता में प्रतिभाग का आमंत्रण
गोरखपुर। दीक्षांत समारोह का ‘लोगो’ विद्यार्थियों से तय कराने की पिछले साल हुई पहल को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस बार जारी रखा है। दीक्षांत समारोह के अनुश्रवण समिति के संयोजक प्रो. एचएस शुक्ल ने बताया कि बीते वर्ष की तरह इस बार भी विद्यार्थियों से ‘लोगो’ का डिजाइन मांगा गया है। इच्छुक अभ्यर्थी 16 जनवरी तक अपनी डिजाइन डीएसडब्ल्यू कार्यालय में जमा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस बार की प्रतियोगिता में यूनिवर्सिटी के साथ-साथ महाविद्यालयों के विद्यार्थी भी हिस्सा ले सकते हैं।
इस दायरे में बनाना होगा ‘लोगो’
डिजाइन 10x10 इंच के आकार में 10 इंच व्यास वाले गोले में बनाना होगा।
डिजाइन में यूनिवर्सिटी का सूत्र वाक्य ‘आ नो भद्रा: क्रतवो यंतु विश्वत:’ और कुल चिन्ह जरूर हो।
‘लोगो’ में 34वां दीक्षांत समारोह या 34th convocation जरूर लिखा हो
डिजाइन में अधिकतम तीन रंगों का ही इस्तेमाल किया जाय
डिजाइन वाले कागज के पीछे नाम, कक्षा, महाविद्यालय या यूनिवर्सिटी का नाम जरूर लिखा हो
डिजाइन के साथ संस्था के परिचय पत्र की फोटो प्रति भी लगाना होगा।