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बलिदानियों के प्रति सम्मान है तिरंगा यात्रा : जावडे़कर
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Tue, 16 Aug 2016 10:17 PM IST
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जिला कारागार स्थित रामप्रसाद बिस्मिल की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने पहुचे कंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडे़कर, महंत आदित्यनाथ, मेयर व अन्य ।
- फोटो : Mahesh Kumar
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स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर ‘जरा याद करो कुर्बानी’ के तहत केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने मंगलवार को मंडलीय कारागार से ‘तिरंगा-यात्रा’ की शुरूआत की। पं. राम प्रसाद बिस्मिल स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस को देश की 125 करोड़ जनता के लिए यादगार बनाने के लिए प्रधानमंत्री ने यह अभियान शुरू किया है, जिससे आने वाली पीढ़ी को शहीदों के त्याग और बलिदान की जानकारी दी जा सके। इस उद्देश्य से हम सभी स्मारकों, बलिदान भूमियों में जाकर श्रद्धा अर्पित करने के साथ ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं शहीद परिवारों को सम्मानित करके गौरवान्वित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस आजादी को अक्षुण्य बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। नौ अगस्त से शुरू हुआ यह अभियान 23 अगस्त तक चलेगा। 23 अगस्त को देश के हजारों स्कूलों और कॉलेजों समेत 700 विश्वविद्यालयों के 27 करोड़ छात्र-छात्राएं एक साथ पूर्वाह्न में सामूहिक राष्ट्रगान करते हुए देश के स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान प्रकट करेगें।
इस मौके पर सांसद आदित्यनाथ ने कहा कि गोरखपुर की धरती त्याग और बलिदान की धरती है। देश की आजादी के लिए 1857 के पूर्व एवं उसके उपरांत भी यह क्षेत्र संघर्षरत रहा। बंधू सिंह, मंगल पांडेय, वीर कुंवर सिंह के साथ इस क्षेत्र के इस क्षेत्र के लोगों ने भी आजादी के लिए बलिदान दिया। सन 1922 की चौरीचौरा की घटना ने तो उस लड़ाई को एक नई दिशा दी थी। वहीं ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में डोहरिया कला में नौ क्रांतिकारियों ने शहादत दी। पं. राम प्रसाद बिस्मिल क्रांतिकारियों के उस महान अभियान का नेतृत्व कर रहे थे, जिसमें काकोरी कांड प्रमुख है।
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उन्होंने बताया कि गोरखपुर में शुरू हुई यह तिरंगा यात्रा विभिन्न महापुरुषों से जुड़े हुए स्थलों से होकर 23 अगस्त को डोहरिया कला में समाप्त होगी। कार्यक्रम में सांसद कमलेश पासवान, विधायक संत प्रसाद, विधायक फतेह बहादुर सिंह, विधायक राजेश त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष जर्नादन तिवारी, महानगर अध्यक्ष राहुल श्रीवास्तव, पूर्व महापौर अंजू चौधरी आदि भाजपाई मौजूद रहे।
- पं. रामलखन शुक्ल के नाती सरोज रंजन शुक्ल (गोला थाने पर तिरंगा फहराया था। साढे़ चार वर्ष जेल में रहे। उनके पूरे परिवार को जला दिया गया था)
- अक्षयवर सिंह के नाती अंबरीश मल्ल (पूर्वी उप्र के विभिन्न स्वतंत्रता आंदोलनों का नेतृत्व किया)
- राम बचन त्रिपाठी के पुत्र राजेश कुमार त्रिपाठी
- राम नरेश लाल के पुत्र बसंत कुमार श्रीवास्तव
- महिपत सिंह के सुपुत्र जय प्रकाश सिंह
- जगजीवन प्रसाद की पत्नी फूलमती देवी
- कारगिल शहीद शिव सिंह क्षेत्री, उनके पिता गोपाल सिंह
- शहीद भीम सिंह के पिता राम प्रीत सिंह
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उन्होंने कहा कि इस आजादी को अक्षुण्य बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। नौ अगस्त से शुरू हुआ यह अभियान 23 अगस्त तक चलेगा। 23 अगस्त को देश के हजारों स्कूलों और कॉलेजों समेत 700 विश्वविद्यालयों के 27 करोड़ छात्र-छात्राएं एक साथ पूर्वाह्न में सामूहिक राष्ट्रगान करते हुए देश के स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान प्रकट करेगें।
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इस मौके पर सांसद आदित्यनाथ ने कहा कि गोरखपुर की धरती त्याग और बलिदान की धरती है। देश की आजादी के लिए 1857 के पूर्व एवं उसके उपरांत भी यह क्षेत्र संघर्षरत रहा। बंधू सिंह, मंगल पांडेय, वीर कुंवर सिंह के साथ इस क्षेत्र के इस क्षेत्र के लोगों ने भी आजादी के लिए बलिदान दिया। सन 1922 की चौरीचौरा की घटना ने तो उस लड़ाई को एक नई दिशा दी थी। वहीं ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में डोहरिया कला में नौ क्रांतिकारियों ने शहादत दी। पं. राम प्रसाद बिस्मिल क्रांतिकारियों के उस महान अभियान का नेतृत्व कर रहे थे, जिसमें काकोरी कांड प्रमुख है।
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उन्होंने बताया कि गोरखपुर में शुरू हुई यह तिरंगा यात्रा विभिन्न महापुरुषों से जुड़े हुए स्थलों से होकर 23 अगस्त को डोहरिया कला में समाप्त होगी। कार्यक्रम में सांसद कमलेश पासवान, विधायक संत प्रसाद, विधायक फतेह बहादुर सिंह, विधायक राजेश त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष जर्नादन तिवारी, महानगर अध्यक्ष राहुल श्रीवास्तव, पूर्व महापौर अंजू चौधरी आदि भाजपाई मौजूद रहे।
इन शहीदों के परिवार वाले हुए सम्मानित
- स्वतंत्रता सेनानी द्वारिका प्रसाद पांडेय के पुत्र ओम प्रकाश पांडेय (चौरी-चौरा आंदोनल में प्रमुख भूमिका)- पं. रामलखन शुक्ल के नाती सरोज रंजन शुक्ल (गोला थाने पर तिरंगा फहराया था। साढे़ चार वर्ष जेल में रहे। उनके पूरे परिवार को जला दिया गया था)
- अक्षयवर सिंह के नाती अंबरीश मल्ल (पूर्वी उप्र के विभिन्न स्वतंत्रता आंदोलनों का नेतृत्व किया)
- राम बचन त्रिपाठी के पुत्र राजेश कुमार त्रिपाठी
- राम नरेश लाल के पुत्र बसंत कुमार श्रीवास्तव
- महिपत सिंह के सुपुत्र जय प्रकाश सिंह
- जगजीवन प्रसाद की पत्नी फूलमती देवी
- कारगिल शहीद शिव सिंह क्षेत्री, उनके पिता गोपाल सिंह
- शहीद भीम सिंह के पिता राम प्रीत सिंह