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साक्षी की उपलब्धि से बदलेगी सोच
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Thu, 18 Aug 2016 08:54 PM IST
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चेतना तिराहे पर रियो ओलंपिक में साक्षी के कांस्य पदक जीतने पर खुशी मनाते मार्शल आर्ट के खिलाड़ी।
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
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रियो ओलंपिक में पदक जीतकर साक्षी ने महिला पहलवानों में जोश भर दिया है। आलम यह है कि शहर की महिला पहलवान साक्षी को आदर्श मानने लगी हैं और उम्मीद जता रही हैं कि महिलाओं को कुश्ती में न भेजने वाले घर वालों की सोच साक्षी की इस उपलब्धि से बदल जाएगी। वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में अभी पांच महिला पहलवान प्रेक्टिस कर रही हैं। साक्षी के पदक जीतते ही ये खुशी से झूम उठीं। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में इन महिला पहलवानों ने अपनी बात रखी।
बदलेगी लोगों की सोच
साक्षी का ओलंपिक में पदक जीतने से सबसे बड़ा बदलाव उन लोगों की सोच पर होगा, जो अपने घर की लड़कियों को कुश्ती प्रतियोगिता में भेजने से डरते है। साक्षी ने हम जैसी महिला पहलवानों में जोश भर दिया है।
- नेहा रानी, गाजीपुर
एक रास्ता मिल गया
कुश्ती का खेल रुचि होने पर चुना था, लेकिन अब तक मंजिल क्या है इसे लेकर हमेशा सोचती रहती थी। लेकिन साक्षी का ओलंपिक में पदक जीतने के बाद एक रास्ता मिल गया है कि अब कुछ कर गुजरना है।
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-आरती निषाद, सुल्तानपुर
लड़कियां हैं लड़कों से आगे
रियो में पदक का सूखा खत्म करने में साक्षी की उपलब्धि कई मायने में खास है। एक तरफ जहां यह साबित हो गया कि लड़कियां कुश्ती में भी लड़कों से आगे हैं, वहीं हर लड़की अब साक्षी की तरह बनना चाहेगी।
-शकुंतला निषाद, सुल्तानपुर
उत्साह तो बढ़ा ही जोश भी आ गया
रियो में साक्षी ने उन जैसी देश की अन्य युवा महिला पहलवानों का जहां उत्साह बढ़ाया है वहीं उनमें जोश भी भर दिया है। साक्षी भारत के लिए पदक जीत सकती हैं तो इस देश की हर बेटी वह करिश्मा कर सकती है।
-खुशी परिहार, मथुरा
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बदलेगी लोगों की सोच
साक्षी का ओलंपिक में पदक जीतने से सबसे बड़ा बदलाव उन लोगों की सोच पर होगा, जो अपने घर की लड़कियों को कुश्ती प्रतियोगिता में भेजने से डरते है। साक्षी ने हम जैसी महिला पहलवानों में जोश भर दिया है।
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- नेहा रानी, गाजीपुर
एक रास्ता मिल गया
कुश्ती का खेल रुचि होने पर चुना था, लेकिन अब तक मंजिल क्या है इसे लेकर हमेशा सोचती रहती थी। लेकिन साक्षी का ओलंपिक में पदक जीतने के बाद एक रास्ता मिल गया है कि अब कुछ कर गुजरना है।
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-आरती निषाद, सुल्तानपुर
लड़कियां हैं लड़कों से आगे
रियो में पदक का सूखा खत्म करने में साक्षी की उपलब्धि कई मायने में खास है। एक तरफ जहां यह साबित हो गया कि लड़कियां कुश्ती में भी लड़कों से आगे हैं, वहीं हर लड़की अब साक्षी की तरह बनना चाहेगी।
-शकुंतला निषाद, सुल्तानपुर
उत्साह तो बढ़ा ही जोश भी आ गया
रियो में साक्षी ने उन जैसी देश की अन्य युवा महिला पहलवानों का जहां उत्साह बढ़ाया है वहीं उनमें जोश भी भर दिया है। साक्षी भारत के लिए पदक जीत सकती हैं तो इस देश की हर बेटी वह करिश्मा कर सकती है।
-खुशी परिहार, मथुरा