फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   there are changes in new circle rate due to aiims and fertilizer factory

शहर के नए सर्किल रेट में फिर बदलाव की तैयारी

Sat, 16 Jul 2016 01:03 AM IST
अरुण चन्द, अमर उजाला, गोरखपुर।
अरुण चन्द, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Sat, 16 Jul 2016 01:03 AM IST
विज्ञापन
there are changes in new circle rate due to aiims and fertilizer factory
गन्ना शोध संस्थान - फोटो : amar ujala
वजूद में आने से पहले ही एम्स और खाद कारखाने का शहर के बदलाव और विकास पर असर दिखाई पड़ने लगा है। 22 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे में इन दोनों ही योजनाओं के शिलान्यास ने शहर के नए सर्किल रेट के प्रस्ताव में भी बदलाव की जरूरत पैदा कर दी है। यानी एम्स और खाद कारखाना कई इलाकों के सर्किल रेट का भविष्य तय करेंगे। रजिस्ट्री महकमा भी इसकी तैयारी में जुट गया है।
विज्ञापन


एक अगस्त से लागू होने वाले नए सर्किल रेट के  लिए प्रस्ताव बनकर तैयार हो गया है। आपत्ति मांगी जानी ही बाकी है, मगर रजिस्ट्री महकमा अब इस प्रस्ताव का दोबारा सर्वे कर बदलाव करने जा रहा है। इससे एम्स और फर्टिलाइजर के करीब एक किलोमीटर के दायरे में आने वाले इलाकों में जमीन, मकान और दुकानों के सर्किल रेट में वृद्धि होने की पूरी उम्मीद है। महकमे का कहना है कि दोनों ही योजनाओं की शुरुआत के साथ ही आसपास के करीब एक किलोमीटर के दायरे में होटल, धर्मशाला, लॉज, मेडिकल स्टोर, पैथालॉजी विकसित होना तय है। ऐसे में प्रापर्टी डीलरों की इस क्षेत्र में आमद बढ़ेगी। पूर्व में एम्स के लिए खुटहन में प्रस्तावित जमीन के आसपास अचानक बढ़ी जमीन की खरीद-फरोख्त इसकी तस्दीक करती है।
विज्ञापन


बता दें कि सहजनवां-जंगल कौड़िया बाईपास और गोरखपुर वाराणसी फोरलेन के  निर्माण की कवायद शुरू होने को ध्यान में रखते हुए रजिस्ट्री महकमे ने नए सर्किल रेट के सर्वे में उस क्षेत्र की जमीन के दाम बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


वहीं एम्स की प्रस्तावित जमीन में बदलाव की वजह से खुटहन में बड़ी संख्या में प्रापर्टी डीलर चित हो गए हैं। एम्स के लिए गन्ना शोध संस्थान की जमीन फाइनल होने के पहले खुटहन की जमीन पर ही एम्स बनने की कवायद शुरू हुई थी। जैसे ही केंद्रीय टीम ने वहां की जमीन का मुआयना किया, प्रापर्टी डीलरों की उस क्षेत्र में बाढ़ आ गई। स्थानीय के  साथ ही लखनऊ और नोएडा तक की पार्टियों ने खुटहन एवं उसके आसपास की जमीन में निवेश शुरू कर दिया। कानूनी अड़चनों की वजह से जैसे ही खुटहन की प्रस्तावित जमीन रद्द कर गन्ना शोध संस्थान की जमीन को एम्स के लिए पीएमओ की रजामंदी मिली, उस क्षेत्र के ये तमाम प्रापर्टी डीलर औंधे मुंह गिर गए। 

सभी तहसीलों के रजिस्ट्री दफ्तर से प्रस्ताव आ गए हैं। इसमें देखा जाएगा कि फर्टिलाइजर और एम्स को ध्यान में रखकर रेट प्रस्तावित किए गए हैं या नहीं। अगर ऐसा नहीं होगा तो प्रस्ताव में बदलाव किया जाएगा क्योंकि एम्स और फर्टिलाइजर के कम से कम एक किलोमीटर के दायरे में तेजी से जमीन-मकान की खरीद फरोख्त शुरू होगी, ऐसे में वहां के  सर्किल रेट में बदलाव जरूरी है। 
- रामशंकर सिंह, एआईजी स्टांप    

खुटहन की जमीन पर भी सरकार के पक्ष में फैसला

एम्स के लिए पूर्व में प्रस्तावित खुटहन की जमीन के मामले में भी राज्य सरकार के पक्ष में ही फैसला आया है। डीएम ओएन सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि इस मामले में हाईकोर्ट में केस चल रहा था। सुनवाई होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था। शुक्रवार को कोर्ट ने इस मामले में सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया।

बता दें कि सबसे पहले राज्य सकरार ने एम्स के लिए केंद्र को सदर तहसील के खुटहन की करीब 235 एकड़ जमीन का प्रस्ताव भेजा था। केंद्रीय टीम ने इस जमीन का मुआयना भी किया। टीम की रिपोर्ट पर खुटहन को जोड़ने के लिए फोरलेन सड़क की जरूरत बताई। केंद्र सरकार के निर्देश पर राज्य सरकार ने इसके लिए रजामंदी देते हुए फंड भी स्वीकृत कर दिया, मगर इसी बीच राधा रमण दास ने इस जमीन पर अपनी दावेदारी पेश कर दी। उनका आरोप था कि उनकी जमीन के दस्तावेजों से जबरन उनका नाम काटकर वन विभाग का नाम दर्ज कर दिया गया है। उन्होंने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में रिट दायर की थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था।


लंबे समय तक यह कानूनी पेंच नहीं सुलझा तो केंद्र ने खुटहन में एम्स बनाने का अपना इरादा बदल दिया और नई जमीन की तलाश शुरू हो गई। हाल ही में एम्स के लिए महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर दो में स्थित गन्ना शोध संस्थान की 112 एकड़ जमीन को उपयुक्त मानते हुए केंद्र ने वहां निर्माण को लेकर अपनी रजामंदी भी दे दी। उधर, शुक्रवार को खुटहन की जमीन के मामले में भी राज्य सरकार के पक्ष में फैसला आ गया। हालांकि अभी राधा रमण दास के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का भी मौका है, मगर प्रशासन का कहना है कि उन्हें वहां से भी राहत नहीं मिलेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed