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नदियाें का जलस्तर थमा, प्रभावित गांवों की संख्या बढ़ी
अमर उजाला ब्यूरो/गोरखपुर।
Updated Mon, 01 Aug 2016 10:09 PM IST
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बंधे का निरीक्षण करते सदर सांसद आदित्य नाथ व अन्य।
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
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सोमवार की शाम तक राप्ती और घाघरा का जलस्तर स्थिर हो गया। वहीं रोहिन और कुआनों का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। बावजूद इसके बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सोमवार को 78 गांव बाढ़ से प्रभावित हो गए जबकि शासन की नजर में 25 गांव पूरी तरह से जलमग्न हैं। वहीं दूसरी ओर जिले की पीएसी और यहां पर कैंप कर रही एनडीआरएफ की पूरी टीम दूसरे जनपद को भेज दी गई है।
गोरखपुर की 26 वी वाहिनी पीएसी को श्रावस्ती और एनडीआरएफ की बटालियन को नौगढ़ और शोहरतगढ़ भेजा गया। दोनों फोर्स के अपनी मोटरबोट भी साथ लेकर गईं। जिले के छह तहसीलों में बाढ़ का असर है। करीब 78 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं जबकि 25 पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं। ऐसे में कोई आकस्मिक घटना पर बचाव के लिए कोई ठोस उपाय नहीं है।
हालांकि प्रशासन का दावा है कि यहां पर सब ठीक है। जबकि कैंपियरगंज में डूबे युवक की तलाश में एनडीआरएफ के पांच गोताखोरों को बुलाना पड़ा था। वैसे प्रशासन का कहना है कि प्रभावित गांवों में 85 नावें भेजी गईं हैं। हर जगह स्थिति सामान्य है। सभी तहसीलों में अधिकारी और कर्मचारी बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर रहे हैं।
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नदियों का जलस्तर
घाघरा बरहज 67.100 सामान्य
राप्ती बर्डघाट 75.255 स्थिर
रोहिन तिनमुहानी 82.620 घटाव
कुआनो चंद्रदीप घाट 88.680 घटाव
राप्ती नदी पर बने बढ़या कोठा, मोहम्मदपुर माफी, डोमिनगढ़ तटबंध का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने कहा कि तीन वर्ष से बाढ़ से बचाव के कोई ठोस उपाय नहीं किए गए। तटबंधों पर बने बड़े-बड़े रेन कट, रैट होल नदी में अधिक पानी आने पर तबाही का कारण बन सकते हैं। उतरा सोत, टिकरिया, मझगांवा, गोविंदपुर जगतबेला, मंझरियां आदि गांवों के सामने खतरा मंडरा रहा है। इन गांवों के सामने तटबंधों पर कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड के अधिकारी खानापूरी कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तटबंध कटा और जन-धन की हानि हुई तो जिम्मेदार लोगों को उसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
इसके अलावा आदित्यनाथ ने बरहुआ बांध का निरीक्षण किया और कहा कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सांसद ने जिलाधिकारी से वार्ता कर बाढ़ से बचाव के पुख्ता इंतजाम करने को कहा। सांसद के साथ बृजेश यादव, गोरख सिंह, बृजभूषण मिश्रा, राजाराम निषाद, राम लखन यादव, उमेश चंद्र निषाद, महेश चंद साहनी, शिवसागर निषाद, रमाकांत गुप्ता, सुधीर निषाद, नरसिंह आदि मौजूद थे।
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गोरखपुर की 26 वी वाहिनी पीएसी को श्रावस्ती और एनडीआरएफ की बटालियन को नौगढ़ और शोहरतगढ़ भेजा गया। दोनों फोर्स के अपनी मोटरबोट भी साथ लेकर गईं। जिले के छह तहसीलों में बाढ़ का असर है। करीब 78 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं जबकि 25 पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं। ऐसे में कोई आकस्मिक घटना पर बचाव के लिए कोई ठोस उपाय नहीं है।
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हालांकि प्रशासन का दावा है कि यहां पर सब ठीक है। जबकि कैंपियरगंज में डूबे युवक की तलाश में एनडीआरएफ के पांच गोताखोरों को बुलाना पड़ा था। वैसे प्रशासन का कहना है कि प्रभावित गांवों में 85 नावें भेजी गईं हैं। हर जगह स्थिति सामान्य है। सभी तहसीलों में अधिकारी और कर्मचारी बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर रहे हैं।
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नदियों का जलस्तर
घाघरा बरहज 67.100 सामान्य
राप्ती बर्डघाट 75.255 स्थिर
रोहिन तिनमुहानी 82.620 घटाव
कुआनो चंद्रदीप घाट 88.680 घटाव
बाढ़ से बचाव के प्रति शासन बेपरवाह : आदित्यनाथ
महंत आदित्यनाथ ने सोमवार को कैंपियरगंज विधानसभा क्षेत्र में राप्ती नदी के किनारे बने तटबंधों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि बाढ़ से बचाव के प्रति प्रदेश सरकार पूरी तरह से लापरवाह है। तटबंधों पर बने बड़े-बड़े रेन कट और रैट होल से बरसात और बाढ़ में भारी तबाही हो सकती है।राप्ती नदी पर बने बढ़या कोठा, मोहम्मदपुर माफी, डोमिनगढ़ तटबंध का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने कहा कि तीन वर्ष से बाढ़ से बचाव के कोई ठोस उपाय नहीं किए गए। तटबंधों पर बने बड़े-बड़े रेन कट, रैट होल नदी में अधिक पानी आने पर तबाही का कारण बन सकते हैं। उतरा सोत, टिकरिया, मझगांवा, गोविंदपुर जगतबेला, मंझरियां आदि गांवों के सामने खतरा मंडरा रहा है। इन गांवों के सामने तटबंधों पर कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड के अधिकारी खानापूरी कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तटबंध कटा और जन-धन की हानि हुई तो जिम्मेदार लोगों को उसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
इसके अलावा आदित्यनाथ ने बरहुआ बांध का निरीक्षण किया और कहा कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सांसद ने जिलाधिकारी से वार्ता कर बाढ़ से बचाव के पुख्ता इंतजाम करने को कहा। सांसद के साथ बृजेश यादव, गोरख सिंह, बृजभूषण मिश्रा, राजाराम निषाद, राम लखन यादव, उमेश चंद्र निषाद, महेश चंद साहनी, शिवसागर निषाद, रमाकांत गुप्ता, सुधीर निषाद, नरसिंह आदि मौजूद थे।