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ईरानी नक्काशी के ताजिए से मनाया जाएगा मोहर्रम
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ईरानी नक्काशी के ताजिए से मनाया जाएगा मोहर्रम
आकर्षण का केंद्र होगा बड़े इमामबाड़े का 25 फीट ऊंचाई वाला ताजिया
ढाई हजार ताजिए बनकर तैयार, मोहर्रम की नौवीं रात चौक पर ताजिए रखे जाएंगे
रबीन्द्र कुमार गुप्ता/जामिन रिजवी
डुमरियागंज। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मोहर्रम मनाया जाता है। इसकी तैयारियों में हल्लौर गांव में कारीगर शिद्दत से जुट गए हैं। शिया बहुल गांव हल्लौर में मोहर्रम की नौंवी रात में चौक पर ताजियों को रखा जाएगा। इस बार ईरानी नक्काशी के ताजिए से मोहर्रम मनाया जाएगा। वहीं, मुख्य आकर्षण का केंद्र इमामबाड़ा वक्फ शाह आलमगीर (बड़ा इमामबाड़ा) में रखा जाने वाला तहसील क्षेत्र का सबसे बड़ा ताजिया होगा जिसकी ऊंचाई 25 फीट होगी।
ताजिए को बनाने में जुटे वजीर हैदर ने बताया कि बड़े ताजिए में चार खंड होते हैं। इसमें सबसे निचले खंड को बाहरी, दूसरे खंड को अठवास और तीसरे खंड को चौरस और सबसे ऊपरी हिस्से पर गुंबद होता है। सबसे कठिन काम गुंबद और अठवास बनाना होता है। बताया कि इस बार भी बड़ा इमामबाड़ा का ताजिया ईरान में बन रहे ताजिए की तर्ज पर बनाया जा रहा है जिसमें कुरान की आयतों को भी स्थान दिया जाता है। बताया कि इसके आकार में बदलाव नहीं किया जाता है। यह कई सालों से इसी तरह से बनता है। ताजिया बनाने वाले नम्मू, संजू, बदलू, बेमिसाल, गुलाम मेंहदी, एहतशाम, शहरयार आदि कारीगरों ने बताया कि ताजिया बनाने में बांस, अबरक, रंगीन कागज, दफ्ती आदि प्रयोग किया जाता है। एक ताजिए में कम से कम आधा दर्जन कारीगरों की मदद ली जाती है। ताजियों में ईरानी नक्काशी की झलक दिखाई देती है। बताया कि करीब पांच हजार ताजिए हल्लौर कस्बे के लिए बनाए जाएंगे। वहीं, ढाई हजार ताजिए बनाने के ऑर्डर मिले हैं जिसे लगभग तैयार कर लिया गया है।
दिल्ली, मुंबई, लखनऊ तक जाएंगे हल्लौर में बने ताजिए
हल्लौर में बनने वाले छोटे-बड़े ताजियों को गांव में नौवीं मोहर्रम की रात में चौक पर रखने के साथ-साथ बस्ती, गोरखपुर, लखनऊ, मुंबई, कानपुर, दिल्ली, बलरामपुर आदि शहरों में भी ले जाया जाता है। साथ ही यहां के कुछ कारीगर मुंबई, दिल्ली में जाकर भी ताजिया का निर्माण करते हैं। हल्लौर कस्बा लखनऊ के बाद शिया समुदाय का प्रमुख स्थान है।
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हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत करती है ताजियादारी
ताजियादारी में हल्लौर सहित पूरे डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोग एक साथ मिलकर मोहर्रम पर ताजिया रखकर नौहा मातम व मर्सिया मजलिस आयोजित कर इमाम हुसैन को श्रद्धांजलि देते हैं और आपसी सौहार्द्र को मजबूती प्रदान करते हैं जिसकी चर्चा सूबे में ही नहीं बल्कि पूरे मुल्क में होती है।
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आकर्षण का केंद्र होगा बड़े इमामबाड़े का 25 फीट ऊंचाई वाला ताजिया
ढाई हजार ताजिए बनकर तैयार, मोहर्रम की नौवीं रात चौक पर ताजिए रखे जाएंगे
रबीन्द्र कुमार गुप्ता/जामिन रिजवी
डुमरियागंज। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मोहर्रम मनाया जाता है। इसकी तैयारियों में हल्लौर गांव में कारीगर शिद्दत से जुट गए हैं। शिया बहुल गांव हल्लौर में मोहर्रम की नौंवी रात में चौक पर ताजियों को रखा जाएगा। इस बार ईरानी नक्काशी के ताजिए से मोहर्रम मनाया जाएगा। वहीं, मुख्य आकर्षण का केंद्र इमामबाड़ा वक्फ शाह आलमगीर (बड़ा इमामबाड़ा) में रखा जाने वाला तहसील क्षेत्र का सबसे बड़ा ताजिया होगा जिसकी ऊंचाई 25 फीट होगी।
ताजिए को बनाने में जुटे वजीर हैदर ने बताया कि बड़े ताजिए में चार खंड होते हैं। इसमें सबसे निचले खंड को बाहरी, दूसरे खंड को अठवास और तीसरे खंड को चौरस और सबसे ऊपरी हिस्से पर गुंबद होता है। सबसे कठिन काम गुंबद और अठवास बनाना होता है। बताया कि इस बार भी बड़ा इमामबाड़ा का ताजिया ईरान में बन रहे ताजिए की तर्ज पर बनाया जा रहा है जिसमें कुरान की आयतों को भी स्थान दिया जाता है। बताया कि इसके आकार में बदलाव नहीं किया जाता है। यह कई सालों से इसी तरह से बनता है। ताजिया बनाने वाले नम्मू, संजू, बदलू, बेमिसाल, गुलाम मेंहदी, एहतशाम, शहरयार आदि कारीगरों ने बताया कि ताजिया बनाने में बांस, अबरक, रंगीन कागज, दफ्ती आदि प्रयोग किया जाता है। एक ताजिए में कम से कम आधा दर्जन कारीगरों की मदद ली जाती है। ताजियों में ईरानी नक्काशी की झलक दिखाई देती है। बताया कि करीब पांच हजार ताजिए हल्लौर कस्बे के लिए बनाए जाएंगे। वहीं, ढाई हजार ताजिए बनाने के ऑर्डर मिले हैं जिसे लगभग तैयार कर लिया गया है।
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दिल्ली, मुंबई, लखनऊ तक जाएंगे हल्लौर में बने ताजिए
हल्लौर में बनने वाले छोटे-बड़े ताजियों को गांव में नौवीं मोहर्रम की रात में चौक पर रखने के साथ-साथ बस्ती, गोरखपुर, लखनऊ, मुंबई, कानपुर, दिल्ली, बलरामपुर आदि शहरों में भी ले जाया जाता है। साथ ही यहां के कुछ कारीगर मुंबई, दिल्ली में जाकर भी ताजिया का निर्माण करते हैं। हल्लौर कस्बा लखनऊ के बाद शिया समुदाय का प्रमुख स्थान है।
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हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत करती है ताजियादारी
ताजियादारी में हल्लौर सहित पूरे डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोग एक साथ मिलकर मोहर्रम पर ताजिया रखकर नौहा मातम व मर्सिया मजलिस आयोजित कर इमाम हुसैन को श्रद्धांजलि देते हैं और आपसी सौहार्द्र को मजबूती प्रदान करते हैं जिसकी चर्चा सूबे में ही नहीं बल्कि पूरे मुल्क में होती है।