बंद रहे निजी अस्पताल, डॉक्टरों ने नहीं किया काम

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Wed, 07 Jun 2017 01:50 AM IST
आईएमए के आह्वान पर निजी चिकित्सकों ने क्लीनिक बंद रखे।
आईएमए के आह्वान पर निजी चिकित्सकों ने क्लीनिक बंद रखे। - फोटो : Amar Ujala
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निजी अस्पताल मंगलवार को बंद रहे। निजी चिकित्सक मांगों को लेकर हड़ताल पर थे। इस दौरान ओपीडी समेत इनडोर सेवाएं ठप रहीं। मरीजों को दिक्कत न हो इसके लिए आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) ने राष्ट्रव्यापी बंद की पूर्व सूचना देते हुए मरीजों को सरकारी अस्पतालों में जाने का सुझाव दिया था। आईएमए के राष्ट्रीय नेतृत्व ने मंगलवार को निजी चिकित्सकों से अस्पताल एवं क्लिनिक बंद रखने की अपील की थी। मंगलवार को आईएमए के स्थानीय पदाधिकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में सीतापुर आई हॉस्पिटल में सभा की। इसमें संघ की मांगों को चिकित्सकों के हित में बताते हुए डॉक्टरों ने आंदोलन को समर्थन दिया।
आईएमए के संयुक्त सचिव डॉ. आरपी त्रिपाठी एवं राज्य कार्यकारिणी सदस्य डॉ. डीके सिंह ने ‘दिल्ली चलो’ अभियान की प्रमुख मांगों पर चर्चा की। कहा कि कुछ महीनों से चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों पर हमले की कई घटनाएं हुईं। इनमें कुछ डॉक्टरों की मौत भी हुई, जबकि 18 राज्यों में मेडिकल प्रोटेक्टशन एक्ट लागू है। छोटी लिपिकीय त्रुटियों पर भी डॉक्टरों को दंड दिया जा रहा है। चिकित्सक गंभीर मरीजों को देखने में भय महसूस करने लगे हैं। सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं का घोर अभाव है और सरकार सुविधाएं दुरुस्त करने की जगह क्लिनिकल स्टेबलिशमेंट एक्ट के जरिए सारा बोझ निजी क्षेत्र पर डालना चाहती है। इसका आईएमए विरोध कर रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र और चिकित्सकों के हित से जुड़े इन मुद्दों पर आईएमए के संघर्ष को व्यापक समर्थन मिला है।

सभा को डॉ. वीएन अग्रवाल, डॉ. प्रमोद अग्रहरि, डॉ. छापड़िया और डॉ. अश्विनी अग्रवाल ने भी संबोधित किया। संचालन स्थानीय शाखा के सचिव डॉ. शशांक कुमार ने किया। इस दौरान डॉ. आरएन सिंह, डॉ. एससी कौशिक, डॉ. आरएस गोयल, डॉ. इमरान अख्तर, डॉ. डीके सिंह, डॉ. आरए अग्रवाल, डॉ. महेंद्र हरबोला आदि करीब 250 सदस्य मौजूद रहे।

दिल्ली पहुंचकर प्रदर्शन में हुए शामिल
गोरखपुर से भी पदाधिकारी आईएमए के प्रदर्शन में शामिल होने गए। स्थानीय शाखा के अध्यक्ष डॉ. बीबी गुप्ता के नेतृत्व में डॉ. अशोक यादव, डॉ. सोम, डॉ. आरपी शुक्ल, डॉ. नीरज कुमार समेत 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली के राजघाट पर हुए विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। डॉ. बीबी गुप्ता ने बताया कि राजघाट पर जमा होने के बाद डॉक्टरों ने इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम तक मार्च निकाला। इसमें देश भर से आए 10 हजार से ज्यादा चिकित्सक शामिल थे।

बंद के बाद भी सरकारी अस्पताल में भीड़ कम
निजी अस्पतालों में बंद के बाद भी सरकारी अस्पतालों में भीड़ कम रही। इसकी अहम वजह बारिश रही। इसके चलते मंगलवार को जिला अस्पताल की ओपीडी भी हल्की रही। आम तौर पर सोमवार और मंगलवार को 2200 से 2500 तक मरीज पहुंचते हैं, लेकिन हड़ताल के बाद भी मंगलवार को 1259 मरीज ही ओपीडी में पहुंचे। वहीं हड़ताल को देखते हुए जिला अस्पताल ने पहले से तैयारी कर रखी थी। व्यवस्था यह भी थी कि अगर भीड़ ज्यादा रही तो डेढ़ बजे के बाद भी पर्ची बनाकर इलाज होगा।

ये हैं मांगें
1- केंद्रीय स्तर पर चिकित्सकों, चिकित्सा सहकर्मियों एवं चिकित्सक संस्थानों पर हिंसा व उपद्रव में निरुद्ध कठोर कानून बने।
2- मेडिकल छात्रों पर ‘नेशनल एक्लिट टेस्ट’ के प्रस्ताव को खारिज करें।
3- डॉक्टरों एवं क्लीनिक का पंजीकरण एकल विंडो से हो।
4- डॉक्टरों को दवाएं लिखने की स्वतंत्रता बनी रहे। इसमें सरकारी हस्तक्षेप न हो। 
5- एलोपैथिक दवाओं को लिखने का अधिकार सिर्फ एलोपैथिक चिकित्सकों तक सीमित रहे।
6- स्वास्थ्य क्षेत्र का बजट वर्तमान जीडीपी में एक प्रतिशत से बढ़ाकर ढाई फीसदी किया जाए।
7- झोलाछाप चिकित्सकों पर पूर्ण प्रतिबंध लगे।

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