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काम पर लौटे डॉक्टर, मरीजों को राहत
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Fri, 03 Jun 2016 12:46 AM IST
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हड़ताल के मद्देनजर गुरुवार को मेडिकल कॉलेज में पीएसी भी तैनात की गई।
- फोटो : amar ujala
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चार दिनों से हड़ताल पर चल रहे जूनियर डॉक्टर बृहस्पतिवार की दोपहर काम पर लौट गए। डॉक्टरों की हड़ताल खत्म होने की वजह पर कोई जिम्मेदार खुलकर तो कुछ नहीं बोल रहा, मगर सूत्रों का कहना है कि हाईकोर्ट के इस मामले को संज्ञान में लेने के बाद डॉक्टर काम पर लौट आए और मरीजों का इलाज शुरू हो गया।
पीजी सीटाें में पीएमएस संवर्ग के डॉक्टरों को वरीयता देने के विरोध में सोमवार की देर शाम जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। इमरजेंसी और ओपीडी ठप कर देने से मरीजों की सांसत बढ़ गई थी। प्रदेश में चल रही हड़ताल को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने बृहस्पतिवार को इस मामले में की गई कार्रवाई का ब्योरा मांग लिया।
कोर्ट ने पूछा है कि यदि जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर गए हैं तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? अब तक हुई मौतों के मामले में भी हुई कार्रवाई का ब्यौरा और गैरहाजिर डॉक्टरों की सूची भी कोर्ट ने मांगी है। पत्र आते ही प्राचार्य ने सभी विभागाध्यक्षों की बैठक बुला ली और सूची तैयार होने लगी। इसकी जानकारी होते ही डॉक्टर काम पर लौट आए।
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बृहस्पतिवार की सुबह ओपीडी सामान्य तरीके से चली। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को देखते हुए इस दिन मेडिकल कॉलेज में पीएसी के जवान तैनात कर दिए गए थे। जैसे ही सुबह पर्ची काउंटर बंद कराने का प्रयास किया गया, जवान सामने आ गए। इसके बाद सीनियर डॉक्टरों ने भी जूनियर के समर्थन में काली पट्टी बांधकर मरीजों का इलाज किया। दोपहर बाद मरीजों की भर्ती शुरू हो जाने से बड़ी राहत मिली।
हाईकोर्ट ने हड़ताल पर जाने वाले जूनियर डॉक्टरों की सूची मांगी है। इस दौरान हुई मौतों का भी ब्योरा मांगा गया है। पत्र आने के बाद विभागाध्यक्षों को बुलाने के साथ ही जूनियर डॉक्टरों को बुलाया गया और उन्हें भी इसकी जानकारी दी गई जिसके बाद उन्होंने हड़ताल खत्म कर दी।
- प्रो. राजीव मिश्रा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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पीजी सीटाें में पीएमएस संवर्ग के डॉक्टरों को वरीयता देने के विरोध में सोमवार की देर शाम जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। इमरजेंसी और ओपीडी ठप कर देने से मरीजों की सांसत बढ़ गई थी। प्रदेश में चल रही हड़ताल को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने बृहस्पतिवार को इस मामले में की गई कार्रवाई का ब्योरा मांग लिया।
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कोर्ट ने पूछा है कि यदि जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर गए हैं तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? अब तक हुई मौतों के मामले में भी हुई कार्रवाई का ब्यौरा और गैरहाजिर डॉक्टरों की सूची भी कोर्ट ने मांगी है। पत्र आते ही प्राचार्य ने सभी विभागाध्यक्षों की बैठक बुला ली और सूची तैयार होने लगी। इसकी जानकारी होते ही डॉक्टर काम पर लौट आए।
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बृहस्पतिवार की सुबह ओपीडी सामान्य तरीके से चली। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को देखते हुए इस दिन मेडिकल कॉलेज में पीएसी के जवान तैनात कर दिए गए थे। जैसे ही सुबह पर्ची काउंटर बंद कराने का प्रयास किया गया, जवान सामने आ गए। इसके बाद सीनियर डॉक्टरों ने भी जूनियर के समर्थन में काली पट्टी बांधकर मरीजों का इलाज किया। दोपहर बाद मरीजों की भर्ती शुरू हो जाने से बड़ी राहत मिली।
काली पट्टी बांधकर करेंगे काम
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल की अगुवाई कर रहे डॉ. मयंक ने बताया कि उन्होंने सरकार के आश्वासन पर हड़ताल खत्म की है। केजीएमसी में डॉक्टरों को इस मामले की जानकारी दी गई। इसके बाद हड़ताल खत्म करने के साथ ही काली पट्टी बांधकर काम करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि हम लोग पैम्फलेट छपवा रहे हैं जिसे मरीजों को दिया जाएगा ताकि वे भी हमारे साथ हो रहे अन्याय को जान सकें। कैंडल मार्च भी निकाला जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्यपाल आफिस में हुई बैठक की भी जानकारी मिली है, जिसमें कहा गया है कि प्रवेश प्रक्रिया को एक महीने के लिए टाल दिया गया है।हाईकोर्ट ने हड़ताल पर जाने वाले जूनियर डॉक्टरों की सूची मांगी है। इस दौरान हुई मौतों का भी ब्योरा मांगा गया है। पत्र आने के बाद विभागाध्यक्षों को बुलाने के साथ ही जूनियर डॉक्टरों को बुलाया गया और उन्हें भी इसकी जानकारी दी गई जिसके बाद उन्होंने हड़ताल खत्म कर दी।
- प्रो. राजीव मिश्रा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज